कुड्डालोर एसपी एस शक्ति गणेशन ने बताई आत्महत्या
कुड्डालोर की घटना इस महीने राज्य में ऐसा तीसरा मामला। स्थानीय पुलिस द्वारा संदिग्ध मौत का मामला दर्ज किया गया है। पुलिस अधिकारियों ने जांच भी शुरू कर दी है। हालांकि, लगातार घटित हो रही इन घटनाओं से राज्य की पुलिस, प्रशासन और सरकार पर सवाल उठने लगे हैं। ताजा मामले को लेकर कुड्डालोर एसपी एस शक्ति गणेशन का कहना है कि छात्रा ने अपने परिवार संबंधी घरेलू समस्याओं के कारण आत्महत्या कर ली है।
सीएम स्टालिन ने जताई चिंता, शैक्षणिक संस्थानों को दी नसीहत
तमिलनाडु के मुख्यमंत्री एमके स्टालिन ने भी छात्राओं की मौत पर चिंता जताई है। सीएम स्टालिन ने कहा कि राज्य में छात्र आत्महत्या वाली हाल की घटनाएं दर्दनाक हैं। शैक्षणिक संस्थानों को शिक्षा को सेवा के रूप में लेना चाहिए न कि व्यवसाय के रूप में। मुख्यमंत्री ने कहा कि स्कूलों में छात्रों को किसी भी स्थिति से निपटने के लिए सिखाया जाना चाहिए। स्टालिन ने कहा कि विद्यार्थियों को आत्महत्या करने जैसे विचार नहीं रखने चाहिए और उन्हें और अधिक हासिल करने के बारे में सोचना चाहिए।
एक दिन पहले किलाचेरी के नामी स्कूल मृत मिली थी छात्रा
इससे पहले 25 जुलाई को किलाचेरी स्थित सेक्रेड हार्ट गर्ल्स हायर सेकेंडरी स्कूल के छात्रावास में छात्रा का शव मिला है। घटना के बाद पीड़िता के माता-पिता और रिश्तेदारों ने थेक्कलूर में विरोध प्रदर्शन करते हुए थेक्कलूर रोड पर जाम लगा दिया। परिवारजनों और रिश्तेदारों का गुस्सा स्कूल और प्रशासन के खिलाफ फूट पड़ा है। बता दें कि बीते सप्ताह ही एक ऐसी घटना में छात्रा का शव स्कूल परिसर से मिला था। जिसके बाद जिले भर में जमकर बवाल हुआ था। बड़े स्तर पर प्रदर्शन, तोड़-फोड़ एवं आगजनी हुई थी। मामले में तिरुवल्लुर के एक वरिष्ठ पुलिस अधिकारी ने कहा था कि अभी कुछ भी पुष्टि करना जल्दबाजी होगी, सिवाय इसके कि यह आत्महत्या का मामला है। हम इसकी जांच कर रहे हैं।
कल्लाकुरिची में 13 जुलाई को घटना के बाद हुआ था बवाल
यह घटनाक्रम तमिलनाडु के कल्लाकुरिची में 12वीं कक्षा की एक और लड़की की दुखद मौत के कुछ दिनों बाद आया है। निजी स्कूल के छात्रावास में एक 16 वर्षीय लड़की की मौत हो गई थी। लड़की के माता-पिता को हत्या का संदेह था, जबकि पुलिस ने आत्महत्या बताया। छात्रा की मौत पर विरोध हिंसक हो गया था। स्कूल में तोड़फोड़ हुई और पुलिस व स्कूल के वाहनों में आग लगा दी गई। घटना में करीब 52 पुलिस अधिकारी भी घायल हुए थे। मद्रास हाईकोर्ट के निर्देश पर जांच के लिए एसआईटी गठित की गई थी।