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Visa: अमेरिका में चीनी छात्र से घंटों पूछताछ के बाद डिपोर्ट, ट्रंप नीतियों में बदलाव के बावजूद एंट्री बैन

Sun, 31 Aug 2025 01:50 PM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Chinese students USA: अमेरिका पहुंचे चीनी छात्र से 36 घंटे तक पूछताछ कर वापस भेज दिया गया। रिपोर्ट के मुताबिक, कई छात्रों को वैध वीजा होने के बावजूद एयरपोर्ट पर रोका और डिपोर्ट किया जा रहा है। पढ़ें नीचे विस्तार से... 
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Chinese student deported from US (सांकेतिक तस्वीर) - फोटो : Adobe Stock
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विस्तार
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Chinese student deported from US: अमेरिका में पढ़ाई करने पहुंचे एक 22 वर्षीय चीनी छात्र का सपना अचानक टूट गया। चीन से 29 घंटे की लंबी यात्रा के बाद टेक्सास एयरपोर्ट पहुंचे छात्र गू को न केवल घंटों तक पूछताछ का सामना करना पड़ा बल्कि 36 घंटे बाद उसे वापस चीन भेज दिया गया। यही नहीं, छात्र पर पांच साल तक अमेरिका में प्रवेश पर रोक भी लगा दी गई।

22 वर्षीय छात्र से 36 घंटे पूछताछ

छात्र ने बताया कि उसके पास सभी दस्तावेज पूरे थे। वह यूनिवर्सिटी ऑफ ह्यूस्टन में दर्शनशास्त्र (Philosophy) पढ़ने आया था। इससे पहले वह कॉर्नेल यूनिवर्सिटी में एक्सचेंज प्रोग्राम के तहत पढ़ाई कर चुका था और तब उसे कोई दिक्कत नहीं हुई थी। लेकिन इस बार एयरपोर्ट पर पहुंचते ही कस्टम अधिकारियों ने उसे रोक लिया, उसके इलेक्ट्रॉनिक डिवाइस खंगाले और लगातार घंटों पूछताछ की।

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पूछताछ का केंद्र उसके चीनी कम्युनिस्ट पार्टी से संबंध और चाइना स्कॉलरशिप काउंसिल से जुड़े चैट्स रहे। छात्र का कहना है कि उसने कभी पार्टी जॉइन नहीं की, हालांकि उसके माता-पिता सदस्य हैं। वह खुद सिर्फ पार्टी की युवा शाखा का हिस्सा रहा है, जैसा कि लगभग हर चीनी युवक होता है।

अमेरिकी अधिकारियों पर आरोप

कस्टम अधिकारियों ने उससे 10 घंटे से अधिक पूछताछ की और फिर डिपोर्टेशन का नोटिस थमा दिया। आधिकारिक कारण “अपर्याप्त दस्तावेज” बताया गया। छात्र ने कहा कि उसे ठंडे कमरे में रखा गया, जहां वह 40 घंटे से अधिक बिना नींद के रहा और ठंड से कांपता रहा। 

चीन ने जताई नाराजगी

इस घटना ने अमेरिका और चीन के बीच तनाव को और गहरा कर दिया है। चीनी दूतावास ने दावा किया कि हाल के दिनों में 10 से अधिक छात्रों और शोधकर्ताओं को इसी तरह रोका और वापस भेजा गया है। उनका आरोप है कि अमेरिकी अधिकारी चीनी छात्रों के साथ भेदभावपूर्ण और राजनीतिक रूप से प्रेरित कार्रवाई कर रहे हैं।

उधर, ट्रंप प्रशासन की नीतियों में भी विरोधाभास दिख रहा है। एक ओर, अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने हाल ही में बयान दिया था कि वह “हजारों चीनी छात्रों का स्वागत करेंगे”, वहीं दूसरी ओर एयरपोर्ट पर ऐसे मामलों में सख्ती देखी जा रही है।

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अब यह छात्र अपील करने पर विचार कर रहा है, लेकिन इसमें वर्षों लग सकते हैं और काफी खर्च भी आएगा। फिलहाल, उसका अमेरिका में पढ़ाई और करियर बनाने का सपना अधर में लटक गया है।

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