UP Board Results 2020: सूक्ष्म जीवों के अध्ययन की उपयोगिता ने आज शोधकर्ताओं का ध्यान अपनी ओर आकर्षित किया है क्योंकि स्वास्थ्य से जुड़ी विभिन्न समस्यों का सूत्रपात इन्हीं सूक्ष्म जीवों के कारण होता है। इनके प्रभाव, इनसे होने वाले नुकसान और कैसे हम इनसे सफलतापूर्वक मुकाबला करें, इसके लिए बाकायदा शोध किए जा रहे हैं। माइक्रोबायोलॉजी के विशेषज्ञों की बदौलत
हाल-फिलहाल में कर्ई संक्रामक बीमारियों, जैसे जीका वायरस, एचआईवी और स्वाइन फ्लू आदि की पहचान से लेकर उपचार तक में कारगर कदम उठाए जा सके हैं। बीते कुछ वर्षों में माइक्रोबायोलॉजी के अध्ययन में ग्रामीण क्षेत्र के युवाओं की रुचि बढ़ी है। स्थानीय स्तर पर इस क्षेत्र के लोगों को पर्याप्त अवसर मिल रहे हैं।
गौरतलब है माइक्रोबायोलॉजी के अंतर्गत सूक्ष्म जीवों जैसे प्रोटोजोआ, एल्गी, बैक्टीरिया व वायरस का गहराई से अध्ययन किया जाता है। इस विषय के जानकार लोग इस जीवाणुओं के जीव-जगत पर अच्छे व बुरे प्रभावों को जानने की कोशिश करते हैं।
शुरूआती तैयारियां: इस क्षेत्र में कदम रखने के लिए युवाओं को माइक्रोबायोलॉजी विषय से बैचलर होना जरूरी है। इसके बैचलर स्तर के विशिष्ट पाठ्यक्रमों में बायोलॉजी विषय से 12वीं पास करने वाले छात्रों को प्रवेश दिया जाता है। इस क्षेत्र से संबंधित करीब दर्जन भर मास्टर्स स्तर के पाठ्यक्रमों में माइक्रोबायोलॉजी या लाइफ साइंस में स्नातक करने के बाद प्रवेश लिया जा सकता है। कई छात्र माइक्रोबायोलॉजी में मास्टर करने के बाद शोध की ओर कदम बढ़ाते हैं।
रोजगार के अवसर:
- दुनियाभर में नई-नई बीमारियों के सामने आने से आज माइक्रोबायोलॉजी की जरूरत कई उद्योगों में पड़ रही है। ये अवसर सरकारी व निजी, दोनों क्षेत्रों में रहे हैं। इस क्षेत्र के जानकार दवा कंपानियों, वाटर प्रोसेसिंग प्लांट्स, चमड़ा व कागज उद्योग, फूड प्रोसेसिंग, फूड बेवरेज, रिसर्च एवं डेवलपमेंट सेक्टर, बायोटेक व बायो प्रोसेस संबंधी उद्योग, प्रयोगशालाओं, अस्पतालों, होटल, जनस्वास्थ्य के काम में लगे गैर-सरकारी संगठनों के साथ ही अनुसंधान एवं अध्यापन के क्षेत्र में भी जा सकते है।