सात विद्यालय केंद्र और बाकी राज्यों द्वारा प्रायोजित होंगे
इन 57 नए केंद्रीय विद्यालयों में से सात केंद्रीय गृह मंत्रालय द्वारा और बाकी राज्य सरकारों द्वारा प्रायोजित होंगे। वैष्णव ने कैबिनेट के फैसलों पर एक मीडिया ब्रीफिंग में बताया कि वर्तमान में 1,288 केंद्रीय विद्यालय हैं।
5,862 रुपये होंगे खर्च
इन विद्यालयों की स्थापना पर 5,862.55 करोड़ रुपये खर्च होंगे। यह राशि वर्ष 2026-27 से अगले नौ वर्षों में खर्च की जाएगी। इसमें 2,585.52 करोड़ रुपये पूंजीगत व्यय और 3,277.03 करोड़ रुपये संचालन व्यय शामिल हैं।
कहां खुलेंगे नए केवी
- 7 विद्यालय गृह मंत्रालय द्वारा प्रायोजित होंगे, जबकि 50 राज्य सरकारों व केंद्रशासित प्रदेशों द्वारा।
- 20 विद्यालय ऐसे जिलों में खुलेंगे, जहां अभी तक कोई केवी नहीं है जबकि वहां बड़ी संख्या में केंद्र सरकार के कर्मचारी रहते हैं।
- 14 विद्यालय आकांक्षी जिलों में, 4 विद्यालय वामपंथी उग्रवाद (LWE) प्रभावित जिलों में, और 5 विद्यालय पूर्वोत्तर व पहाड़ी क्षेत्रों में खोले जाएंगे।
नई स्वीकृत केवी को राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के तहत आदर्श विद्यालय के रूप में विकसित किया जाएगा। पहली बार इनमें बालवाटिका (पूर्व-प्राथमिक स्तर के तीन वर्ष) की भी व्यवस्था होगी।
4,617 स्थाई नौकरियां भी सृजित की जाएंगी
एक पूर्ण केवी चलाने के लिए औसतन 81 पदों की आवश्यकता होती है। इस हिसाब से 57 नए विद्यालयों से 4,617 स्थायी नौकरियां सृजित होंगी। निर्माण और अन्य गतिविधियों से हजारों अस्थायी रोजगार भी मिलेंगे।
वर्तमान में देशभर में 1,288 केंद्रीय विद्यालय कार्यरत हैं, जिनमें तीन विदेशों (मॉस्को, काठमांडू और तेहरान) में हैं। इन विद्यालयों में कुल 13.62 लाख छात्र पढ़ रहे हैं।
सरकार का कहना है कि नए केवी का प्रस्ताव उन इलाकों को प्राथमिकता देता है जहां अब तक कोई विद्यालय नहीं था। साथ ही, पूर्वी भारत, उत्तर, दक्षिण और पश्चिम के बीच संतुलन साधते हुए समावेशिता और राष्ट्रीय एकता को