आनंदीबाई जोशी... जिस दौर में भारत में महिलाओं के लिए शिक्षा किसी सपने से कम नहीं थी, उस दौर में विदेश जाकर डॉक्टर की डिग्री हासिल कर एक मिसाल कायम करने वाली महिला थीं आनंदी गोपाल जोशी... 1865 में पुणे में जन्मीं आनंदी समाज के लिए कुछ करना चाहती थीं... इसके लिए उन्होंने पढ़ लिखकर डॉक्टर बनने का फैसला किया... लेकिन ये आसान नहीं था... दरअसल, उनकी शादी महज 9 साल की उम्र में अपने से 20 साल बड़े युवक गोपालराव से कर दी गई थी... जिसके बाद 14 साल की उम्र में वो मां बन गईं... बच्चा बहुत कमजोर था, उसे एक कुशल डॉक्टरी उपचार की जरुरत थी... लेकिन डॉक्टर नहीं मिलने की वजह से 10 दिनों में ही उस बच्चे की मृत्यु हो गई... इस घटना से आनंदीबाई को गहरा सदमा दिया... वो शांत रहने लगीं और खाना पीना छोड़ दिया...
इसी दौरान उन्होंने निश्चय की जिस दर्द से वो गुजर रही हैं किसी और मां को इस दर्द से नहीं गुजरने देंगी... उनके इस फैसले में उनके पति गोपालराव ने भी उनका पूरा साथ दिया... हालांकि समाज में उनको एक भारी विरोध का समाना करना पड़ा... सभी ने उन पर तरह-तरह की बातें कीं... लेकिन, आनंदीबाई मन बना चुकी थीं... और वो तमाम विराधों के बीच मेडिकल एजुकेशन के लिए अमेरिका चली गईं... 1886 में 21 साल की उम्र में आनंदीबाई ने डॉक्टर की डिग्री ली और भारत की पहली महिला डॉक्टर बनकर दुनिया के समाने मिसाल कायम की...
लेकिन यहीं से उनके जीवन में एक नया संघर्ष शुरू हो गया... डिग्री पूरी करने के बाद आनंदीबाई जब देश वापस लौटीं तो वो टीबी की शिकार हो गईं... काफी दिनों तक वो इस बीमारी से लड़ती रहीं लेकिन उनकी सेहत में सुधार नहीं हुआ... 26 फरवरी 1887 में 22 साल की उम्र में उन्होंने दुनिया को अलविदा कह दिया... उनकी हिम्मत और संघर्ष से प्रेरित होकर कैरोलिन वेलस ने 1888 में उनपर बायोग्राफी लिखी... इस बायोग्राफी पर एक सीरियल भी बना जिसका नाम था 'आनंदी गोपाल', जिसका प्रसारण दूरदर्शन पर किया गया... आनंदी बाई आज इस दुनिया में नहीं हैं लेकिन वो उन महिलाओं के लिए आज भी प्रेरणा हैं जो जीवन में आई किसी मुसीबत से टूट जाती हैं।