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CBSE Three Language Policy: तीन-भाषा नीति पर अंतरिम रोक लगाने से SC का इनकार, 14 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

Thu, 18 Jun 2026 03:51 PM IST
Akash Kumar एजुकेशन डेस्क, अमर उजाला

सार

CBSE Three-Language Policy: सुप्रीम कोर्ट ने सीबीएसई की कक्षा 9 से लागू होने वाली तीन-भाषा नीति पर अंतरिम रोक लगाने से इनकार कर दिया है। अदालत ने मामले को लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध किया है।
 
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Supreme Court - फोटो : AI Genrated
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विस्तार
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CBSE Three-Language Policy: सुप्रीम कोर्ट ने गुरुवार को केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) की नई तीन-भाषा नीति के क्रियान्वयन पर रोक लगाने की मांग वाली याचिका पर कोई अंतरिम राहत देने से इनकार कर दिया। यह नीति शैक्षणिक सत्र 2026-27 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए लागू की जानी है।

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मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत और न्यायमूर्ति वी. मोहन की पीठ ने इस मामले को पहले से लंबित समान याचिकाओं के साथ टैग कर दिया।

सुनवाई के दौरान अदालत ने स्पष्ट कहा कि इस मामले पर पहले भी विस्तृत बहस हो चुकी है, इसलिए फिलहाल किसी प्रकार की अंतरिम सुरक्षा या रोक का आदेश नहीं दिया जा सकता।

एनजीओ ने क्रियान्वयन पर उठाए सवाल

यह याचिका Friends of People for Active Democracy नामक गैर-सरकारी संगठन ने दायर की है। संगठन की ओर से पेश वकील ने अदालत को बताया कि वे तीन-भाषा नीति का विरोध नहीं कर रहे हैं, बल्कि इसके क्रियान्वयन के तरीके को चुनौती दे रहे हैं।

सुनवाई के दौरान पीठ ने संगठन के नाम को लेकर हल्के-फुल्के अंदाज में टिप्पणी करते हुए पूछा कि क्या ऐसा नाम अदालत या लोगों के मन में भय पैदा करने के लिए रखा गया है। इस पर वकील ने कहा कि यह 2013 में स्थापित एक पुराना ट्रस्ट है।

14 जुलाई को होगी अगली सुनवाई

पीठ ने मामले को अन्य लंबित याचिकाओं के साथ जोड़ते हुए 14 जुलाई को सुनवाई के लिए सूचीबद्ध कर दिया। इससे पहले 27 मई को सुप्रीम कोर्ट ने याचिका पर सुनवाई के लिए सहमति जताई थी और केंद्र सरकार, सीबीएसई तथा एनसीईआरटी को नोटिस जारी कर दो सप्ताह के भीतर विस्तृत जवाब दाखिल करने को कहा था।

अदालत ने अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल (ASG) ऐश्वर्या भाटी से यह भी पूछा था कि नई नीति लागू करने के लिए सीबीएसई की तैयारियां किस स्तर पर हैं और इस संबंध में रिपोर्ट प्रस्तुत करने को कहा था।

क्या है CBSE की नई तीन-भाषा नीति?

सीबीएसई द्वारा जारी हालिया सर्कुलर के अनुसार, 1 जुलाई 2026 से कक्षा 9 के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। इनमें कम से कम दो भाषाएं भारतीय मूल की होना जरूरी होंगी। यह कदम राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 और राष्ट्रीय पाठ्यचर्या रूपरेखा (NCF-SE) 2023 के अनुरूप उठाया गया है।

बोर्ड का कहना है कि माध्यमिक स्तर पर भाषा दक्षता और सांस्कृतिक समझ को मजबूत करने के लिए यह बदलाव किया जा रहा है।

विदेशी भाषा पढ़ने वालों के लिए क्या नियम होंगे?

सीबीएसई के अनुसार, यदि कोई छात्र विदेशी भाषा पढ़ना चाहता है तो वह इसे केवल तीसरी भाषा के रूप में दो भारतीय भाषाओं का अध्ययन करने के बाद चुन सकता है। इसके अलावा विदेशी भाषा को अतिरिक्त चौथी भाषा के रूप में भी लिया जा सकता है।

कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में नहीं होगा R3 का पेपर
बोर्ड ने छात्रों पर अतिरिक्त दबाव कम करने के लिए महत्वपूर्ण फैसला लिया है। तीसरी भाषा (R3) के लिए कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा आयोजित नहीं की जाएगी।

R3 विषय का मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर होगा और छात्रों के प्रदर्शन को सीबीएसई प्रमाणपत्र में दर्ज किया जाएगा। बोर्ड ने यह भी स्पष्ट किया है कि किसी भी छात्र को केवल R3 विषय के कारण कक्षा 10 बोर्ड परीक्षा में बैठने से नहीं रोका जाएगा।

संबंधित भाषा के शिक्षक नहीं होने पर क्या होगा?

जहां संबंधित भारतीय भाषाओं के योग्य शिक्षक उपलब्ध नहीं होंगे, वहां स्कूल अस्थायी व्यवस्था के तहत अन्य विषयों के ऐसे शिक्षकों की सेवाएं ले सकेंगे जिन्हें उस भाषा का कार्यात्मक ज्ञान हो।

इसके अलावा स्कूलों को इंटर-स्कूल संसाधन साझा करने, वर्चुअल या हाइब्रिड शिक्षण, सेवानिवृत्त भाषा शिक्षकों की नियुक्ति और योग्य स्नातकोत्तर अभ्यर्थियों की सेवाएं लेने की भी अनुमति दी गई है।

दिव्यांग और विदेशी छात्रों को मिलेगी राहत

सीबीएसई ने कहा है कि विशेष आवश्यकता वाले बच्चों (CWSN) को Rights of Persons with Disabilities Act, 2016 के प्रावधानों के अनुसार आवश्यक छूट दी जाएगी।

वहीं विदेश से भारत लौटने वाले छात्रों को मामले-दर-मामले के आधार पर दो भारतीय भाषाएं पढ़ने की अनिवार्यता से छूट दी जा सकती है।
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गणित और विज्ञान में भी होंगे बड़े बदलाव

सीबीएसई ने अप्रैल 2026 में यह भी घोषणा की थी कि 2026-27 सत्र से कक्षा 9 में गणित और विज्ञान विषयों के लिए दो-स्तरीय (Two-Level) प्रणाली लागू की जाएगी।

इसके तहत दोनों विषयों में एक अनिवार्य स्टैंडर्ड स्तर और एक वैकल्पिक एडवांस्ड स्तर होगा। सभी छात्रों को 80 अंकों की समान परीक्षा देनी होगी, जबकि उच्च दक्षता वाले छात्र अतिरिक्त एडवांस्ड पेपर देकर अपनी गहन विषय समझ और उच्च स्तरीय सोच कौशल का प्रदर्शन कर सकेंगे।
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