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UGC Draft: छह विपक्षी शासित राज्यों ने यूजीसी मसौदा नियमों को वापस लेने की मांग की; जानें क्या कहा

Wed, 05 Feb 2025 08:05 PM IST
शिवम गर्ग एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

UGC Draft:  कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्य उच्च शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन कर्नाटका के मंत्री एम सी सुधाकर द्वारा बेंगलुरु में आयोजित किया गया था। 
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UGC - फोटो : Amar Ujala Graphics
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विस्तार
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UGC Draft: कांग्रेस ने बुधवार (5 फरवरी) को केंद्र पर निशाना साधते हुए कहा कि विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) के ड्राफ्ट नियमों के लिए यह तर्क कि इन्हें राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) के अनुपालन के लिए अपडेट किया गया है, वह जांच में खरा नहीं उतरता और इन्हें तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।

छह विपक्षी शासित राज्य के प्रतिनिधियों ने पारित किया प्रस्ताव

कांग्रेस के महासचिव जयराम रमेश ने कहा कि राज्य उच्च शिक्षा मंत्रियों का सम्मेलन कर्नाटका के मंत्री एम सी सुधाकर द्वारा बेंगलुरु में आयोजित किया गया था। जिसमें कर्नाटका, तेलंगाना, केरल, तमिलनाडु, हिमाचल प्रदेश और झारखंड (सभी विपक्षी शासित राज्य) के छह मंत्रियों या उनके प्रतिनिधियों ने यूजीसी के "क्रूर" ड्राफ्ट नियमों, 2025 पर 15 बिंदुओं का प्रस्ताव पारित किया।
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कांग्रेस महासचिव रमेश ने आगे कहा, "संविधानिक संघवाद का सिद्धांत पवित्र है और उच्च शिक्षा की गुणवत्ता मंत्रालय की अंतिम प्राथमिकताओं में से एक होनी चाहिए। राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 किसी भी दृष्टिकोण से इससे ऊपर नहीं है, और यह तर्क कि नियमों को NEP 2020 के अनुपालन में अपडेट किया गया है, वह जांच में खरा नहीं उतरता।" उन्होंने कहा कि इन ड्राफ्ट नियमों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए।
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कर्नाटका में हुआ था छह राज्यों का सम्मेलन

यह सम्मेलन कर्नाटका राज्य सरकार के उच्च शिक्षा विभाग द्वारा आयोजित किया गया था, ताकि ड्राफ्ट "विश्वविद्यालयों और कॉलेजों में शिक्षकों और अकादमिक कर्मचारियों की नियुक्ति और पदोन्नति और उच्च शिक्षा के मानकों को बनाए रखने के उपायों, 2025" और "NEP 2020 के कार्यान्वयन के आधार पर उच्च शिक्षा संस्थानों का ग्रेडिंग" के विभिन्न प्रावधानों पर चर्चा की जा सके।

संयुक्त बयान में उन्होंने कहा कि राज्य सरकारों को राज्य सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में उपकुलपतियों की नियुक्ति में महत्वपूर्ण भूमिका दी जानी चाहिए। उनका कहना था कि ड्राफ्ट यूजीसी नियमों में राज्य सरकारों के लिए सार्वजनिक विश्वविद्यालयों के उपकुलपतियों की नियुक्ति में कोई भूमिका नहीं है, जो राज्य कानूनों के तहत स्थापित हैं, और यह संघीय ढांचे में राज्य के वैध अधिकारों का उल्लंघन है।

मंत्रियों ने कहा, "ये नियम राज्य के अधिकारों को गंभीर रूप से सीमित करते हैं, विशेष रूप से उपकुलपतियों की चयन-समिति गठन में।" उन्होंने यह भी कहा कि गैर-शैक्षिक व्यक्तियों को उपकुलपति नियुक्त करने का प्रावधान हटाया जाना चाहिए। उपकुलपतियों की नियुक्ति के लिए आवश्यक योग्यताएं, कार्यकाल और पात्रता पर पुनर्विचार की आवश्यकता है, क्योंकि ये उच्च शिक्षा के मानकों को प्रभावित करती हैं।

बयान में कहा गया, "अकादमिक प्रदर्शन सूचकांक (API) प्रणाली को हटाना और नई प्रणाली का परिचय देना अत्यधिक विवेकाधिकार की अनुमति देता है और इसे फिर से मूल्यांकन किया जाना चाहिए।" सहायक प्रोफेसरों की नियुक्ति से संबंधित कई प्रावधानों, जिनमें संबंधित मुख्य विषय में बुनियादी डिग्री की आवश्यकता न होना, पर गंभीर पुनर्विचार की आवश्यकता है।

संविदात्मक नियुक्तियों, अतिथि फैकल्टी, या विजिटिंग फैकल्टी, और प्रोफेसर ऑफ प्रैक्टिस एमेरिटस प्रोफेसर से संबंधित प्रावधानों पर अधिक स्पष्टता की आवश्यकता है, इसे अंतिम रूप देने से पहले इन प्रावधानों पर पुनर्विचार किया जाना चाहिए।

यूजीसी ड्राफ्ट पर गंभीर पुनर्विचार की आवश्यकता

ड्राफ्ट यूजीसी नियमों के उल्लंघन से संबंधित प्रावधान गंभीर, अत्यधिक और असंविधानिक हैं और इन पर गंभीर पुनर्विचार की आवश्यकता है। बयान में कहा गया कि "NEP के तहत सभी प्रस्तावों को अनिवार्य बनाना और अनुपालन न होने पर दंडात्मक उपाय करना वास्तव में तानाशाही है और यह संघीय ढांचे में राज्यों की स्वायत्तता की भावना के खिलाफ है," नियमों में उद्योग-अकादमी सहयोग पर अधिक जोर दिया जाना चाहिए, ताकि सार्वजनिक विश्वविद्यालयों में नवाचार और अनुसंधान का पारिस्थितिकी तंत्र बढ़ सके।

बयान में कहा गया कि ड्राफ्ट नियम और ग्रेडिंग पैरामीटर निजी संस्थानों को बढ़ावा देने के लिए डिज़ाइन किए गए हैं, जबकि सरकारी/सार्वजनिक संस्थानों की भलाई की अनदेखी की गई है। बुनियादी स्नातक पाठ्यक्रमों के लिए प्रवेश परीक्षा को अनिवार्य बनाना समावेशी शिक्षा और पदोन्नति के लिए एक बड़ा अवरोध है और द्विवार्षिक परीक्षाएं, अंतिम-ट्रैक डिग्री कार्यक्रम, ड्यूल डिग्री, और कई प्रवेश और निकासी पर कार्यान्वयन से पहले और अधिक विचार-विमर्श और स्पष्टता की आवश्यकता है। इस प्रकार, 2025 के ड्राफ्ट यूजीसी नियमों को तुरंत वापस लिया जाना चाहिए। इसके साथ ही यूजीसी को राज्यों के साथ सहयोगात्मक, परामर्शात्मक प्रक्रिया में भाग लेना चाहिए।
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