Urdu: अब उर्दू बाल साहित्य में छात्र प्रेम दीवानी मीरा बाई, महाराष्ट्र का हजारों साल पुराना पालकी त्योहार, पारंपरिक लोक नृत्य लेजिम से लेकर आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस और रोबोटिक्स पढ़ेंगे। राष्ट्रीय उर्दू भाषा संवर्धन परिषद (एनसीपीयूएल) युवा पाठकों को भाषा से जोड़ने के मकसद से उर्दू बाल साहित्य को पुनर्जीवित करने जा रही है। इसमें भारतीय संस्कृति और समकालीन जीवन के मुद्दों को जोड़ा गया है।
एनसीपीयूएल के निदेशक डॉ. शम्स इकबाल ने कहा, आम लोगों में धारणा है कि उर्दू फारसी और अरबी संस्कृति से प्रभावित है। क्योंकि, उन पुस्तकों में भारतीय संस्कृति का सार गायब था। लेकिन नई पुस्तकों में पाठक भारतीय संस्कृति को भी देखेंगे। हमारा मकसद, उर्दू कहानी को अपनी धरती के करीब लाना है, ताकि बच्चों के जीवन, त्योहारों और नायकों को प्रतिबिंबित किया जा सके।
भारत जैसे बहुभाषी और बहुसांस्कृतिक राष्ट्र में, यह जरूरी है कि युवा पाठक हमारे देश की विविधता को उर्दू समेत हर भाषा में देखें। जब बच्चे इन कहानियों में अपनी संस्कृति और समकालीन वास्तविकताओं को पाते हैं, तो उनके भाषा से जुड़ने की संभावना बढ़ जाती है। इस तरह हम यह सुनिश्चित कर सकते हैं कि उर्दू और उसकी सुंदर लिपि युवा पीढ़ी के लिए जीवंत, प्रासंगिक और प्रिय बनी रहे।