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WB: बंगाल की सीएम को झटका! चांसलर बनाने वाले बिलों को नहीं मिली राष्ट्रपति की मंजूरी, गवर्नर ही रहेंगे प्रमुख

Tue, 16 Dec 2025 09:10 AM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

West Bengal: पश्चिम बंगाल में विश्वविद्यालयों के प्रशासनिक बदलाव का मामला गर्माया। राष्ट्रपति ने उन बिलों को मंजूरी नहीं दी, जिनके तहत मुख्यमंत्री को विश्वविद्यालय का चांसलर बनाया जाना था। इससे वर्तमान गवर्नर सी. वी. आनंद बोस ही यूनिवर्सिटी के प्रमुख बने रहेंगे।
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सीएम ममता - फोटो : ANI
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विस्तार
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Chief Minister: एक अधिकारी ने बताया कि राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू ने पश्चिम बंगाल विधानसभा द्वारा पारित तीन संशोधन बिलों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है, जिनमें राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के चांसलर के रूप में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को लाने की बात कही गई थी।

 

अधिकारी ने सोमवार को बताया कि इसके परिणामस्वरूप, मौजूदा कानूनी प्रावधानों के अनुसार, राज्यपाल सी वी आनंद बोस पहले की तरह ही चांसलर के रूप में अपना काम करते रहेंगे।

 

अप्रैल 2024 में, बोस ने पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी लॉज़ (संशोधन) बिल, 2022, आलिया यूनिवर्सिटी (संशोधन) बिल, 2022, और पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज (संशोधन) बिल, 2022 को भारत के राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर दिया था। पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ़ हेल्थ साइंसेज (संशोधन) बिल, 2022।

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CM को चांसलर बनाने वाले संशोधन बिल राष्ट्रपति के पास

अप्रैल 2024 में, बोस ने पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी लॉज (संशोधन) बिल, 2022, आलिया यूनिवर्सिटी (संशोधन) बिल, 2022, और पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (संशोधन) बिल, 2022 को भारत के राष्ट्रपति के विचार के लिए आरक्षित कर दिया था। पश्चिम बंगाल यूनिवर्सिटी ऑफ हेल्थ साइंसेज (संशोधन) बिल, 2022।
 
उस साल जून में पारित सभी बिलों में राज्य-सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के चांसलर के रूप में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को लाने की बात कही गई थी।
 
उस समय जगदीप धनखड़ पश्चिम बंगाल के राज्यपाल थे।
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मौजूदा कानून रहेगा लागू

लोक भवन के अधिकारी ने कहा, "इन बिलों में राज्य-सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों के चांसलर के रूप में राज्यपाल की जगह मुख्यमंत्री को लाने की बात कही गई थी। भारत की माननीय राष्ट्रपति ने उपरोक्त बिलों को मंजूरी देने से इनकार कर दिया है।"
 
राज्य सरकार और राज्यपाल के बीच राज्य द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के प्रशासन को लेकर चल रही खींचतान के कारण ममता बनर्जी प्रशासन को यह कानून लाना पड़ा था।
 
राज्य सरकार ने तर्क दिया था कि इस बदलाव से प्रशासनिक फैसले तेजी से लिए जा सकेंगे और विश्वविद्यालयों का शासन ज्यादा प्रभावी होगा।
 
केंद्रीय स्तर पर जांच के बाद, राष्ट्रपति ने बिलों को मंज़ूरी देने से इनकार कर दिया। अधिकारी ने कहा कि इसके परिणामस्वरूप, राज्य-सहायता प्राप्त विश्वविद्यालयों को नियंत्रित करने वाले मुख्य अधिनियम, जो यह प्रावधान करते हैं कि "राज्यपाल, अपने पद के कारण, विश्वविद्यालय के चांसलर होंगे," लागू रहेंगे।
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