विज्ञान की दुनिया में कमला सोहोनी का नाम क्यों खास है?
- फोटो : AI Generated
भारत में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा और विज्ञान के क्षेत्र में आगे बढ़ना आज की तुलना में काफी मुश्किल था। ऐसे समय में कमला सोहोनी ने अपनी पढ़ाई और शोध के जरिए एक नई मिसाल कायम की। उन्हें व्यापक रूप से विज्ञान के किसी क्षेत्र में पीएचडी हासिल करने वाली पहली भारतीय महिला के रूप में जाना जाता है। उन्होंने 1939 में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय से डॉक्टरेट की उपाधि पूरी की। उनकी पूरी शैक्षणिक यात्रा केवल एक डिग्री हासिल करने की कहानी नहीं थी, बल्कि उस दौर में महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा और शोध के रास्ते खोलने वाली महत्वपूर्ण उपलब्धि भी थी।
कमला सोहोनी की पढ़ाई कहां से शुरू हुई?
कमला सोहोनी का जन्म 1911 में हुआ था। बचपन से ही उनकी रुचि विज्ञान और पढ़ाई में थी। उन्होंने बॉम्बे विश्वविद्यालय से स्नातक की पढ़ाई पूरी की और इसमें प्रथम श्रेणी के अंक हासिल किए। स्नातक के बाद उन्होंने अपनी पढ़ाई को आगे बढ़ाने और शोध के क्षेत्र में जाने का फैसला किया। इसके लिए उनका अगला पड़ाव बेंगलुरु स्थित इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस यानी आईआईएससी बना। उस समय भारत में महिलाओं के लिए उच्च स्तर की वैज्ञानिक शिक्षा और शोध के अवसर काफी सीमित थे।
आईआईएससी में उन्हें मुश्किल क्यों हुई?
कमला सोहोनी ने 1933 में आईआईएससी में जैव रसायन के शोध छात्र के रूप में प्रवेश के लिए आवेदन किया था। हालांकि शुरुआत में उन्हें केवल महिला होने के कारण प्रवेश नहीं दिया गया। उस समय वैज्ञानिक शोध और उच्च शिक्षा के संस्थानों में महिलाओं की भागीदारी बहुत कम थी। इसके बावजूद कमला सोहोनी ने हार नहीं मानी और संस्थान में पढ़ाई का अवसर पाने के लिए प्रयास जारी रखा। बाद में उन्हें कुछ शर्तों के साथ आईआईएससी में प्रवेश मिला और उन्होंने वहां अपना शोध शुरू किया। उनका प्रवेश भारतीय विज्ञान और उच्च शिक्षा के इतिहास में महिलाओं की बढ़ती भागीदारी की महत्वपूर्ण घटना माना जाता है।
आईआईएससी में उन्होंने कितने साल पढ़ाई की?
कमला सोहोनी करीब 1936 तक आईआईएससी में रहीं। इसके बाद 1937 में वह शोध छात्र के रूप में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय चली गईं। वहां उन्होंने वैज्ञानिक शोध को आगे बढ़ाया और 1939 में अपनी पीएचडी पूरी की। न्यून्हम कॉलेज, कैम्ब्रिज के अनुसार, उन्होंने अपनी डॉक्टरेट की डिग्री महज 14 महीने में पूरी की थी। यह उपलब्धि उस दौर में बेहद महत्वपूर्ण थी, क्योंकि महिलाओं के लिए उच्च शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के रास्ते अभी पूरी तरह आसान नहीं हुए थे।
कैम्ब्रिज की पीएचडी क्यों बनी बड़ी उपलब्धि?
1939 में कैम्ब्रिज से पीएचडी हासिल करना कमला सोहोनी के लिए व्यक्तिगत सफलता से कहीं अधिक था। यह ऐसे समय की उपलब्धि थी, जब भारतीय महिलाओं के लिए स्नातकोत्तर शिक्षा और वैज्ञानिक शोध के अवसर सीमित थे। उनकी यात्रा ने दिखाया कि महिलाओं को यदि उच्च शिक्षा और शोध के अवसर मिलें, तो वे विज्ञान के क्षेत्र में महत्वपूर्ण योगदान दे सकती हैं। आईआईएससी में शुरुआती विरोध का सामना करने से लेकर कैम्ब्रिज से डॉक्टरेट हासिल करने तक का उनका सफर महिलाओं की शिक्षा के इतिहास का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया।
भारत लौटकर कमला सोहोनी ने क्या किया?
कैम्ब्रिज से पढ़ाई पूरी करने के बाद कमला सोहोनी भारत लौट आईं और उन्होंने अपने अकादमिक तथा शोध करियर को आगे बढ़ाया। उन्होंने जैव रसायन के क्षेत्र में काम किया और आगे चलकर बॉम्बे के रॉयल इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, जिसे आज मुंबई के संदर्भ में जाना जाता है, में प्रोफेसर बनीं। बाद में उन्होंने इसी संस्थान के निदेशक के रूप में भी जिम्मेदारी संभाली। इस तरह उनका करियर केवल विदेशी विश्वविद्यालय से डिग्री हासिल करने तक सीमित नहीं रहा, बल्कि भारत में वैज्ञानिक शिक्षा और शोध से भी जुड़ा रहा।