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शिक्षा: नवोदय स्कूलों को लेकर उदयनिधि स्टालिन ने जताई असहमति, बोले- तमिलनाडु को नहीं है जरूरत

सार

तमिलनाडु में नवोदय स्कूलों को लेकर उपमुख्यमंत्री उदयनिधि स्टालिन का बयान सामने आया है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु को नवोदय स्कूलों की जरूरत नहीं है। उनका यह बयान राज्य की शिक्षा व्यवस्था और नवोदय स्कूलों को लेकर जारी चर्चा के बीच आया है।
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तमिलनाडु के डिप्टी सीएम उदयनिधि स्टालिन - फोटो : X@Udhaystalin
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विस्तार
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आज जारी दो पेज के बयान में उदयनिधि स्टालिन ने नवोदय स्कूलों के मामले में सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का भी जिक्र किया। कोर्ट ने कहा था कि तमिलनाडु को हिंदी के प्रति अपनी सोच बदलनी चाहिए और राज्य अलग-अलग देशों की तरह काम नहीं कर सकते। उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि तमिलनाडु हिंदी या किसी भी दूसरी भाषा के खिलाफ नहीं है।

उन्होंने कहा कि राज्य अपनी अलग पहचान के साथ काम करता है, लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि वह देश से अलग है। उन्होंने कहा कि हिंदी थोपने की कोशिशों की वजह से तमिलनाडु खुद को अलग महसूस करता है। उनके मुताबिक, भारत की ताकत उसकी विविधता में है और राज्यों की इच्छा के खिलाफ कोई भाषा नीति लागू करने से देश की एकता को नुकसान पहुंच सकता है।

हिंदी सीखने और देशभक्ति का कोई संबंध नहीं

उन्होंने कहा कि भारत-चीन युद्ध, बांग्लादेश मुक्ति संग्राम, कारगिल युद्ध और गुजरात भूकंप जैसे मुश्किल समय में तमिल लोगों ने देश के लिए अपना योगदान दिया है। इसलिए हिंदी थोपे जाने का विरोध करने का मतलब यह नहीं है कि तमिल लोग अलग देश की मांग कर रहे हैं। उन्होंने कहा कि हिंदी सीखने और देशभक्ति के बीच कोई संबंध नहीं है।

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उन्होंने आगे कहा कि तमिलनाडु दो-भाषा नीति का पालन करता है और इसके बावजूद शिक्षा, खेल, विज्ञान और दूसरे क्षेत्रों में लगातार आगे बढ़ रहा है। उनके मुताबिक, तमिलनाडु के कई लोगों ने बिना हिंदी जाने खेलों में नाम कमाया, नोबेल पुरस्कार जीते और ISRO में वैज्ञानिक के तौर पर काम किया है। उन्होंने कहा कि तमिलनाडु का विकास पूरे भारत के विकास में भी अहम भूमिका निभाता है।

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मॉडल और आवासीय स्कूलों का हवाला, बोले- नवोदय के लिए अलग व्यवस्था की जरूरत नहीं

  • उदयनिधि स्टालिन ने कहा कि नवोदय स्कूलों के मामले में तमिलनाडु सरकार ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष मजबूती से रखा है।
  • उन्होंने कहा कि RTE के बाद राज्य के सभी जिलों में मॉडल स्कूल और आवासीय स्कूल चल रहे हैं।
  • इन स्कूलों में गरीब और पिछड़े वर्ग के छात्रों को अच्छी शिक्षा देने पर जोर दिया जा रहा है।
  • उनके अनुसार, इन स्कूलों के छात्र राष्ट्रीय स्तर की प्रवेश परीक्षाओं में अच्छा प्रदर्शन कर रहे हैं।
  • कई छात्र देश के अच्छे संस्थानों में दाखिला भी ले रहे हैं।
  • उदयनिधि ने कहा कि ऐसे में नवोदय स्कूलों के लिए अलग से जमीन देने की जरूरत नहीं है।
  • उन्होंने कहा कि नवोदय स्कूलों के लिए मिलने वाला फंड तमिलनाडु को दिया जाए, तो राज्य मौजूदा स्कूल भवनों में ही बेहतर सुविधाएं उपलब्ध करा सकता है।

उन्होंने कहा, "उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि तमिलनाडु द्वारा तीन-भाषा नीति को स्वीकार न करने के कारण, केंद्र सरकार ने 3,548 करोड़ रुपये रोक दिए हैं, जो 'समग्र शिक्षा योजना' के तहत तमिलनाडु को मिलने चाहिए थे।"
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