फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Vice President: उपराष्ट्रपति ने जेके में एसएमवीडीयू के दीक्षांत समारोह में लिया भाग, कहा राष्ट्रहित सर्वोच्च

Sat, 15 Feb 2025 04:24 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Vice President Dhankhar: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को एसएमवीडीयू दीक्षांत समारोह में उपस्थित हुए। उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा कि हम भारतीय हैं और भारतीय होना ही हमारी पहचान है। राष्ट्रवाद हमारा धर्म है और चाहे जो भी परिस्थिति हो, राष्ट्रवाद को सर्वोच्च स्तर पर रखना हमारा कर्तव्य है।
विज्ञापन
Vice President Dhankhar - फोटो : PTI
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Vice President Dhankhar: उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को यहां श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय (SMVDU) के दीक्षांत समारोह में भाग लिया और इस बात पर जोर दिया कि राष्ट्रीय हित किसी भी राजनीतिक या व्यक्तिगत हित से बड़ा है।

विज्ञापन


उपराज्यपाल मनोज सिन्हा, मुख्यमंत्री उमर अब्दुल्ला, शिक्षा मंत्री सकीना फिरदौस भी एसएमवीडीयू परिसर के मातृका सभागार में 10वें दीक्षांत समारोह में शामिल हुए।

उपराष्ट्रपति ने दीक्षांत समारोह को संबोधित करते हुए कहा, "हम भारतीय हैं और भारतीय होना ही हमारी पहचान है। राष्ट्रवाद हमारा धर्म है और चाहे जो भी परिस्थिति हो, राष्ट्रवाद को सर्वोच्च स्तर पर रखना हमारा कर्तव्य है।"
विज्ञापन


उन्होंने पिछले 10 वर्षों में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में भारत की प्रगति पर प्रकाश डालते हुए कहा, "कोई भी राजनीतिक या व्यक्तिगत हित राष्ट्रीय हित से बड़ा नहीं हो सकता।"

Vice President Dhankhar - फोटो : PTI
उन्होंने कहा कि हमें विकसित भारत की ओर अपनी यात्रा को तेजी से आगे बढ़ाना चाहिए। "इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम दंड विधान से न्याय विधान में परिवर्तन है, जो औपनिवेशिक मानसिकता को समाप्त करता है।"

उपराष्ट्रपति ने कहा, "आप एक आत्मविश्वास से भरे और लचीले भारत में रह रहे हैं।"

उन्होंने कहा कि आज भारत को निवेश और अवसरों के लिए एक पसंदीदा स्थान के रूप में वैश्विक स्तर पर सराहा जा रहा है। आजादी के बाद से हमारे इतिहास में पहले कभी किसी भारतीय प्रधानमंत्री की आवाज वैश्विक नेताओं के बीच इतनी गूंजती नहीं रही।
 
धनखड़ ने इस बात पर जोर दिया कि जम्मू-कश्मीर में परिवर्तन केवल एक क्षेत्रीय घटना नहीं है, बल्कि भारत के राष्ट्रीय पुनर्जागरण का एक महत्वपूर्ण हिस्सा है।

Vice President Dhankhar - फोटो : PTI

इतने छात्रों ने डिग्री प्राप्त की

शैक्षणिक वर्ष 2023-24 में, एसएमवीडीयू के कुल 684 छात्रों ने विभिन्न विषयों में स्नातक की डिग्री के लिए अर्हता प्राप्त की है; 147 छात्रों ने मास्टर डिग्री के लिए; 34 छात्रों ने एकीकृत मास्टर डिग्री के लिए और 44 छात्रों ने पीएचडी डिग्री के लिए अर्हता प्राप्त की है। 

विश्वविद्यालय के एक अधिकारी ने बताया कि चयनित विद्यार्थियों को गणमान्य व्यक्तियों द्वारा कुल 26 पदक, नौ विशिष्टता प्रमाण-पत्र और 10 इन्फोसिस फाउंडेशन उत्कृष्टता पुरस्कार प्रदान किए गए।

उन्होंने बताया कि कुल 501 छात्र और 408 छात्राओं को डिग्री प्रदान की गई।

Vice President Dhankhar - फोटो : PTI

जम्मू-कश्मीर में नई यात्रा शुरू हुई

उप राष्ट्रपति जगदीप धनखड़ ने शनिवार को कहा कि 2019 में अनुच्छेद 370 को "ऐतिहासिक" तरीके से हटाए जाने के बाद जम्मू कश्मीर में एक नई यात्रा शुरू हुई है और इस पवित्र क्षेत्र को अब संघर्ष क्षेत्र नहीं माना जाता तथा इसके लोगों की उम्मीदें काफी बढ़ गई हैं।

भाजपा विचारक श्यामा प्रसाद मुखर्जी का स्पष्ट संदर्भ देते हुए धनखड़ ने कहा कि इस धरती के एक महान सपूत ने एक बार 'एक देश में एक निशान, एक विधान, एक प्रधान' की मांग उठाई थी और वह सपना अनुच्छेद 370 के हटने के बाद पूरा हुआ है, जो पूर्ववर्ती जम्मू कश्मीर राज्य को विशेष दर्जा प्रदान करता था।

उपराष्ट्रपति ने यहां श्री माता वैष्णो देवी विश्वविद्यालय (एसएमवीडीयू) के 10वें दीक्षांत समारोह के दौरान उपस्थित जनसमूह को संबोधित करते हुए कहा, "जहां कभी अव्यवस्था थी, वहां अब वास्तविक व्यवस्था और स्थिरता है।"

Vice President Dhankhar - फोटो : PTI
उन्होंने कहा, "पीढ़ियों की आकांक्षाओं को उस समय पंख मिले जब 2019 में अनुच्छेद 370 के ऐतिहासिक निरस्तीकरण के साथ अलगाव की संवैधानिक दीवारें ढह गईं। माता वैष्णो देवी की पवित्र भूमि पर, एक नई तीर्थयात्रा शुरू हुई - अलगाव से एकीकरण की यात्रा। अनुच्छेद 370 संविधान में एक अस्थायी अनुच्छेद था।"

उन्होंने कहा कि संविधान निर्माता डॉ. बी.आर. अंबेडकर ने अनुच्छेद 370 को छोड़कर सभी अनुच्छेदों का मसौदा तैयार किया था।

उन्होंने कहा, "मैं आपसे आग्रह करूंगा कि आप ऐतिहासिक परिप्रेक्ष्य में जाकर इसकी पृष्ठभूमि जानें कि उन्होंने ऐसा क्यों नहीं किया।" उन्होंने आगे कहा कि भारतीय राजनीतिक क्षितिज के एक अन्य "महान व्यक्ति" सरदार वल्लभभाई पटेल ने जम्मू और कश्मीर राज्य को छोड़कर शेष भौतिक राज्यों को एकीकृत करने का कार्य अपने ऊपर लिया था।

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ - फोटो : पीटीआई
धनखड़ ने कहा, "अब बदलाव की बयार शांति और प्रगति लेकर आई है। एक महान धरतीपुत्र ने 'एक देश में एक निशान, एक विधान, एक प्रधान' की मांग की थी और वह पूरी हो गई है।"

उपराष्ट्रपति ने कहा कि वह पहली बार 1980 के दशक की शुरुआत में जम्मू-कश्मीर आए थे, जब उन्होंने अपने परिवार के साथ गुलमर्ग, सोनमर्ग और अन्य स्थानों का दौरा किया था। उन्होंने कहा, "दूसरी यात्रा एक बहुत ही दर्दनाक अनुभव था। मैं 1989 में संसद के लिए चुना गया था। मैं मंत्रिपरिषद के सदस्य के रूप में श्रीनगर आया था। हमने श्रीनगर की सड़कों पर दर्जनों लोगों को भी नहीं देखा और दृश्य निराशा भरा था।"

"देखिए, हम अब कहां पहुंच गए हैं। राज्यसभा में मेरे लिए यह गौरवपूर्ण क्षण था, जब यह घोषित किया गया कि जम्मू-कश्मीर में दो करोड़ से अधिक पर्यटक आए हैं।"

उपराष्ट्रपति जगदीप धनखड़ - फोटो : ANI (Video Grab)

35 वर्षों में सबसे अधिक हुआ मतदान

धनखड़ ने यह भी कहा कि जम्मू-कश्मीर, जहां 2024 के लोकसभा चुनावों के दौरान 35 वर्षों में सबसे अधिक मतदान हुआ था, घाटी में मतदाता भागीदारी में 30 अंकों की वृद्धि देखी गई।

"लोकतंत्र को उसकी असली आवाज, उसकी असली प्रतिध्वनि मिल गई है। यह क्षेत्र अब संघर्ष की कहानी नहीं है; नए कश्मीर में हर निवेश प्रस्ताव सिर्फ पूंजी के बारे में नहीं है, यह विश्वास बहाल करने और विश्वास को पुरस्कृत करने के बारे में है।

उन्होंने कहा, "परिवर्तन अदृश्य नहीं है; यह प्रत्यक्ष है। धारणा बदल गई है, जमीनी हकीकत बदल रही है, लोगों की उम्मीदें बढ़ रही हैं।"

धनखड़ ने कहा कि महज दो वर्षों में जम्मू-कश्मीर को 65,000 करोड़ रुपये के निवेश प्रस्ताव प्राप्त हुए हैं, जो इस क्षेत्र में मजबूत आर्थिक रुचि का संकेत है।
विज्ञापन

जगदीप धनखड़, उपराष्ट्रपति - फोटो : X / @VPIndia
उपराष्ट्रपति ने कहा, "2019 के बाद पहली बार जम्मू-कश्मीर में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) आया है और कई अंतरराष्ट्रीय कंपनियां इसमें रुचि दिखा रही हैं। यह क्षेत्र विश्वास और पूंजी का संगम है।"

उन्होंने कहा, "2023 में दो करोड़ से अधिक पर्यटकों की यात्रा ने स्थानीय अर्थव्यवस्था को जबरदस्त बढ़ावा दिया है। जिसे कभी धरती पर स्वर्ग कहा जाता था, वह अब आशा और समृद्धि का प्रतीक है। परिवर्तन की बयार शांति और प्रगति लेकर आई है। आइए हम जम्मू-कश्मीर और भारत के लिए एक नई सुबह के निर्माता बनें।"
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें