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Tips: केवल लक्ष्य बना लेना ही काफी नहीं, अच्छी आदतें डालने और बुरी लतों को छोड़ने के लिए जरूरी है निरंतर अभ्यास

Thu, 14 Aug 2025 09:49 AM IST
शिवम गर्ग ईके बुआबंग, रिसर्च फेलो, ट्रिनिटी कॉलेज, डबलिन

सार

Habit Formation Tips: सिर्फ लक्ष्य बनाना ही काफी नहीं होता, उन्हें हासिल करने के लिए अच्छी आदतों को अपनाना और बुरी लतों को छोड़ना बेहद जरूरी है। जानें वैज्ञानिक नजरिए से आदतें बदलने की असरदार तकनीकें और जीवन में लाएं सकारात्मक बदलाव।
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Habit Formation Tips - फोटो : freepik.com
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विस्तार
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How to Change Habits: आप रोजाना अपने कुछ दैनिक लक्ष्य तो तय करते ही होंगे, जैसे कि सुबह उठकर कसरत करना, पौष्टिक भोजन करना या फिर सोशल मीडिया का कम से कम इस्तेमाल करना। बेशक आप कुछ दिनों तक इसका पालन भी करते हैं, लेकिन लंबे समय तक ऐसा करते रहना कभी-कभी एक कठिन चुनौती बन जाता है। असल में, सफलता की चाबी सिर्फ इच्छाशक्ति नहीं, बल्कि हमारी रोजमर्रा की आदतें भी हैं। जैसा कि महान दार्शनिक विलियम जेम्स ने भी कहा था कि हम मूलतः आदतों का संग्रह हैं। अच्छी आदतें हमें आगे बढ़ाती हैं, जबकि गलत आदतें हमारी क्षमता को कमजोर करती हैं। 

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ऐसे में, एक शोध से कुछ ऐसी रणनीतियों का पता चला है, जो सकारात्मक आदतें डालने और नकारात्मक आदतें छोड़ने में प्रभावी हो सकती हैं। खुद में अच्छी आदतों का विकास करने के लिए आपको अपने दैनिक कामों में इन्हें शामिल करने पर जोर देना चाहिए।

समय से ज्यादा जरूरी है निरंतरता

यह धारणा आम है कि अगर आप किसी काम को लगातार 21 दिन करते हैं, तो वह आपकी आदत बन जाती है, लेकिन विज्ञान कुछ और ही कहता है। इसके अनुसार, नई आदत बनाने का वक्त व्यक्ति और आदत के अनुसार अलग-अलग होता है। यह 18 दिन से लेकर 254 दिन (औसतन 66 दिन) तक हो सकता है। इसलिए, नई आदत डालने के लिए निरंतरता जरूरी है। यदि बीच-बीच में एक-दो दिन का अंतर आ भी जाए, तो अगले दिन से फिर से शुरुआत करनी चाहिए।

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आदत बनाने और छोड़ने का राज

दिमाग सुकून देने वाले कामों का आदि होता है। ऐसे में, वह काम की आदत पड़ जाती है। इसे मजबूत करने के लिए कुछ और भी किया जा सकता है। जैसे, कसरत के बाद अपना पसंदीदा नाश्ता करें। यही बात बुरी आदतों को छोड़ने पर भी लागू होती है। उदाहरण के लिए, सोशल मीडिया पर स्क्रॉलिंग की आदत को किसी ऐसे विकल्पों से बदलें, जो उसके बराबर ही आराम व संतोष दें, जैसे सैर करना, किताबें पढ़ना या योगासन करना आदि।

हैबिट स्टैकिंग की तकनीक

दिमाग गतिविधियों को जोड़ने व संकेतों पर प्रतिक्रिया देने में माहिर होता है। हैबिट स्टैकिंग तकनीक में, आप नई आदत को किसी मौजूदा आदत से जोड़ना ही सीखते हैं। इससे वह काम आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है और धीरे-धीरे आदत। उदाहरण के लिए, आप सुबह की कॉफी पीने के बाद ध्यान करना शुरू कर सकते हैं। धीरे-धीरे ये दोनों काम आपस में बेहद गहराई से जुड़ जाएंगे।

तनाव से दूरी बनाएं

तनाव के समय हम अक्सर ऐसी पुरानी आदतों की ओर लौट जाते हैं, जिन्हें छोड़े काफी अरसा हो चुका होता है। इसका कारण प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की क्षमता का कमजोर होना है। इसी की मदद से हम सोच-समझकर निर्णय लेने व आत्म-नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम होते हैं। हालांकि, महज छह सप्ताह तनाव से दूरी बनाकर आप इससे निजात पा सकते हैं। - द कन्वर्सेशन
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