नए नियमों के मुताबिक, जिन डीम्ड विश्वविद्यालयों को सरकार से उनकी सालाना कमाई से 50 फीसदी ज्यादा फंड मिलता है, उनके प्रमुखों की नियुक्ति केंद्र द्वारा की जाएगी। इन नियमों का पहला सेट 2010 में अधिसूचित किया गया था, जिसे 2016 और 2019 में संशोधित किया गया था। बाकी मामलों में, कुलपतियों की नियुक्ति कुलाधिपति द्वारा एक खोज-सह-चयन समिति द्वारा सुझाए गए तीन नामों के पैनल से की जाएगी। हालांकि, इस कदम पर कांग्रेस नेता जयराम रमेश ने सवाल उठाया है और इन संस्थानों की स्वायत्तता के बारे में आशंकाएं जताई हैं।
उन्होंने ट्वीट किया "यद्यपि वर्षों से, भारत सरकार टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज (टीआईएसएस) के लिए वित्त पोषण का मुख्य आधार बन गई है, लगातार सरकारों ने टाटा ट्रस्ट को गवर्निंग बोर्ड के अध्यक्ष को नामित करने और बोर्ड को चयन करने की अनुमति देकर इसकी स्वायत्तता सुनिश्चित की है। अब भारत सरकार अध्यक्ष और निदेशक दोनों की नियुक्ति करेगी। हम जानते हैं कि विशेष रूप से सामाजिक विज्ञान के क्षेत्र में इसका क्या मतलब है,''
इन पांच विश्वविद्यालयों में होगी नियुक्ति
इन पांच विश्वविद्यालयों में टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज मुंबई(TISS) दयालबाग शैक्षिक संस्थान, आगरा, गुजरात विद्यापीठ, अहमदाबाद, अविनाशीलिंगम इंस्टीट्यूट फॉर होम साइंस एंड हायर एजुकेशन फॉर वुमेन, कोयंबटूर और गुरुकुल कांगड़ी, हरिद्वार के कुलपतियों की नियुक्ति अब सरकार करेगी।
एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा, "मंत्रालय एक खोज-सह-चयन समिति (Search-Cum-Selection Committee) का गठन करेगा और बाद में प्रधान मंत्री नरेंद्र मोदी की अध्यक्षता वाली कैबिनेट नियुक्ति समिति से अनुमोदन प्राप्त करने के बाद नियुक्ति पत्र जारी करेगा।" देश में 126 डीम्ड-टू-बी-विश्वविद्यालय हैं, जिनमें से 40 केंद्र और राज्य सरकारों द्वारा नियंत्रित हैं, और शेष 86 स्व-वित्तपोषित हैं।