सुप्रीम कोर्ट आज उन याचिकाओं पर सुनवाई करेगा, जिनमें केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई भाषा नीति को चुनौती दी गई है। इस नीति के तहत कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य किया गया है, जिनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल होना जरूरी है।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि यह व्यवस्था छात्रों और स्कूलों पर अतिरिक्त बोझ डाल सकती है तथा कुछ राज्यों की भाषा नीतियों से भी टकरा सकती है। वहीं, CBSE का कहना है कि नई शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप यह कदम भारतीय भाषाओं को बढ़ावा देने और बहुभाषी शिक्षा को मजबूत करने के लिए उठाया गया है।
क्या है पूरा मामला?
सीबीएसई ने 2026-27 शैक्षणिक सत्र से कक्षा 9 के छात्रों के लिए तीन भाषाओं की पढ़ाई अनिवार्य की है। इनमें कम से कम दो भारतीय भाषाएं शामिल करना जरूरी है। इस फैसले को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिकाएं दायर की गई हैं। याचिकाकर्ताओं ने नीति लागू करने के तरीके और CBSE के अधिकार को लेकर सवाल उठाए हैं। मामले में कोर्ट ने केंद्र, CBSE और NCERT से जवाब मांगा है और छात्रों पर अतिरिक्त पढ़ाई के दबाव को लेकर भी चर्चा हुई है। अब इस मामले पर सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई होनी है।