वहीं, एसएफआई नेता सोमनाथ सो ने दावा किया कि चक्रवर्ती के सुरक्षा गार्डों ने प्रदर्शनकारियों की पिटाई की और जबरन घेराव हटवाया जबकि केंद्रीय विश्वविद्यालय के अधिकारी ने स्पष्ट किया कि छात्रों के खिलाफ किसी तरह का बल प्रयोग नहीं किया गया। एक सवाल के जवाब में उन्होंने कहा कि छात्रों का एक छोटा समूह कुलपति आवास के पास डेरा डाले हुए है और अधिकारी स्थिति पर नजर रखे हुए हैं। इससे पहले छात्रों के एक समूह ने बुधवार शाम करीब चार बजे परिसर में प्रोफेसर चक्रवर्ती के कार्यालय का घेराव किया।
प्रोफेसर बिद्युत चक्रवर्ती को 2018 में कुलपति नियुक्त किया गया था। उन्होंने आरोप लगाया कि आंदोलनकारी छात्रों ने उनके साथ दुर्व्यवहार किया, इसके बावजूद वह उनके दबाव की रणनीति के आगे नहीं झुके। कुलपति ने जोर देकर कहा कि वे सभी मुझे और शिक्षकों को अपमानित करना चाहते हैं, क्योंकि मैंने विश्वभारती के शैक्षणिक और प्रशासनिक मामलों में अनुशासन लाने की मांग की थी।
वहीं, एसएफआई नेता सो ने कहा कि छात्रों ने 10 दिन पहले कुलपति के कार्यालय में संस्थान के शैक्षणिक कामकाज में सुधार के तरीकों के बारे में मांगों का एक चार्टर प्रस्तुत किया था। उस पर कोई जवाब नहीं मिला, इसलिए हम उनके साथ चर्चा करना चाहते थे। लेकिन उन्होंने हमें गाली दी, जिसके बाद घेराव शुरू हो गया। उधर, मामले में शिक्षक संगठन विश्व भारती यूनिवर्सिटी फैकल्टी एसोसिएशन ने गुरुवार को एक बयान में आरोप लगाया कि पीड़ित छात्रों के आक्रोश के लिए प्रोफेसर बिद्युत चक्रवर्ती पूरी तरह से जिम्मेदार हैं। इसमें कहा गया है, इस स्थिति के एकमात्र समाधान के रूप में प्रोफेसर चक्रवर्ती के इस्तीफे की मांग करता है।