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केरल : कुलाधिपति पद पर विवाद के बीच यूडीएफ का बड़ा बयान, बोला- 14 कुलाधिपतियों की जरूरत नहीं

Tue, 13 Dec 2022 04:23 PM IST
देवेश शर्मा एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

केरल में विश्वविद्यालयों में चल रहे कुलाधिपति के पद संबंधी विवाद में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने मंगलवार को एक स्पष्टीकरण जारी किया है और विधानसभा में चर्चा के दौरान सरकार को सुझाव भी दिया है।
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केरल के राज्यपाल और मुख्यमंत्री (फाइल) - फोटो : पीटीआई
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केरल में विश्वविद्यालयों में चल रहे कुलाधिपति के पद संबंधी विवाद में कांग्रेस के नेतृत्व वाले विपक्षी गठबंधन संयुक्त लोकतांत्रिक मोर्चा (यूडीएफ) ने मंगलवार को एक स्पष्टीकरण जारी किया है और विधानसभा में चर्चा के दौरान सरकार को सुझाव भी दिया है। यूडीएफ ने मंगलवार को कहा कि वह राज्य सरकार द्वारा संचालित विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के तौर पर राज्यपाल को पद से हटाने का विरोध नहीं करता, लेकिन 14 विश्वविद्यालयों में अलग-अलग कुलाधिपतियों की आवश्यकता नहीं है। विधानसभा में विपक्ष के नेता वीडी सतीशन ने कहा कि यूडीएफ विचार-विमर्श के बाद इस फैसले पर पहुंचा है कि केवल एक कुलाधिपति होना चाहिए और इसका चयन उच्चतम न्यायालय के सेवानिवृत्त न्यायाधीशों और केरल उच्च न्यायालय के पूर्व मुख्य न्यायाधीशों में से किया जा सकता है।

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राज्यपाल से खींचतान के बीच, सतीशन ने कहा कि कुलाधिपति का चयन एक पैनल द्वारा किया जा सकता है जिसमें मुख्यमंत्री, विपक्ष के नेता और केरल उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश शामिल हों। उन्होंने कहा कि इस बात को लेकर हमारा वैकल्पिक प्रस्ताव है कि कुलाधिपति किसे बनाया जाए और इसके लिए क्या प्रक्रिया अपनाई जाए। सतीशन ने कहा कि 14 अलग-अलग कुलाधिपति रखने से सरकार पर वित्तीय भार पड़ेगा। यह फैसला सफेद हाथी पालने जैसा हो जाएगा।

वहीं, विधायक पीके कुन्हालीकुट्टी ने भी इसका समर्थन करते हुए पत्र में कहा कि इसमें कोई संदेह नहीं है कि राज्यपाल को कुलाधिपति के पद से हटाया जाना चाहिए। इंडियन यूनियन मुस्लिम लीग (IUML) के नेता कुन्हालीकुट्टी ने कहा कि हम राज्यपाल के हालिया आचरण या कार्यों का बिल्कुल समर्थन नहीं करते। विपक्ष ने सदन में विश्वविद्यालय कानून (संशोधन) विधेयक पर चर्चा के दौरान यह सुझाव पेश किया था। इस विधेयक का उद्देश्य राज्यपाल को राज्य के विश्वविद्यालयों के कुलाधिपति के पद से हटाना और शीर्ष पद पर प्रतिष्ठित शिक्षाविदों की नियुक्ति करना है।

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