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यूपी: बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस आयुष इंटर्न का भत्ता दोगुना, अब हर महीने मिलेंगे 15 हजार रुपये

Sat, 10 Oct 2026 08:53 AM IST
शिवम तिवारी एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी संस्थानों में बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस की पढ़ाई करने वाले विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाकर 15,000 रुपये प्रतिमाह कर दिया है। पहले यह राशि 7,500 रुपये थी। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में यह फैसला लिया गया। इससे राज्य के 1,714 आयुष इंटर्न और विद्यार्थियों को लाभ मिलने की उम्मीद है।
 
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UP Government - फोटो : AI Generated
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विस्तार
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उत्तर प्रदेश सरकार ने सरकारी आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा संस्थानों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाने का फैसला किया है। अब बीएएमएस, बीएचएमएस और बीयूएमएस के पात्र इंटर्न को 7,500 रुपये के बजाय 15,000 रुपये प्रतिमाह मिलेंगे। यानी भत्ते की राशि दोगुनी कर दी गई है। यह फैसला मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की अध्यक्षता में हुई मंत्रिमंडल बैठक में लिया गया। सरकार के इस कदम से उन विद्यार्थियों को आर्थिक राहत मिलेगी, जो अपनी अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान अस्पतालों और चिकित्सा संस्थानों में व्यावहारिक प्रशिक्षण लेते हैं। इससे उनकी पढ़ाई के साथ प्रशिक्षण की अवधि में होने वाले खर्च को पूरा करने में भी मदद मिलेगी।

किन विद्यार्थियों को मिलेगा लाभ?

इस फैसले से उत्तर प्रदेश के सरकारी आयुष चिकित्सा संस्थानों के कुल 1,714 इंटर्न लाभान्वित होंगे। इनमें आयुर्वेद के 588, यूनानी चिकित्सा के 150 और होम्योपैथी के 976 इंटर्न शामिल हैं। ये विद्यार्थी संबंधित पाठ्यक्रमों की परीक्षा उत्तीर्ण करने के बाद अनिवार्य घूर्णन इंटर्नशिप करेंगे। बीएएमएस आयुर्वेद, बीयूएमएस यूनानी और बीएचएमएस होम्योपैथी चिकित्सा से जुड़े पाठ्यक्रम हैं। इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों को अपने विषय से संबंधित व्यावहारिक अनुभव मिलता है। हालांकि, भत्ते का लाभ लेने के लिए विद्यार्थियों को संबंधित संस्थान और सरकार की ओर से निर्धारित पात्रता तथा इंटर्नशिप संबंधी नियमों का पालन करना होगा।

इंटर्नशिप में क्या काम करना होगा?

अनिवार्य इंटर्नशिप के दौरान विद्यार्थियों को सरकारी आयुर्वेद, यूनानी और होम्योपैथी चिकित्सा महाविद्यालयों तथा अस्पतालों में चिकित्सा पेशेवरों के साथ काम करने का अवसर मिलेगा। वे मरीजों की देखभाल और उपचार से जुड़ी गतिविधियों में सहयोग करेंगे। इसके अलावा अस्पताल के वार्ड, बाह्य रोगी विभाग और रात की पाली में भी उनकी ड्यूटी लग सकती है। इस प्रशिक्षण का उद्देश्य विद्यार्थियों को किताबी ज्ञान के साथ वास्तविक चिकित्सा व्यवस्था का अनुभव देना है। इंटर्नशिप के माध्यम से वे मरीजों से संवाद, अस्पताल के कामकाज और उपचार संबंधी प्रक्रियाओं को समझ सकेंगे। बढ़ा हुआ भत्ता इस प्रशिक्षण अवधि में उनके लिए आर्थिक सहायता का काम करेगा।

उत्तर प्रदेश में चिकित्सा शिक्षा कैसे बढ़ी?

मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने राज्य में स्वास्थ्य सेवाओं और चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का भी उल्लेख किया है। उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वर्ष 2017 में उत्तर प्रदेश में 36 चिकित्सा महाविद्यालय थे, जिनकी संख्या बढ़कर 85 हो गई है। इसी अवधि में एमबीबीएस की सीटें 4,690 से बढ़कर 13,600 से अधिक हो गई हैं। चिकित्सा संस्थानों की संख्या बढ़ने से विद्यार्थियों के लिए पढ़ाई के अवसर बढ़े हैं। साथ ही लोगों को अपने आसपास चिकित्सा सुविधाएं उपलब्ध कराने की दिशा में भी काम हुआ है। सरकार चिकित्सा शिक्षा के विस्तार को स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने के प्रयासों का महत्वपूर्ण हिस्सा मानती है।

आयुष्मान योजना से कितने लोगों को राहत?

मुख्यमंत्री के अनुसार, आयुष्मान भारत प्रधानमंत्री जन आरोग्य योजना और मुख्यमंत्री जन आरोग्य अभियान के तहत राज्य के 10 करोड़ से अधिक निवासियों को स्वास्थ्य सुरक्षा का लाभ मिल रहा है। इन योजनाओं का उद्देश्य पात्र परिवारों को गंभीर बीमारियों के इलाज के भारी खर्च से राहत देना है। चिकित्सा महाविद्यालयों की संख्या बढ़ाने, एमबीबीएस सीटों का विस्तार करने और आयुष विद्यार्थियों का इंटर्नशिप भत्ता बढ़ाने जैसे कदम स्वास्थ्य क्षेत्र को मजबूत करने के व्यापक प्रयासों से जुड़े हैं। हालांकि, योजनाओं का वास्तविक लाभ पात्रता और लागू नियमों के अनुसार मिलता है। विद्यार्थियों को भत्ते से संबंधित विस्तृत जानकारी के लिए अपने संस्थान या संबंधित सरकारी आदेश को देखना चाहिए।
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