एग्जाम एंजायटी को समझना है जरूरी
यह परीक्षा से पहले या उसके दौरान डर या घबराहट की तोव भावना है। छात्रों की बात करें तो, कम चिंता करने वाले छात्र थोड़ा कम नर्वस महसूस करते हैं। इस कारण वे अपनी पढ़ाई पर ध्यान केंद्रित कर पाते हैं और आसानी से सवालों के जवाब देते हैं।
वहीं अधिक चिंता करने वाले छात्र परीक्षा को लेकर कुछ ज्यादा ही घबराते हैं। कुछ तो असफलता के डर से परीक्षा में शामिल तक नहीं होते, जबकि कुछ ठीक से ध्यान केंद्रित नहीं कर पाते हैं। इससे उनमें नकारात्मक विचार आ जाते हैं। ऐसे में, चिंता को नियंत्रित करने के तरीकों को सीखना और सिखाना उनके प्रदर्शन को बेहतर बना सकता है।
इसका असर
चिंता कभी-कभी मददगार भी होती है, खासकर खतरे के मामलों में। ऐसे में दिमाग उस खतरे से बचने के लिए तुरंत सक्रिय हो जाता है। हालांकि, परीक्षा जैसी स्थितियों में चिंता मदद करने के बजाय अड़चनें पैदा करती है, जिससे छात्रों के मन में उटपटांग ख्याल आने लगते हैं। ऐसे में उनकी ऊर्जा को सकारात्मक बनाए रखने में मदद करनी चाहिए।
ऐसे करें इलाज
थोडी-सी सतर्कता बरत कर और बच्चों पर ध्यान देकर एग्जाम एंजायटी से बचा जा सकता है। हालांकि, यह चिंता की वजह और स्तर पर निर्भर करता है। छात्रों का पर्याप्त नींद लेना, अच्छा खान-पान तथा रोजाना व्यायाम करना सुनिश्चित करें।
इसके अलावा, उन्हें माइंडफुलनेस जैसी तकनीकों का अभ्यास करवाएं। इससे उन्हें ध्यान केंद्रित करने और स्मरण शक्ति बढ़ाने में मदद मिलेगी। उन्हें बताएं कि आखिरी समय में रटने के बजाय रोजाना छोटे-छोटे हिस्सों में अध्ययन करना फायदेमंद है। उन्हें चिंता पर काबू पाना सीखाएं।
-द कन्वर्शेसन