यू-ट्यूब पर घर में बेकार पड़ी चीजों से घर के सजावटी सामान बनाना या उनका अन्य प्रयोग करना तो देखा होगा। लेकिन इन्हीं घर में रखी अनुपयोगी वस्तुओं से सरकारी स्कूल के शिक्षक बच्चों की पढ़ाई को आसान बनाते हुए उन्हें ऑनलाइन पढ़ाई से जोड़े हुए हैं।
घर के सामान जैसे, पेपर, कटोरी, धागा, प्लास्टिक शीट, स्कैच पेन, बोतल केढक्कन से से वह बच्चों को साइंस व गणित की गतिविधियां कराकर उनकी पढ़ाई को जारी रखे हुए हुए हैं। इस तरह से हो रही पढ़ाई का बच्चे काफी आनंद भी ले रहे हैं।
केशव पुरम स्थित गर्वनमेंट बॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल नंबर-1 के शिक्षक संजय कुमार ने बताया कि सरकारी स्कूलों में आने वाले बच्चों की आर्थिक पृष्ठभूमि बेहतर नहीं होती है। उनके पास ऑनलाइन पढ़ाई केलिए संसाधन भी नहीं होते हैं लेकिन विभिन्न तरह केप्रयोग कर उनकी पढ़ाई को जारी रखा गया है।
कोरोना काल में बच्चे से सीधा संपर्क भी नहीं हो रहा। ऐसे में छोटी से बड़ी कक्षाओं तक के बच्चों को संतुलन, आकार, माप, वजन के संबंध में घर में ही रखे अनुपयोगी सामान से वस्तुएं बनाकर गतिविधियां कराई जा रही हैं।
उन्होंने बताया कि संतुलन को समझाने के लिए कागज, धागे, कटोरी का प्रयोग किया, वहीं आकार व आयतन को समझाने के लिए प्लास्टिक शीट से बने कोन व सिलेंडर का इस्तेमाल किया। वही सफेद पेपर के प्रयोग को क्यूब केआकार में बनाकर उससे सतह केसंबंध में समझाया जा रहा है। इसी तरह से गत्ता, कील व रबड़ केमाध्यम से त्रिकोण, आकार व पैरामीटर को बता रहे हैं।
गतिविधियों के माध्यम से जोड़ा हुआ है
रोहिणी सेक्टर-3 स्थित सर्वोदय स्कूल में शिक्षक शैलेंद्र सिंह तो गतिविधियों केमाध्यम से हिंदी और साइंस पर फोकस किए हुए हैं। उन्होंने स्कैन पैन, बोतल केढक्कन से एबेक्स बनाया है। जिससे वह जोडना, घटाना, भाग करना, सिखाते हैं। उन्होंने बच्चों को एक्टिविटी एट होम के माध्यम से पढ़ाया है।
उन्होंने प्रतिदिन एक वीडियो बनाकर यू-ट्यूब पर अपलोड किया। इन गतिविधियों केलिए उन्होंने घर के अनुपयोगी सामान का ही प्रयोग किया। अब तक वह 100 से ज्यादा वीडियो बना कर अपलोड कर चुके हैं। इस तरह से बच्चों में पढ़ाई केप्रति रुचि भी पैदा हुई है।