कितने अभ्यर्थियों ने दाखिल की है याचिका?
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और आलोक अराधे की पीठ ने 12 अभ्यर्थियों की ओर से दायर याचिका पर नोटिस जारी किया। याचिकाकर्ताओं में सुनील कुमार मीणा भी शामिल हैं, जिन्होंने जून 2026 में आयोजित एफएमजीई परीक्षा दी थी।
याचिकाकर्ताओं की ओर से पेश वकील तन्वी दुबे ने अदालत को बताया कि FMGE सूचना पुस्तिका की कुछ शर्तों के कारण अभ्यर्थियों को परीक्षा के बाद प्रश्न पत्र और आधिकारिक उत्तर कुंजी उपलब्ध नहीं कराई जाती। इसके अलावा, उम्मीदवारों को उनकी रिस्पॉन्स शीट भी नहीं दी जाती।
री-एवैल्यूएशन का भी नहीं है प्रावधान
याचिका में कहा गया है कि परीक्षा के बाद न तो प्रश्न पत्र मिलता है, न उत्तर कुंजी और न ही री-एवैल्यूएशन का कोई विकल्प उपलब्ध है। ऐसे में अभ्यर्थियों के पास अपने प्राप्त अंकों की जांच या किसी संभावित त्रुटि को सत्यापित करने का कोई प्रभावी तरीका नहीं बचता।
याचिकाकर्ताओं का कहना है कि इससे परीक्षा प्रक्रिया में पारदर्शिता प्रभावित होती है और उम्मीदवार अपने वास्तविक तथा अपेक्षित अंकों का मिलान नहीं कर पाते।
सुप्रीम कोर्ट से क्या मांग की गई है?
याचिका में सुप्रीम कोर्ट से अनुरोध किया गया है कि NBEMS को निर्देश दिया जाए कि वह उम्मीदवारों को-
- रिस्पॉन्स शीट उपलब्ध कराए
- प्रश्न पत्र जारी करे
- आधिकारिक आंसर-की प्रकाशित करे
- यदि कोई त्रुटि मिले तो उसकी जांच और सुधार की व्यवस्था करे
इसके अलावा भविष्य की एफएमजीई परीक्षाओं के लिए प्रोविजनल आंसर-की जारी करने, अभ्यर्थियों की आपत्तियों की स्वतंत्र विशेषज्ञ समिति से जांच कराने और अंतिम आंसर-की प्रकाशित करने के भी निर्देश देने की मांग की गई है।
जून 2026 एफएमजीई के नतीजों पर क्या सवाल उठाए गए?
याचिका के अनुसार, 28 जून 2026 को आयोजित FMGE में लगभग 38 हजार उम्मीदवार शामिल हुए थे। इनमें से केवल करीब 4,000 से 4,500 अभ्यर्थी ही सफल हुए। यानी परीक्षा का पास प्रतिशत लगभग 12.3% रहा, जिसे याचिका में FMGE के इतिहास के सबसे कम पास प्रतिशतों में से एक बताया गया है।
वीडियो आधारित सवालों पर भी आपत्ति
याचिकाकर्ताओं ने यह भी आरोप लगाया है कि जून 2026 की परीक्षा में करीब 12 वीडियो आधारित क्लीनिकल प्रश्न पूछे गए, जबकि इसकी जानकारी पहले से सूचना पुस्तिका में नहीं दी गई थी। उनका कहना है कि इससे परीक्षा की तैयारी और प्रदर्शन पर असर पड़ा।
याचिका में यह भी कहा गया है कि परिणाम घोषित होने के बाद 5,000 से अधिक उम्मीदवारों ने मूल्यांकन प्रक्रिया को लेकर अपनी शिकायतें दर्ज कराईं और इसके लिए एक गूगल फॉर्म के माध्यम से अपनी आपत्तियां साझा कीं।