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यूजीसी भंग, नई संस्था एचईसी ही करेगी सभी विश्वविद्यालयों के नियम तय

Thu, 28 Jun 2018 05:22 AM IST
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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उच्च शिक्षण संस्थानों को मान्यता देने व नियम बनाने वाली संस्था विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) भंग हो रही है। केंद्र सरकार ने पहली बार यूजीसी को गठित करने वाले यूजीसी एक्ट 1956 को भंग करते हुए उसकी जगह हायर एजुकेशन कमीशन ऑफ इंडिया (एचईसीआई) एक्ट 2018 का मसौदा तैयार कर पब्लिक नोटिस के माध्यम से 7 जुलाई तक सुझाव मांगे हैं। एचईसी का काम सिर्फ गुणवत्ता, शोध, पढ़ाई समेत नियम बनाने पर फोकस करना होगा। 

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मानव संसाधन विकास मंत्रालय ने हायर एजुकेशन कमीशन को ही एकल नियामक संस्था बना दिया है जो केंद्रीय, निजी, डीम्ड-टू-वी यूनिवर्सिटी, निजी यूनिवर्सिटी के लिए सभी प्रकार के नियम तय करेगी। ये सभी काम अभी तक मंत्रालय करता था। एचईसीआई एक्ट 2018 लागू होने के बाद ऑनलाइन रेगुलेशन डिग्री, नैक रिफार्म, विश्वविद्यालयों व कॉलेजों को स्वायत्तता देना, ओपन डिस्टेंस लर्निंग रेगुलेशन आदि का सारा कामकाज मंत्रालय के बजाय  हायर एचईसी करेगा।

मंत्रालय सिर्फ वित्तीय कामकाज संभालेगा, जिसके तहत विश्वविद्यालयों व उच्च शिक्षण संस्थानों को अनुदान देना, स्कॉलरशिप राशि आदि का भुगतान करना भी शामिल रहेगा। देशभर के छात्र, अभिभावक, शिक्षाविद, शिक्षकों व आम जनता से मिले सुझावों के तहत ड्रॉफ्ट बिल में बदलाव होगा। उसके बाद इस बिल को कैबिनेट में रखा जाएगा। कैबिनेट में पास होने के बाद मानसून सत्र में संसद में पास होने के लिए भेज दिया जाएगा। 
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पहली बार जुर्माने संग जेल का प्रावधान 
उच्च शिक्षण संस्थानों की मनमानी रोकने के लिए पहली बार एचईसीआई एक्ट 2018 में जुर्माने संग सजा का प्रावधान किया गया है। ड्रॉफ्ट में एचईसी द्वारा गठित रेगुलेशन, नियम व सुझावों को यदि कोई संस्थान मानने से इनकार करता है, या नियमों का पालन नहीं करता है तो उक्त संस्थान की मान्यता रद्द होगी।

जिस कोर्स या डिग्री में संस्थान नियम का पालन नहीं करेंगे तो उस कोर्स या डिग्री को पढ़ाने की मंजूरी भी वापस ले ली जाएगी। ऐसे संस्थानों के प्रबंधन से जुड़े शीर्ष अधिकारी व मुख्य कार्यकारी अधिकारी पर जुर्माना लगाने का भी प्रावधान है। इसके अलावा दोषी पाए जाने पर इन अधिकारियों को सीपीसी के तहत तीन साल या उससे अधिक की सजा भी हो सकती है। 
 

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गुणवत्ता के दस बिंदुओं पर फोकस  
एचईसी का मुख्य काम गुणवत्ता, रिसर्च आदि पर फोकस करना रहेगा, जिसमें उच्च शिक्षा के विभिन्न कोर्स के लिए स्पेसिफाई लर्निंग ऑउटकम समेत टीचिंग, रिसर्च, पाठ्यक्रम व असेसमेंट के लिए नियम बनाना शामिल है। हर वर्ष अकादमिक परफॉर्मेंस का मूल्यांकन, रिसर्च को बढ़ावा, पढ़ाई के आधार पर संस्थानों को मूल्यांकन व मान्यता देना, नियमों के तहत मूलभूत सुविधाओं का आकलन भी करना होगा। इसके अलावा राज्य यदि नियमों का पालन नहीं करते हैं तो फिर मामला केंद्र सरकार के पास भेजा जाएगा। 

एचईसीआई के 12 सदस्यों का चयन केंद्र करेगा
एचईसी में चेयरपर्सन, वाइस  चेयरपर्सन समेत 12 अन्य सदस्य होंगे, जिन्हें केंद्र सरकार चयनित करेगी। इन पदों को भरने के लिए केंद्र सरकार अधिसूचना जारी करेगी। सरकार के पास उक्त अधिकारियों को हटाने का प्रावधान भी होगा।

चेयरपर्सन को कैबिनेट सचिव द्वारा गठित सर्च सलेक्शन कमेटी चयन करेगी। एचईसी अधिकारी का सेवाकाल खत्म होने से छह महीने पहले पद के लिए विज्ञापन जारी कर योग्य उम्मीदवार का चयन किया जाएगा। एचईसी ही कुलपति, उपकुलपति, प्रिंसिपल, डीन, एचओडी, शिक्षक व गैर शिक्षक कमियों की नियुक्ति के नियम बनाएगा। 
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