आदत बनाने और छोड़ने का राज
दिमाग सुकून देने वाले कामों का आदि होता है। ऐसे में, वह काम की आदत पड़ जाती है। इसे मजबूत करने के लिए कुछ और भी किया जा सकता है। जैसे, कसरत के बाद अपना पसंदीदा नाश्ता करें। यही बात बुरी आदतों को छोड़ने पर भी लागू होती है। उदाहरण के लिए, सोशल मीडिया पर स्क्रॉलिंग की आदत को किसी ऐसे विकल्पों से बदलें, जो उसके बराबर ही आराम व संतोष दें, जैसे सैर करना, किताबें पढ़ना या योगासन करना आदि।
हैबिट स्टैकिंग की तकनीक
दिमाग गतिविधियों को जोड़ने व संकेतों पर प्रतिक्रिया देने में माहिर होता है। हैबिट स्टैकिंग तकनीक में, आप नई आदत को किसी मौजूदा आदत से जोड़ना ही सीखते हैं। इससे वह काम आपकी दिनचर्या का हिस्सा बन जाता है और धीरे-धीरे आदत। उदाहरण के लिए, आप सुबह की कॉफी पीने के बाद ध्यान करना शुरू कर सकते हैं। धीरे-धीरे ये दोनों काम आपस में बेहद गहराई से जुड़ जाएंगे।
तनाव से दूरी बनाएं
तनाव के समय हम अक्सर ऐसी पुरानी आदतों की ओर लौट जाते हैं, जिन्हें छोड़े काफी अरसा हो चुका होता है। इसका कारण प्रीफ्रंटल कॉर्टेक्स की क्षमता का कमजोर होना है। इसी की मदद से हम सोच-समझकर निर्णय लेने व आत्म-नियंत्रण बनाए रखने में सक्षम होते हैं। हालांकि, महज छह सप्ताह तनाव से दूरी बनाकर आप इससे निजात पा सकते हैं। - द कन्वर्सेशन