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नालसार विवाद: क्या बीसीआई को छात्रों पर कार्रवाई का अधिकार? सुप्रीम कोर्ट ने दिया स्पष्ट जवाब, जानें क्या कहा

Thu, 03 Sep 2026 03:02 PM IST
आकाश कुमार पीटीआई, नई दिल्ली

सार

NALSAR Row: सुप्रीम कोर्ट ने नालसार विवाद में बार काउंसिल ऑफ इंडिया की कार्रवाई को अधिकार क्षेत्र से बाहर बताया है। अदालत ने कहा कि कानून के छात्रों के आचरण पर कार्रवाई का फैसला संबंधित शिक्षण संस्थान अपने नियमों के तहत करेगा। पढ़ें पूरा मामला...
 
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नालसार विवाद में सुप्रीम कोर्ट ने बीसीआई को लगाई फटकार - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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NALSAR Row: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को कहा कि बार काउंसिल ऑफ इंडिया (बीसीआई) के पास कानून के छात्रों के आचरण को नियंत्रित करने की वैधानिक शक्ति नहीं है। अदालत ने कहा कि छात्रों के खिलाफ कार्रवाई करना संबंधित शिक्षण संस्थान का विषय है। संस्थान अपने नियमों और विनियमों के अनुसार इस पर फैसला ले सकता है।

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मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और न्यायमूर्ति जॉयमाल्या बागची तथा न्यायमूर्ति वी. मोहना की पीठ ने यह आदेश हैदराबाद स्थित नालसार यूनिवर्सिटी ऑफ लॉ से जुड़े विवाद की सुनवाई के दौरान दिया।

नालसार में क्या हुआ था?

यह विवाद बीसीआई की उस कार्रवाई के बाद सामने आया था, जो नालसार के छात्रों द्वारा मुख्य न्यायाधीश की प्रस्तावित विश्वविद्यालय यात्रा और दीक्षांत समारोह में उनकी भागीदारी को लेकर जताई गई आपत्तियों से जुड़ी थी।

सुप्रीम कोर्ट ने इस मामले में बीसीआई की ओर से जारी दो अधिसूचनाओं को रद्द कर दिया। खास बात यह है कि विवाद बढ़ने और व्यापक आलोचना के बाद बीसीआई ने दोनों अधिसूचनाएं जारी होने के कुछ ही घंटों के भीतर वापस ले ली थीं।

बीसीआई ने छात्रों के खिलाफ क्या कार्रवाई की थी?

14 अगस्त को विवाद उस समय बढ़ गया था, जब बीसीआई ने राज्य बार काउंसिलों को निर्देश दिया था कि वे नालसार के 2026 के स्नातकों का अधिवक्ता के रूप में नामांकन अगले आदेश तक न करें। यह कार्रवाई मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की विश्वविद्यालय की प्रस्तावित यात्रा के खिलाफ चलाए गए अभियान से जुड़े आरोपों को लेकर की गई थी।

छात्रों के मामले में कार्रवाई कौन कर सकता है?

सुप्रीम कोर्ट ने साफ किया कि बीसीआई छात्रों पर उस समय तक नियामक नियंत्रण नहीं रख सकती, जब तक वे अधिवक्ता नहीं बन जाते और कानूनी पेशे को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे के दायरे में नहीं आ जाते।

अदालत के अनुसार, छात्रों के आचरण को लेकर किसी तरह की कार्रवाई करनी है या नहीं, यह संबंधित शिक्षण संस्थान को अपने नियमों और विनियमों के तहत तय करना होगा।
  • कानून के छात्रों पर बीसीआई का नियामक नियंत्रण नहीं है।
  • छात्रों के आचरण पर कार्रवाई का फैसला संबंधित शिक्षण संस्थान कर सकता है।
  • अधिवक्ता बनने के बाद ही छात्र कानूनी पेशे को नियंत्रित करने वाले वैधानिक ढांचे के दायरे में आते हैं।
     

सीजेआई ने बीसीआई के हस्तक्षेप पर क्या कहा था?

जब यह मामला सुप्रीम कोर्ट के सामने रखा गया था, तब मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने बीसीआई के हस्तक्षेप पर कड़ी नाराजगी जताई थी। उन्होंने कहा था, "यह छात्रों और मेरे बीच बातचीत है। वे (बीसीआई) हस्तक्षेप करने वाले कौन होते हैं? यह पूरी तरह अनावश्यक है।"

वकीलों के समूह को हाईकोर्ट जानें के लिए कहा

इसके अलावा, सुप्रीम कोर्ट ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) कार्यालय के बाहर हुए कथित हमले की सीबीआई (CBI) जांच की मांग वाली याचिका पर सुनवाई से इनकार करते हुए वकीलों के समूह को दिल्ली हाईकोर्ट जाने का निर्देश दिया है।

चीफ जस्टिस सूर्यकांत की अध्यक्षता वाली पीठ के समक्ष अधिवक्ता प्रशांत भूषण ने आरोप लगाया कि BCI अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा के इस्तीफे की मांग कर रहे युवा वकीलों के साथ मारपीट की गई। याचिका में घटना के सीसीटीवी (CCTV) फुटेज को सुरक्षित रखने और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की गई थी।
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नालसार विवाद से कैसे जुड़ा है ये मामला?

यह विवाद तब शुरू हुआ जब NALSAR यूनिवर्सिटी के कुछ छात्रों ने चीफ जस्टिस को दीक्षांत समारोह में मुख्य अतिथि के रूप में आमंत्रित करने का विरोध किया था, जिसके जवाब में BCI अध्यक्ष ने इस बैच के छात्रों के वकालत नामांकन पर रोक लगाने का आदेश जारी कर दिया था।

हालांकि आलोचना और चीफ जस्टिस की आपत्ति के बाद इस आदेश को वापस ले लिया गया था, लेकिन BCI की इस कार्रवाई और अन्य अनियमितताओं के विरोध में 20 अगस्त को प्रदर्शन हुआ, जिसमें एडवोकेट्स प्रोटेक्शन एक्ट लागू करने और वकीलों को बीमा कवर देने जैसी मांगें भी शामिल थीं।
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