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UP Board Result 2020: इंजीनियरिंग की नई शाखा बायोमेडिकल, 12वीं के बाद इन कोर्स में ले सकते हैं दाखिला

Wed, 24 Jun 2020 04:56 PM IST
Jaya Tripathi एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला
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Uttar Pradesh (UP) Board Results 2020: चिकित्सा क्षेत्र में तेजी से मशीनों का इस्तेमाल किया जा रहा है। इन मशीनों की आवश्यकता इसी बता से पता चलती है कि यह मशीनें व नए नए उपकरण मरीजों के इलाज से लेकर शोध कार्यों को सपंन्न करने में सहायक होती है। ऐसे में कठिन परिस्थितियों को संभालने में न सिर्फ विशेषज्ञों को आसानी होती है, बल्कि समय की बचत भी होती है। हालांकि इन उपकरणों को संचालित करने से पहले उनकी अच्छी तरह से जांच करना, मानव शरीर के क्रियाकलापों और इन उपकरणों का प्रभाव समझाना आसान काम नहीं है। ऐसे में इंजीनियरिंग की एक अलग शाखा इन चीजों पर ध्यान केंद्रित करती है। इस शाखा को ही 'बायोमेडिकल इंजीनियरिंग' (बीएमई) कहते हैं। इससे संबंधित कार्यों को अंजाम देने वाले प्रोफेशनल्स को ही बायोमेडिकल इंजीनियरिंग कहते हैं। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग का क्षेत्र उन लोगों के लिए है, जो मेडिसिन एवं हेल्थकेयर में रुचि रखते हैं।

जानें क्या है बायोमेडिकल इंजीनियरिंग:

  • तकनीकी भाषा में कहें तो बायोमेडिकल इंजीनियरिंग, इंजीनियरिंग की एक ऐसी शाखा है, जिसमें मेडिकल एप्लिकेशंस विभिन्न इलाजों या डायग्नोस्टिक टेक्नोलॉजी के विकास और रिसर्च के लिए इंजीनियरिंग सिद्धातों की मदद ली जाती है। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग का कार्य मेडिकल संबंधी उपकरणों की देखभाल करना होता है।

कई शाखाओं में बना सकते हैं पहचान:

  • बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में कई सब-कैटेगरी होती हैं, जिनमें से किसी एक में विशेषज्ञता प्राप्त कर सकते हैं। इनमें बायोइंस्ट्रूमेंटेशन, बायोमटीरियल्स, सेल्यूलर, टिशू एंड जेनेटिक इंजीनियरिंग, क्लीनिकल इंजीनियरिंग, मेडिकल इमेजिंग, ऑर्थोपेडिक बायोइंजीनियरिंग, रिहैबिलिटेशन इंजीनियरिंग आदि शामिल हैं।

कैसा होता है कार्य:

  • बायोमेडिकल इंजीनियरिंग को मेडिकल डिवाइस पर रिसर्च करने, टेस्टिंग और मूल्यांकन संबंधी कार्य करना होता है। अस्पताओं और मेडिकल सेंटर्स के लिए नए बायोमेडिकल सामानों की खरीदारी भी करनी पडती है। बायोमेडिकल इंजीनियर्स मेडिकल डिवाइसेज, स्पोर्ट्स मेडिसिन, स्टेम सेल रिसर्च, बायोमार्कर्स, जीनोमिक्स, नैनोटेक्नोलॉजी आदि क्षेत्रों में विशेषज्ञता प्राप्त करके कार्य कर सकते हैं। बायोमेडिकल इंजीनियरिंग संबंधी प्रोजेक्ट्स में कृत्रिम अंग और प्रोस्थेटिक लिंब्स, कंप्यूटर की सहायता से होने वाली मेडिकल संबंधी क्रियाएं और इलाज, सूचना विज्ञान और मेडिकल इमेजिंग शामिल होते हैं। 

 

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शैक्षणिक योग्यता:

  • इससे संबंधित कोर्स करने के लिए छात्र को साइंस स्ट्रीम में 12वीं होना जरूरी है। बायोमेडिकल इंजीनियर्स को इंजीयरिंग, भौतिकी, रसायन या जीव विज्ञान में स्नातक की डिग्री चाहिए होती है। ज्यादातर बायोमेडिकल इंजीनियरिंग संबंधी नौकरी के लिए बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में मास्टर डिग्री की आवश्यकता होती है। आजकल कुछ संस्थानों ने बायोमेडिकल इंजीनियरिंग में स्नातक स्तर का बीटेक पाठ्यक्रम भी शुरू किया है। इसमें क्लिनिकल संबंधी कोर्स भी करना पडता है। मेडिकल क्षेत्र में रिसर्च करना चाहते हैं, तो बायोमेडिकल में एमफिल या पीएचडी कर सकते हैं।

रोजगार की संभावनाएं:

  • इस क्षेत्र में रोजगार की कोई कमी नहीं है। बायोमेडिकल इंजीनियर अस्पताओं, नर्सिग होम्स, रिसर्च लैब्स, दवा बनाने वाली कंपनियों एवं हेल्थकेयर कंपनियों में रोजगार पा सकते हैं। विदेशों में भी बायोमेडिकल इंजीनियर्स की मांग की जाती है। इसके अलावा बायोमेडिकल इंजीनियर प्रोडक्ट टेस्टिंग, डिजाइनिंग, चिकित्सकीय उपकरणों के उपयोग व रखरखाव संबंधी कार्य आदि करते हैं।

प्रमुख संस्थान:

  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, बॉम्बे 
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, दिल्ली
  • इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी, रुड़की
  • एमिटी यूनिवर्सिटी, नोएडा
  • ऑल इंडिया इंस्टीट्यूट ऑफ मेडिकल साइंसेज, नई दिल्ली 
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