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Union Budget 2026: बजट में अक्सर सुनाई देते हैं ये भारी-भरकम शब्द, जानिए आसान भाषा में मतलब

Fri, 30 Jan 2026 04:46 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Union Budget 2026: बजट में अक्सर कई ऐसे जटिल वित्तीय शब्द सुनने को मिलते हैं जिन्हें समझना आम लोगों के लिए मुश्किल होता है। हमने इन्हें आसान भाषा में समझाया है, ताकि आप बजट की घोषणाओं को आसानी से समझ सकें।
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केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण - फोटो : एक्स/निर्मला सीतारमण
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विस्तार
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Union Budget: देश की संसद में 1 फरवरी को सुबह 11 बजे वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण वित्तीय वर्ष 2026-27 का केंद्रीय बजट पेश करेंगी। बजट भाषण के दौरान सरकार की आय-व्यय योजनाओं, कर प्रस्तावों और आर्थिक नीतियों से जुड़े कई जरूरी फैसलों का एलान किया जाएगा। इसी दौरान कई ऐसे जटिल वित्तीय शब्द भी सुनने को मिलते हैं, जिन्हें समझना आम लोगों के लिए आसान नहीं होता। बजट को बेहतर तरीके से समझने में आपकी मदद के लिए हम उन प्रमुख शब्दों और उनके सरल अर्थों को आसान भाषा में समझा रहे हैं।

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समझिए इन कठिन के शब्दों के अर्थ

  • केंद्रीय बजट (Union Budget): केंद्रीय बजट सरकार का साल भर का हिसाब-किताब होता है। इसमें सरकार बताती है कि वह कितना पैसा कमाएगी और कहां-कहां खर्च करेगी। इसे हर साल 1 फरवरी को संसद में पेश किया जाता है।
  • राजस्व (Revenue): राजस्व वह पैसा है जो सरकार को टैक्स, शुल्क और अन्य स्रोतों से मिलता है। जैसे- इनकम टैक्स, जीएसटी, सीमा शुल्क आदि। इसी पैसे से सरकार देश के काम चलाती है।
  • पूंजीगत व्यय (Capital Expenditure): पूंजीगत व्यय वह खर्च होता है जो लंबे समय तक फायदा देने वाली चीजों पर किया जाता है। जैसे- सड़कें बनाना, रेलवे लाइन, अस्पताल, स्कूल या बड़े प्रोजेक्ट्स। इसे भविष्य का निवेश माना जाता है।
  • राजस्व व्यय (Revenue Expenditure): राजस्व व्यय वे खर्च होते हैं जो रोजमर्रा के कामों में होते हैं। जैसे- सरकारी कर्मचारियों का वेतन, पेंशन, सब्सिडी और बिजली-पानी का खर्च। इससे तुरंत सुविधा मिलती है, लेकिन स्थायी संपत्ति नहीं बनती।
  • सब्सिडी (Subsidy): सब्सिडी सरकार की तरफ से दी जाने वाली आर्थिक मदद होती है, ताकि आम लोगों को जरूरी चीजें सस्ते दाम पर मिल सकें। जैसे- खाने का अनाज, गैस सिलेंडर या खाद पर दी जाने वाली छूट।
  • सकल घरेलू उत्पाद (GDP): जीडीपी से पता चलता है कि देश की अर्थव्यवस्था कितनी मजबूत है। यह एक साल में देश के अंदर बनी सभी वस्तुओं और दी गई सेवाओं का कुल मूल्य होता है।
  • मुद्रास्फीति (Inflation): जब समय के साथ महंगाई बढ़ती है और वही चीजें पहले से ज्यादा महंगी हो जाती हैं, तो उसे मुद्रास्फीति कहते हैं। ज्यादा मुद्रास्फीति से आम आदमी पर बोझ बढ़ता है।
  • विनिवेश (Disinvestment): विनिवेश का मतलब है सरकार का अपनी सरकारी कंपनियों में हिस्सेदारी बेचना। इससे सरकार को पैसा मिलता है, जिसका उपयोग विकास योजनाओं और घाटा कम करने में किया जाता है।
  • सीमा शुल्क (Custom Duty): सीमा शुल्क वह टैक्स है जो विदेश से आने वाले सामान पर लगाया जाता है। इससे सरकार की कमाई बढ़ती है और देश के अपने उद्योगों को फायदा मिलता है।
  • मौद्रिक नीति (Monetary Policy): मौद्रिक नीति आरबीआई बनाता है। इसके जरिए ब्याज दर और महंगाई को काबू में रखा जाता है। जब लोन महंगा या सस्ता होता है, तो उसके पीछे मौद्रिक नीति होती है।
  • राजकोषीय नीति (Fiscal Policy): राजकोषीय नीति सरकार बनाती है। इसमें यह तय होता है कि कितना टैक्स लिया जाएगा और कितना खर्च किया जाएगा। बजट इसी नीति का हिस्सा होता है।
  • हलवा सेरेमनी (Halwa Ceremony): बजट से पहले वित्त मंत्रालय में हलवा बनाया जाता है। इसे बजट की तैयारी शुरू होने का संकेत माना जाता है। इसके बाद बजट से जुड़ी जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
  • ब्लू शीट (Blue Sheet): ब्लू शीट बजट का बहुत ही गुप्त कागज होता है। इसमें बजट से जुड़े जरूरी आंकड़े होते हैं। इसे बजट पेश होने से पहले सिर्फ गिने-चुने लोग ही देखते हैं।
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