जस्टिस सी टी रविकुमार और जस्टिस सुधांशु धूलिया की अवकाशकालीन पीठ ने मामले पर कहा कि शीर्ष अदालत ने नौ मई को सभी खाली/स्ट्रे/वैकेंट सुपर-स्पेशियलिटी सीटों के लिए मॉप-अप राउंड आयोजित कराने की अनुमति दी थी। हालांकि, कोर्ट ने कहा था कि इस प्रक्रिया में वे उम्मीदवार भाग नहीं ले सकेंगे जिन्होंने पहले के राउंड में भाग लिया हो।
पीठ ने कहा कि हम फैसले के खिलाफ नहीं जा सकते। जब कोई विशिष्ट निर्देश होता है, तो हम यह नहीं कर सकते। जब इस अदालत द्वारा कानून निर्धारित किया जाता है, तो अब केवल इसलिए कि आप फैसले के पक्षकार नहीं हैं। पीठ ने आगे कहा कि हमें नहीं लगता कि हमें इस अदालत द्वारा पारित आदेश के आलोक में याचिकाकर्ता द्वारा उठाए गए तर्कों के साथ आगे बढ़ना चाहिए। हमें यह बात मानने में कोई भी संकोच नहीं है कि याचिकाकर्ता ऐसी प्रार्थना करने का हकदार नहीं है। संक्षेप में, ऐसी रिट याचिका को विफल होना चाहिए और खारिज कर दिया जाना चाहिए।
बता दें कि पीठ कवियारसन एमपी और अन्य की ओर से दायर की गई याचिका पर सुनवाई कर रही थी। याचिकाकर्ता ने तमिलनाडु राज्य द्वारा छोड़ी गई नीट सुपर स्पेशियलिटी, 2021 की 92 इन सर्विस सीटों को नई सीटों के साथ जोड़ने और सभी उम्मीदवारों को इसमें भाग लेने देने की मांग की थी। दरअसल, 9 मई, 2022 को तमिलनाडु की ओर से पेश हुए वकील ने शीर्ष अदालत को बताया था कि राज्य के इन-सर्विस कोटे की 92 अधूरी सीटों को इस साल अखिल भारतीय कोटा (AIQ) को सौंप दिया जाएगा।
अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल ऐश्वर्या भाटी ने कहा था कि तमिलनाडु द्वारा AIQ को सरेंडर की गई 92 सुपर स्पेशियलिटी सीटों के तहत प्रवेश के लिए मॉप अप राउंड का आयोजन किया जाएगा। मामले पर शीर्ष अदालत ने कहा था कि सभी खाली/स्ट्रे/वैकेंट सुपर स्पेशियलिटी सीटों के लिए मॉप अप राउंड इस शर्त के अधीन आयोजित किया जाएगा कि कोई भी डॉक्टर जो पहले दौर में एक सीट पर शामिल हुआ है, वह मॉप अप राउंड में भाग लेने के लिए पात्र नहीं होगा। कोर्ट ने कहा था कि मॉप राउंड आयोजित किया जा रहा है, इसलिए प्रवेश पूरा करने के लिए समय का एक उपयुक्त विस्तार दिया जा सकता है।