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DU Teachers: एमफिल-पीएचडी वेतन वृद्धि पर विवाद, डीटीआई ने की शिक्षा मंत्रालय से 2017 का आदेश वापस लेने की मांग

Thu, 28 Aug 2025 12:16 PM IST
शाहीन परवीन एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

Salary Deduction Row: शिक्षक संघ ने एमफिल और पीएचडी वेतन वृद्धि रोकने के शिक्षा मंत्रालय के आदेश को तुरंत वापस लेने की मांग की है।
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दिल्ली विश्वविद्यालय, Delhi University - फोटो : University Of Delhi
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विस्तार
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MPhil-PhD Increment: डेमोक्रेटिक टीचर्स इनिशिएटिव (DTI) ने बुधवार को मांग की कि शिक्षा मंत्रालय का 2017 का वह आदेश तुरंत वापस लिया जाए, जिसमें एमफिल और पीएचडी करने वाले शिक्षकों की वेतन वृद्धि खत्म करने और पहले से दी गई बढ़ोतरी की वसूली की बात कही गई है।

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डीटीआई ने अपने बयान में कहा कि दिल्ली विश्वविद्यालय ने 20 अगस्त को प्राचार्यों को जो सलाह दी थी, वह सिर्फ दिखावा है। उन्होंने आरोप लगाया कि इससे शिक्षकों को गुमराह किया जा रहा है और यह केवल एक नौटंकी है।

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शिक्षक संगठनों का विरोध और वेतन वृद्धि वापस लेने का खतरा

बैठक को जेएनयू शिक्षक संघ के अध्यक्ष प्रोफेसर सुरजीत मजूमदार, पूर्व डूटा अध्यक्ष प्रोफेसर नंदिता नारायण, प्रोफेसर धीरज नाइट, जामिया मिलिया इस्लामिया के डॉ देबदित्य भट्टाचार्य और डीयू की डॉ उमा गुप्ता ने संबोधित किया।

उन्होंने कहा कि व्यापक शिक्षक समुदाय मंत्रालय के "अवैध निर्देश" और उसके बाद यूजीसी द्वारा दिए गए स्पष्टीकरणों के खिलाफ एकजुट है।

1 जनवरी, 2016 को या उसके बाद सहायक प्रोफेसर के रूप में नियुक्त जिन संकाय सदस्यों को एमफिल या पीएचडी की डिग्री के लिए अग्रिम वेतन वृद्धि दी गई थी, अब उन्हें वापस लेने का खतरा है।

एमफिल/पीएचडी वेतन वृद्धि और वसूली विवाद

शिक्षक संगठन के अनुसार, कई शिक्षकों को लाखों रुपये की वसूली के नोटिस भेजे गए हैं, जिसे शिक्षक समूहों ने "जबरन वसूली" बताया है। यह विवाद 2017 के मंत्रालय के एक पत्र से उपजा है जिसमें कहा गया था कि उच्च योग्यता के लिए प्रोत्साहन पहले से ही करियर एडवांसमेंट स्कीम (CAS) के अंतर्गत आते हैं। 

इसलिए अतिरिक्त वेतन वृद्धि को "लागू नहीं" माना गया। हालांकि, शिक्षकों का तर्क है कि यह 2018 के यूजीसी विनियमों के विपरीत है, जो इस तरह की वेतन वृद्धि का प्रावधान करते हैं और राजपत्र के माध्यम से अधिसूचित किए गए थे, जिससे उन्हें कानूनी बल मिला।

डीटीआई नेताओं ने यह भी बताया कि यह मामला मार्च 2025 में यूजीसी अध्यक्ष द्वारा नियुक्त एक विशेषज्ञ समिति द्वारा समीक्षाधीन है, और समीक्षा पूरी होने से पहले कोई भी वसूली "मनमाना और उचित प्रक्रिया का उल्लंघन" है। 

डीटीआई ने अभियान तेज करने की घोषणा की

उन्होंने आगे कहा कि कॉलेज और विश्वविद्यालय के आदेश केवल नए वेतन वृद्धि को मंजूरी देने पर रोक लगाते हैं, पहले से दी गई वेतन वृद्धि को वापस लेने पर नहीं।

पहले के यूजीसी मानदंडों के तहत, शिक्षकों को नियुक्ति के समय पीएचडी के लिए पांच और एमफिल के लिए दो वेतन वृद्धि मिलती थी, जबकि सेवा के दौरान योग्यता प्राप्त करने वालों को क्रमशः तीन और एक वेतन वृद्धि मिलती थी।

डीटीआई ने कहा कि वह अन्य शिक्षक संगठनों के साथ मिलकर इस आदेश को वापस लेने के लिए दबाव बनाने हेतु अपना अभियान तेज करेगा।
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