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UP Board: यूपी बोर्ड का नया नोटिस, 12वीं के छूटे प्रैक्टिकल अंक अपलोड का दिया आखिरी मौका, इस दिन खुलेगी विंडो

Fri, 03 Apr 2026 04:04 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

UP Board Practical Exam: यूपी बोर्ड ने 12वीं प्रैक्टिकल के छूटे अंक अपलोड करने के लिए 6-7 अप्रैल को विशेष विंडो खोली है। 652 केंद्रों के 34,637 छात्रों के परिणाम प्रभावित हुए हैं। समय पर अंक अपलोड न होने पर छात्रों को फेल घोषित किया जा सकता है। 
 
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यूपी बोर्ड (UPMSP UP Board) - फोटो : आधिकारिक एक्स हैंडल यूपी बोर्ड (@upboardpryj)
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विस्तार
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UPMSP UP Board Practical Exam: उत्तर प्रदेश माध्यमिक शिक्षा परिषद (UPMSP) ने कक्षा 12 (इंटरमीडिएट) प्रैक्टिकल परीक्षा के लंबित अंक अपलोड करने के लिए 6 और 7 अप्रैल 2026 को दो दिन की विशेष विंडो खोलने की घोषणा की है। आंतरिक अंकों के अपलोड में लापरवाही के कारण हजारों छात्रों के परिणाम प्रभावित हुए हैं।

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34 हजार से ज्यादा छात्रों के परिणाम प्रभावित

बोर्ड के सचिव भगवती सिंह के अनुसार, राज्य के 652 प्रैक्टिकल परीक्षा केंद्रों पर अंक अपलोड अधूरे रहने से करीब 34,637 छात्रों के परिणाम प्रभावित हुए हैं।

परीक्षा हुई, लेकिन अंक अपलोड नहीं हुए

इंटरमीडिएट प्रैक्टिकल परीक्षाएं 24 जनवरी से 1 फरवरी और 2 फरवरी से 9 फरवरी 2026 के बीच दो चरणों में आयोजित की गई थीं। बाद में कुछ स्कूलों के लिए 13 फरवरी तक समय बढ़ाया गया था।

हालांकि, समीक्षा में पाया गया कि बाह्य परीक्षकों ने अपने अंक अपलोड कर दिए थे, लेकिन कई आंतरिक परीक्षकों ने स्कूल लॉगिन के माध्यम से अंक अपलोड नहीं किए, जिससे परिणाम प्रक्रिया अधूरी रह गई।


स्कूलों और परीक्षकों को अंतिम मौका

इस स्थिति को देखते हुए बोर्ड ने आधिकारिक वेबसाइट (upmsp.edu.in) को दो दिन के लिए फिर से सक्रिय करने का निर्णय लिया है। आंतरिक परीक्षकों को निर्देश दिया गया है कि वे होमपेज पर उपलब्ध लिंक के माध्यम से तय समय सीमा में लंबित अंक अपलोड करें।

समय सीमा चूकी तो छात्र होंगे फेल

बोर्ड ने सख्त चेतावनी दी है कि यदि इस अवधि में अंक अपलोड नहीं किए गए, तो संबंधित छात्रों को अनुत्तीर्ण घोषित किया जाएगा।
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अधिकारियों पर तय होगी जिम्मेदारी

बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि यदि निर्देशों का पालन नहीं किया गया, तो इसकी पूरी जिम्मेदारी संबंधित आंतरिक परीक्षक, स्कूल प्रधानाचार्य और जिला विद्यालय निरीक्षक (DIOS) की होगी।

बोर्ड का यह कदम छात्रों के हितों की रक्षा करने और प्रशासनिक लापरवाही के कारण किसी भी छात्र को नुकसान से बचाने के उद्देश्य से उठाया गया है।
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