यूपीएससी देश के गर्वनेंस को बैकबोन प्रदान करता है
अध्यक्ष अजय कुमार ने कहा, "एस्पिरेंट्स चाहे ग्रामीण क्षेत्र से हो या किसी और क्षेत्र से, हमारे लिए सभी लोग मिलकर भारत की विविधता को प्रदर्शित करते हैं। हमारे पूर्वजों ने जब यूपीएससी के बारे में सोचा था और इसकी रचना एक संवैधानिक निकाय की तरह की थी, तब उन्होंने यह सोचा था कि उसका एक संवैधानिक अभिभावक होना चाहिए। इसी वजह से आज भी यूपीएससी देश के गर्वनेंस को बैकबोन प्रदान करता है।"
उन्होंने आगे कहा, "बहुत कम संस्थाएं हैं जो 100 साल के बाद कह सकती हैं कि आज भी लोग उसपर उतना ही भरोसा करते हैं, जितना उनकी स्थापना के समय करते थे। यूपीएससी कभी भी किसी दबाव में नहीं आता है। इसके लिए हमारा मूलमंत्र कॉन्फिडेंशियलिटी है। अध्यक्ष होने के नाते मुझे भी सबकुछ पता नहीं रहता है। जिनको मालूम होना चाहिए, केवल उन्ही को मालूम होता है।"
यूपीएससी में सफलता की सिर्फ एक कुंजी, वो है मेरिट
उन्होंने बताया, "यूपीएससी में सफलता की केवल एक ही चाबी है, और वो है मेरिट। यहां सिर्फ मेरिट चलती है। हम हमेशा यह कोशिश करते हैं कि हर केंडिडेट को पूरी तरह से फेयरनेस मिले। इसी वजह से पिछले दशकों में यूपीएससी जितना इनक्लुसिव और कोई भी माध्यम नहीं है।"
अजय कुमार ने इस बात पर खेद जताया कि टाउनहॉल केवल हिंदी में हुआ। उन्होंने आश्वासन दिया कि भविष्य में इस तरह के संवाद लगातार आयोजित किए जाएंगे और संभव है कि हर वर्ष टाउनहॉल सेशन हो। आइए जानते हैं इस टाउनहाल में अध्यक्ष अजय कुमार ने अभ्यर्थियों के सवालों के क्या जवाब दिए।
सोशल मीडिया के जरिए भेजे अभ्यर्थियों ने सवाल
चेयरमैन ने अपने लिंक्डइन पोस्ट में लिखा था कि वह पहली बार यूपीएससी टाउनहॉल करने को लेकर उत्साहित हैं। अभ्यर्थी 1 अक्टूबर को दोपहर 12 से 1 बजे के बीच उनसे जुड़ सकते हैं। इस दौरान उम्मीदवार सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स - एक्स, फेसबुक और इंस्टाग्राम पर #AskChairmanUPSC हैशटैग के साथ अपने सवाल साझा कर सकते थे।
28 से 30 सितंबर तक सुबह 10 बजे तक आयोग ने अभ्यर्थियों से प्रश्न आमंत्रित किए थे। परीक्षार्थी वीडियो या टेक्स्ट के माध्यम से अपने सवाल भेज सकते थे।
यूपीएससी के 100 साल
यूपीएससी की स्थापना 1 अक्तूबर 1926 को ली कमीशन की सिफारिशों पर गवर्नमेंट ऑफ इंडिया एक्ट 1919 के तहत हुई थी। उस समय इसे पब्लिक सर्विस कमीशन कहा जाता था। 1937 में नाम बदलकर फेडरल पब्लिक सर्विस कमीशन किया गया। स्वतंत्रता के बाद जब 26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू हुआ, तब इसका वर्तमान नाम यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन (UPSC) रखा गया। अगले वर्ष यूपीएससी अपनी स्थापना के 100 वर्ष पूरे करेगा।