विश्विविद्यालय अनुदान आयोग (UGC - University Grants Commission) ने हाल ही में एक जरूरी सर्कुलर जारी की है। इसमें यूजीसी ने छात्रों को कई विश्वविद्यालयों द्वारा गलत डिग्रियां दिए जाने के संबंध में आगाह किया है। यूजीसी ने कहा है कि विश्वविद्यालयों की ऐसी गलती से उन छात्रों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है जिन्हें ये डिग्रियां दी जा रही हैं।
यूजीसी के यह सर्कुलर राष्ट्रीय उपभोक्ता विवाद निवारण आयोग (NCDRC -National Consumer Disputes Redressal Commission) द्वारा एक मामले में सुनाए गए फैसले के बाद आया है। इसमें आयोग ने 11 छात्रों को गलत डिग्री देने के लिए कर्नाटक के एक कॉलेज पर 1.12 लाख रुपये का जुर्माना लगाया। इन विद्यार्थियों ने एमएस (MS - Master of Science) कोर्स में दाखिला लिया था। लेकिन कॉलेज ने उन्हें एमएससी सॉफ्टवेयर टेक्नोलॉजी की डिग्री थमा दी। अब कॉलेज उन्हें उनकी फीस वापस करेगा।
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यूजीसी ने कहा है कि समय-समय पर हमेशा ये बताया जाता रहा है कि विश्वविद्यालय सिर्फ यूजीसी एक्ट (UGC Act) के सेक्शन 22 के तहत ही डिग्रियां दे। यूजीसी द्वारा अलग-अलग डिग्रियों के स्वीकृत नामों की पूरी सूची विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) की वेबसाइट पर उपलब्ध है।
हालांकि यूजीसी ने ये भी कहा है कि अगर कोई विश्वविद्यालय यूजीसी द्वारा बताए गए नाम से अलग डिग्री देना चाहती है, तो उसे कोर्स शुरू करने से छह महीने आयोग के अनुमति लेनी होगी। लेकिन विश्विवद्यालय को नए नाम से कोर्स चलाने के लिए विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (यूजीसी) को उचित कारण बताना होगा।
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