फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Samwad 2026: बच्चे AI इस्तेमाल कर रहे, शिक्षकों के लिए इसे अपनाना बड़ी चुनौती, मंच पर बोले तेजस्वी घनशाला

Wed, 24 Jun 2026 02:23 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Amar Ujala Samwad: देहरादून में आयोजित अमर उजाला संवाद के मंच पर एआई, शिक्षा और भविष्य विषय पर पैनल चर्चा का आयोजन किया गया। इस पैनल में यूटीयू की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर और ग्राफिक एरा के सीटीओ तेजस्वी घनशाला शिक्षा तकनीक और भविष्य के कौशल पर अपने विचार रखे।
 
विज्ञापन
Uttarakhand Samwad 2026 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

Uttarakhand Samwad 2026: अमर उजाला संवाद में शिक्षा, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस और भविष्य की चुनौतियों व संभावनाओं पर विशेष पैनल चर्चा की गई। इस सत्र में वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति डॉ. तृप्ता ठाकुर और ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी के मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) तेजस्वी घनशाला शामिल हुए।

विज्ञापन


पैनल चर्चा में शिक्षा व्यवस्था पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता के बढ़ते प्रभाव, भविष्य के रोजगार, नई तकनीकों के साथ बदलती कौशल आवश्यकताओं और उच्च शिक्षा संस्थानों की भूमिका जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर विचार-विमर्श किया गया।

पैनल में शामिल प्रमुख हस्तियां

डॉ. तृप्ता ठाकुर: वीर माधो सिंह भंडारी उत्तराखंड तकनीकी विश्वविद्यालय की कुलपति हैं। तकनीकी शिक्षा और अकादमिक नेतृत्व के क्षेत्र में उनका महत्वपूर्ण योगदान रहा है।

तेजस्वी घनशाला: ग्राफिक एरा यूनिवर्सिटी में मुख्य प्रौद्योगिकी अधिकारी (CTO) हैं। तकनीक, डिजिटल नवाचार और उभरते टेक्नोलॉजी ट्रेंड्स से जुड़े विषयों पर उनकी विशेष रुचि और अनुभव है।

छात्र एआई को एडॉप्ट कर चुके, लेकिन शिक्षकों को भी इसे एडॉप्ट करना होगा: तेजस्वी घनशाला

सवाल: ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय भी प्रयास कर रहा है कि बच्चे एआई को किस तरह एडॉप्ट करें। कितना चैलेंज आप लोगों के लिए है और अभी बच्चों के साथ-साथ टीचर्स भी इसका इस्तेमाल करें, इस दिशा में आप क्या प्रयास कर रहे हैं?

इस सवाल के जवाब में ग्राफिक एरा विश्वविद्यालय के सीटीओ तेजस्वी घनशाला ने कहा कि सबसे बड़ा चैलेंज टीचर्स के लिए एआई को एडॉप्ट करना है। बच्चे पहले ही एआई को अपना चुके हैं।

घनशाला ने कहा, "बच्चे पहले ही एआई का इस्तेमाल कर रहे हैं। आप चैटजीपीट या किसी और टूल की बात करें, तो बच्चे इनका इस्तेमाल अपनी रोजमर्रा की जिंगदी में कर रहे हैं, क्योंकि वह उनका काम आसान कर देता है। शिक्षकों में अभी हिचकिचाहट है। मुझे लगता है कि शिक्षक जितना जल्दी इसे एडॉप्ट करेंगे, हम उतना जल्दी आगे बढ़ सकेंगे।"
विज्ञापन

शिक्षक अभी तैयार नहीं, उन्हें तैयार करने की जरूरत

सवाल: हर किसी के हाथ में फोन है। बच्चे अपनी स्किल पर काम कर रहे हैं, शिक्षकों को रिप्लेस करने के विकल्पों की तलाश कर रहे हैं। ये कितनी बड़ी चुनौती है? क्या ऐसे में शिक्षक रिप्लेस हो रहे हैं? एआई को लेकर एक शिक्षाविद् के तौर आपकों क्या लगता है, खतरा ज्यादा या अवसर ज्यादा हैं?

इस पर बात करते हुए तृप्ता ठाकुर बोलीं, "साइंस जब आता है तो दोनों चीजें लेकर आता है। वह अवसर और खतरा दोनों साथ लाता है। उदाहरण के लिए न्यूक्लिय एडीशन बहुत जरूरी है, दूसरी ओर न्यूक्लियर वेपन कितने खतरनाक हैं। हर बच्चों के पास स्मार्टफोन एक उम्र से पहले नहीं आना चाहिए। ये पैरेंट और हम सभी लोगों को देखना पड़ेगा। यूके, यूरोप समेत बहुत सारे देशों ने 16 वर्ष की उम्र से पहले स्मार्टफोन के इस्तेमाल को सीमित किया है।

उन्होंने आगे कहा, "जहां तक एआई की बात है, मैं समझती हूं कि इस टूल के द्वारा शिक्षा में क्रांति तो आएगी ही। आज कोई भी बेस्ट ऑफ द बेस्ट टीचर से पढ़ना चाहेगा। अगर मेरे विषय के बेस्ट टीचर ऑनलाइन उपलब्ध हैं तो मैं पढ़ना चाहूंगी।"

भविष्य में एआई समझने वालें लोगों की मांग बढ़ेगी

तृप्ता ठाकुर बोलीं, "आने वाले समय में ऐसे लोगों की मांग बढ़ेगी जो एआई को समझते हुए काम कर सकते हैं। ये हमारे लिए एक टूल, हमारा साधन बनेगा। भारत इस पर काम कर रही है कि एआई के एथिक्स को कैसे जोड़े इसे रेग्यूलेट कैसे करें।"
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें