Teachers’
Protest: शिक्षा निदेशालय द्वारा मिड-टर्म परीक्षाओं के दौरान उपचारात्मक, संदेह दूर करने और संवर्द्धन की कक्षाओं को अनिवार्य किया है। लोकतांत्रिक अध्यापक मंच ने निदेशालय के इस आदेश का विरोध करते हुए आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है। संगठन का कहना है कि यह कदम विद्यार्थियों और अध्यापकों दोनों पर अनावश्यक बोझ डालने वाला है।
निदेशालय ने इन कक्षाओं को लेकर स्पष्ट किया है कि मिड टर्म परीक्षाएं 26 सितंबर से 29 अक्तूबर तक चलेंगी। इस बीच जिस दिन परीक्षाएं नहीं होंगी उस दिन कक्षाएं आयोजित की जाएंगी। लोकतांत्रिक अध्यापक मंच के अध्यक्ष कृष्ण कुमार फोगाट और महासचिव होशियार सिंह ने आपत्ति जताते हुए कहा कि परीक्षा के दौरान छात्रों को आत्म-अध्ययन और पुनरावृत्ति का समय चाहिए। इससे छात्रों को काफी परेशानी होगी।
अनिवार्य कक्षाएं उनकी एकाग्रता और अध्ययन को बाधित करेंगी। उन्होंने कहा कि परीक्षा की तैयारी कर रहे छात्रों के लिए अन्य कक्षाओं में सक्रिय भागीदारी संभव नहीं है। ऐसे में उपस्थिति भी कम रहेगी और शिक्षकों का पढ़ाना भी व्यर्थ जाएगा। इसके साथ ही परीक्षा कार्य में पहले से व्यस्त अध्यापकों और स्कूल प्रशासन पर अतिरिक्त दबाव पड़ेगा, जबकि इसका व्यावहारिक परिणाम नगण्य होगा।