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UGC Bill Row: यूजीसी कानून विवाद पर शिक्षा मंत्री की पहली प्रतिक्रिया; कहा- किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं होगा

Tue, 27 Jan 2026 05:29 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

UGC: देशभर में UGC के नए नियमों को लेकर विवाद बढ़ रहा है। स्वर्ण समाज से जुड़े संगठन इसका विरोध कर रहे हैं, जबकि सरकार ने आश्वासन दिया है कि नियम सभी के लिए निष्पक्ष होंगे और जल्द ही भ्रम दूर करने के लिए स्पष्टीकरण जारी किया जाएगा।
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UGC - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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UGC: यूजीसी 2026 के नए नियमों को लेकर देशभर में असंतोष बढ़ता जा रहा है। इस मामले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने पहली बार प्रतिक्रिया दी है। उन्होंने सभी छात्रों और शिक्षाविदों को भरोसा दिलाया कि नियम लागू करने में निष्पक्षता बरती जाएगी और किसी के साथ कोई भेदभाव नहीं किया जाएगा। मंत्री ने यह भी कहा कि कानून का कोई भी दुरुपयोग नहीं होने दिया जाएगा।

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केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने यूजीसी 2026 के नए नियमों को लेकर जताई जा रही चिंताओं को दूर करते हुए कहा, 'मैं सभी को आश्वस्त करता हूं कि कोई भेदभाव नहीं होगा और कोई भी इस कानून का दुरुपयोग नहीं कर सकेगा।'

मंत्री ने इस बात पर जोर दिया कि इन नियमों का उद्देश्य उच्च शिक्षा में निष्पक्षता और समानता को बढ़ावा देना है और उन्होंने शिक्षण संस्थानों से इन्हें जिम्मेदारी से लागू करने का आग्रह किया। उनकी यह टिप्पणी देश भर में नए नियमों को लेकर चल रहे विरोध प्रदर्शनों और बहसों के बीच आई है, जिसमें समर्थक और विरोधी दोनों ही अपनी-अपनी राय व्यक्त कर रहे हैं।
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क्या है UGC नया नियम?

विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) देश में उच्च शिक्षा की गुणवत्ता, समान अवसर और नियमन से जुड़ी शीर्ष संस्था है। 15 जनवरी 2026 से इसने देशभर के विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में ‘उच्च शिक्षण संस्थानों में समानता को बढ़ावा देने के नियम, 2026’ लागू कर दिए हैं। इस नियम का मकसद कैंपस में जातिगत भेदभाव रोकना और सभी वर्गों के लिए समान, सुरक्षित और सम्मानजनक शैक्षणिक माहौल सुनिश्चित करना है।

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देश के कई हिस्सों में हो रहा है विरोध

देश के कई हिस्सों में UGC 2026 के नए नियमों के खिलाफ विरोध प्रदर्शन हो रहे हैं। नई दिल्ली, मेरठ, हापुड़, सहारनपुर, अलवर, मधुबनी और अन्य शहरों में छात्रों, शिक्षकों और सामाजिक संगठनों ने विरोध जताया। समर्थकों का कहना है कि नियमों को सही तरीके से लागू किया जाए तो यह समानता को मजबूत कर सकते हैं। दिल्ली में UGC कार्यालय के बाहर भी बड़ी संख्या में प्रदर्शनकारी जमा हुए।

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हर संस्थान के लिए अनिवार्य कदम

UGC के नए नियमों के तहत अब हर कॉलेज और विश्वविद्यालय में SC, ST और OBC छात्रों के लिए समान अवसर प्रकोष्ठ स्थापित करना जरूरी होगा। इसके साथ ही, संस्थान स्तर पर Equality Committee भी गठित करनी होगी, जिसमें महिला, SC, ST, OBC और दिव्यांग छात्रों के प्रतिनिधि शामिल होंगे। यह समिति छह महीने में एक रिपोर्ट तैयार कर UGC को सौंपेगी। आयोग का मानना है कि इससे शिकायतों की निगरानी बेहतर होगी और संस्थानों में पारदर्शिता और जवाबदेही बढ़ेगी।
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