प्रदेश की दो सबसे बड़ी परीक्षाओं को लेकर असमंजस की स्थिति बनी हुई है। पीसीएस मुख्य परीक्षा-2016 का परिणाम फंसा हुआ है तो दूसरी ओर पीसीएस मुख्य परीक्षा-2017 के आयोजन पर ही संकट मंडरा रहा है।
उत्तर प्रदेश लोक सेवा आयोग (यूपीपीएससी) की ओर से स्थिति स्पष्ट न किए जाने से इन परीक्षाओं से जुड़े हजारों प्रतियोगी परेशान हैं। आए दिन आयोग का चक्कर लगा रहे हैं लेकिन वहां कोई जवाब देने वाला नहीं है।
प्रदेश की सबसे बड़ी परीक्षा पीसीएस होती है। पीसीएस-2017 की प्रारंभिक परीक्षा पिछले साल 24 सितंबर को प्रदेश के 21 जिलों में आयोजित की गई थी। कुल 677 पदों के लिए परीक्षा में दो लाख 46 हजार 654 अभ्यर्थी शामिल हुए थे। परीक्षा के बाद आयोग ने 17 नंवबर को उत्तरकुंजी जारी की थी।
आयोग ने सामान्य अध्ययन के दो पेपरों में कुल छह गलत सवाल डिलीट किए थे। उत्तरकुंजी पर 24 नवंबर तक आपत्तियां मांगी गई थीं। आपत्तियां आने के बाद आयोग ने 19 जनवरी को परिणाम के साथ संशोधित एवं अंतिम उत्तरकुंजी जारी की। संशोधित उत्तरकुंजी में भी आयोग ने छह सवाल डिलीट किए। इस तरह कुल दस सवाल हटाए गए।
हालांकि इसके बाद भी विवाद नहीं थमा। प्रतियोगियों ने कई दूसरे सवालों पर भी आपत्ति की थी। प्रतियोगी हाईकोर्ट चले गए और वहां से उन्हें राहत मिल गई थी। हाईकोर्ट के आदेश पर परीक्षा परिणाम संशोधित किया जाना है और जब तक यह काम नहीं होता, तब तक पीसीएसी मुख्य परीक्षा-2017 के आयोजन पर संकट मंडराता रहेगा।