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इतिहास: महज 26 साल की उम्र में 'दिल की भाषा' पढ़ने लगा था यह वैज्ञानिक, फिर बना डाले ईसीजी-गैल्वेनोमीटर

Fri, 21 May 2021 02:44 PM IST
वर्तिका तोलानी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

अभूतपूर्व शोध के लिए विलेम एंथोवेन को सन 1924 में चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया था।

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विलेम एंथोवेन - फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
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जैकब एंथोवेन का जन्म ग्रोनिंगन, नीदरलैंड्स में हुआ था। इंडीज में वह एक सेना चिकित्सा अधिकारी थे, किंतु कुछ समय बाद उन्होंने सेमारंग में बतौर पैरिश डॉक्टर काम करना शुरू किया। लुईस एम.एम.सी. डी वोगेल, इंडीज के तत्कालीन वित्त निदेशक की बेटी थी। जैकब और लुईस के छह बच्चे थे। जिसमें विलेम सबसे बड़ा बेटा था। 

विलेम एंथोवेन का जन्म 21 मई, 1860 में डच ईस्ट इंडीज के सेमारंग (अब इंडोनेशिया) में हुआ था। छह साल की उम्र में ही विलेम के पिता का निधन हो गया। पिता की मृत्यु के चार वर्ष बाद उनकी मां लुईस ने अपनी परिवार के साथ हॉलैंड जाने का फैसला किया। हॉलैंड की एक विद्यालय से अपनी पढ़ाई पूरी करने के बाद विलेम ने अपने पिता के ही नक्शेकदम पर चलते हुए चिकित्सा के क्षेत्र में अपना भविष्य बनाने का निर्णय लिया। 

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मात्र 26 साल की उम्र में बन गए थे प्रोफेसर

1886 में, मात्र 26 साल की उम्र में ही वह लीडेन विश्वविद्यालय में फिजियोलॉजी के प्रोफेसर बन गए। तब तक उनके द्वारा किए गए सभी रिसर्च ऑप्टिक्स (प्रकाशिकी), रेस्पिरेशन (श्वसन) और हार्ट (हृदय) पर केंद्रित थे। इसी दौरान उन्होंने इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी का भी आविष्कार किया। इस उपकरण की मदद से हृदय की लय का अध्ययन करना और हृदय रोग का निदान करना बेहद आसान हो गया। 

ऐसे हुआ था गैल्वेनोमीटर (Galvanometer) का आविष्कार

1889 में, विलेम ने फिजियोलॉजिस्ट की पहली अंतरराष्ट्रीय कॉन्फ्रेंस में हिस्सा लिया था। इसी कॉन्फ्रेंस के दौरान उन्होंने "लिपमैन कैपिलरी इलेक्ट्रोमीटर" नामक एक उपकरण काे देखा, जो मानव हृदय की विद्युत गतिविधियों को रिकॉर्ड करता है। इस उपकरण के परिणामों का विश्लेषण करने के बाद, विलेम ने अधिक आधुनिक उपकरण पर काम करना शुरू किया। यहीं से स्ट्रिंग गैल्वेनोमीटर का आविष्कार हुआ। 

1924 में इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम के लिए मिला नोबेल पुरस्कार

विलेम के आविष्कार ने विद्युत प्रवाह (इलेक्ट्रिकल करंट) में भिन्नता को सटीक रूप से मापा। जिसकी सफलता की वजह से विलेम 1901 में अपने स्ट्रिंग गैल्वेनोमीटर के पहले संस्करण की घोषणा कर पाए। उन्होंने जल्द ही दुनिया का पहला इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम बनाया, जिसने मानव दिल की धड़कन को एक कागज पर दर्ज किया। यह उस समय बहुत बड़ी उपलब्धि मानी गई। उनके अभूतपूर्व शोध के लिए उन्हें 1924 में चिकित्सा के क्षेत्र में नोबेल पुरस्कार से सम्मानित भी किया गया।

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67 की आयु में हुआ निधन

आज, दुनिया भर के अस्पतालों में ईसीजी मशीनों का उपयोग किया जाता है, और समय के साथ-साथ तकनीक बहुत विकसित होते गई है, लेकिन अभी भी ईसीजी मशीनें, एंथोवेन द्वारा विकसित मूल सिद्धांतों और तकनीकों के अनुसार ही कार्य कर रही हैं। 1927 में 67 की उम्र में चिकित्सक और आविष्कारक विलेम एंथोलेम का निधन हो गया। उन्हें हमेशा आधुनिक इलैक्ट्रोकार्डियोग्राफी के जनक के रूप में याद किया जाएगा।

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