ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी में ग्रामी अवार्ड से सम्मानित पण्डित विश्व मोहन भट्ट ने आज अपनी विख्यात ’मोहन वीणा’ का जादू चलाया। यह मौका था स्पिक मैके द्वारा आयोजित सांस्कृतिक संध्या का। पण्डित भट्ट जो कि विश्व में मोहन वीणा के अविष्कार के लिए प्रसिद्ध हैं, एवं जो सरोद , सितार और वीणा का संगम है। प्रस्तुति की शुरूआत में पण्डित जी ने श्रोताओं को संगीत का मनुष्य के जीवन में महत्व बताते हुए कहा कि संगीत आत्मा का परमात्मा से मिलन का एक मणिकंचन संयोग है।
उन्होंने संगीत संध्या की शुरूआत मधुवंती राग से की । इस प्रस्तुति में पण्डित जी के साथ तबला वादक पण्डित श्री रामकुमार मिश्रा और उनके सुपुत्र श्री राहुल मिश्रा ने दिया। पण्डित भट्ट ने मधुवंती समेत कई धुनों के जरिए ऐसा जादू चलाया कि श्रोता वाह-वाह कर उठे।
करीब एक घण्टे की उनकी प्रस्तुतियों के बीच सभागार बार-बार तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। मोहन वीणा की धुनों के साथ तबले की थापों की जुगलबंदी ने श्रोताओं को बहुत रोमांचित किया। कार्यक्रम के दौरान पण्डितजी अपनी प्रस्तुति ’ए मीटिंगबाई द रीवर’जिनके लिए उन्हें सन् 1994 में ग्रामी अवार्ड से सम्मानित किया गया , इस प्रस्तुति से उन्होंने दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।
ग्राफिक एरा डीम्ड यूनिवर्सिटी के कुलाधिपति प्रो.आर.सी. जोशी ने उन्हें पुष्प्गुच्छ एवं स्मृति चिन्ह भेंटकर उपस्थित सभी शिक्षकों एव छात्रों की ओर से आभार व्यक्त किया, वहीं ग्राफिक एरा हिल यूनिवर्सिटी के कुलपति प्रो. संजय जसोला ने तबला वादक श्री रामकुमार मिश्रा एवं राहुल मिश्रा को स्मृति चिन्ह एवं पुष्पगुच्छ भेंट किया।