फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

UP: यूपी के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म लागू करने की तैयारी, राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने दिए निर्दे

Thu, 21 May 2026 03:47 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

UP: उत्तर प्रदेश की राज्यपाल आनंदीबेन पटेल ने सभी विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में यूनिफॉर्म अनिवार्य करने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने शिक्षकों की जवाबदेही, छात्राओं की सुरक्षा, कौशल आधारित शिक्षा, शोध संस्कृति और बुनियादी सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर दिया।
 
विज्ञापन
राज्यपाल आनंदीबेन पटेल - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

विस्तार
वॉट्सऐप चैनल फॉलो करें

UP: आनंदीबेन पटेल ने प्रदेश के सभी विश्वविद्यालयों और महाविद्यालयों में यूनिफॉर्म लागू करने के निर्देश दिए हैं। उत्तर प्रदेश की राज्यपाल और सभी राज्य विश्वविद्यालयों की कुलाधिपति होने के नाते उन्होंने यह बात जन भवन में आयोजित एक बैठक के दौरान कही। हालांकि, इस संबंध में अभी तक कोई आधिकारिक आदेश जारी नहीं किया गया है।

विज्ञापन


बैठक में राज्यपाल ने शिक्षकों की जिम्मेदारियों पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि शिक्षक ऐसा कोई काम न करें जिससे उनके पेशे की गरिमा और सम्मान को ठेस पहुंचे। उन्होंने शिक्षकों को समय पर कक्षाएं लेने और छात्रों की नियमित उपस्थिति सुनिश्चित करने के निर्देश भी दिए। राज्यपाल ने कहा कि शिक्षा केवल किताबों तक सीमित नहीं होनी चाहिए, बल्कि छात्रों के संपूर्ण विकास पर भी ध्यान देना जरूरी है।

छात्राओं के लिए कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने पर जोर 

आनंदीबेन पटेल ने महिला छात्रावासों की व्यवस्था बेहतर बनाने और छात्राओं को गलत सामाजिक प्रभावों से दूर रखने की बात कही। उन्होंने छात्राओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए कॉलेजों और विश्वविद्यालयों में रोजगार से जुड़े कौशल आधारित पाठ्यक्रम शुरू करने का सुझाव दिया।

उन्होंने कहा कि ब्यूटीशियन प्रशिक्षण, मेहंदी कला, जीएसटी, बिंदी निर्माण, लेखांकन और बाजरे से खाद्य पदार्थ तैयार करने जैसे कोर्स छात्राओं के लिए उपयोगी साबित हो सकते हैं। इससे उन्हें रोजगार के बेहतर अवसर मिलेंगे और वे आर्थिक रूप से मजबूत बन सकेंगी।

जैविक खेती और नई शिक्षा नीति पर दिया जोर

राज्यपाल ने छात्रों को जैविक खेती अपनाने के लिए भी प्रेरित किया। उन्होंने कहा कि छात्र अपनी जमीन पर जैविक खेती करके अतिरिक्त आय अर्जित कर सकते हैं। इसके साथ ही उन्होंने राष्ट्रीय शिक्षा नीति को प्रभावी ढंग से लागू करने की आवश्यकता बताई।

उन्होंने शिक्षण संस्थानों से कहा कि छात्रों को विषय चुनने की स्वतंत्रता दी जाए और बहुविषयक शिक्षा को बढ़ावा दिया जाए। राज्यपाल का कहना था कि छात्रों को पढ़ाई के साथ योग, चित्रकला और अन्य उपयोगी कौशलों की जानकारी भी मिलनी चाहिए ताकि उनकी रोजगार क्षमता बढ़ सके।

शिक्षकों की कमी दूर करने और ऑनलाइन पढ़ाई पर जोर

आनंदीबेन पटेल ने शिक्षकों की कमी वाले कॉलेजों में ऑनलाइन पढ़ाई की व्यवस्था लागू करने की बात कही। उन्होंने अन्य संस्थानों से सहयोग लेकर पढ़ाई जारी रखने का सुझाव भी दिया। साथ ही रिक्त पदों को जल्द भरने और शिक्षकों के लिए नियमित प्रशिक्षण कार्यक्रम चलाने के निर्देश दिए।

स्वच्छ पेयजल और बुनियादी सुविधाओं में सुधार की बात

राज्यपाल ने आंगनवाड़ी केंद्रों, प्राथमिक विद्यालयों, स्वास्थ्य केंद्रों और कॉलेजों में स्वच्छ पेयजल की सुविधा तुरंत उपलब्ध कराने के निर्देश दिए। उन्होंने गुजरात की तर्ज पर सार्वजनिक-निजी भागीदारी मॉडल अपनाकर बुनियादी ढांचे को मजबूत करने का सुझाव दिया।

दुर्लभ पुस्तकों के डिजिटलीकरण पर भी फोकस

उन्होंने बताया कि ज्ञान भारतम अभियान के तहत पांडुलिपियों, भोजपत्रों और दुर्लभ पुस्तकों को डिजिटल रूप में सुरक्षित करने का काम किया जा रहा है। इस कार्य के लिए संपूर्णानंद संस्कृत विश्वविद्यालय को नोडल संस्था बनाया गया है।

सभी कॉलेजों को इन्फ्लिबनेट और “वन नेशन, वन सब्सक्रिप्शन” योजना का अधिक उपयोग करने के निर्देश दिए गए हैं ताकि छात्रों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर की किताबों, शोध पत्रों और शैक्षणिक सामग्री तक बेहतर पहुंच मिल सके।
विज्ञापन

शोध और नवाचार को बढ़ावा देने की पहल

राज्यपाल ने “यूपी सर्टिफिकेशन” पहल के तहत कॉलेजों से गुणवत्ता सुधार, बुनियादी सुविधाओं और शैक्षणिक व्यवस्था को बेहतर बनाने के लिए विस्तृत परियोजना रिपोर्ट सरकार को भेजने को कहा।

इसके अलावा ग्रामीण क्षेत्रों में वैज्ञानिक सोच और तकनीकी जागरूकता बढ़ाने के लिए “विलेज साइंटिस्ट प्रोग्राम” लागू करने का भी सुझाव दिया गया। बैठक के अंत में राज्यपाल ने सभी शिक्षकों को हर साल कम से कम दो पुस्तक अध्याय या शोध पत्र प्रकाशित करने के निर्देश दिए, ताकि उच्च शिक्षा संस्थानों में शोध और अकादमिक लेखन की संस्कृति को मजबूत किया जा सके।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें