दरअसल, 29 डॉक्टरों ने सुप्रीम कोर्ट में यह याचिका दायर कर यह अनुरोध किया था कि सुप्रीम कोर्ट एनएमसी को यह आदेश दे कि वह सभी विश्वविद्यालयों को परीक्षा की तैयारी के लिए विद्यार्थियों को उचित समय प्रदान करे।
कोर्ट ने जवाब में यह कहा
इस पर पीठ ने कहा कि हमे नहीं पता कि परीक्षा की तैयारी करने के लिए सही समय कितना हो सकता है। अदालत कैसे उचित समय तय कर सकती है? यह तो हर किसी का अपना-अपना होता है। सभी विश्वविद्यालय अपने इलाके में कोरोना की वजह से उत्पन्न परिस्थितियों को देखते हुए एनएमसी के परामर्श के आधार पर इसका फैसला करें।
न्यायालय ने यह भी कहा कि भारत जैसे विशाल देश में हर जगह कोरोना संक्रमितों की संख्या समान नहीं हो सकती। अप्रैल-मई में कोरोना की वजह से दिल्ली के हालात बहुत बुरे थे। लेकिन अब प्रति दिन बमुश्किल 200 मामले सामने आ रहे हैं। कर्नाटक में अभी भी हालात ज्यादा अच्छे नहीं हैं। इसलिए हम विश्वविद्यालयों का पक्ष सुने बिना कोई फैसला नहीं ले सकते हैं।