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त्रपित बंसल: एआई की दुनिया में रचा इतिहास, मेटा से मिला आठ सौ करोड़ का पैकेज; कैसे मिली कामयाबी?

Mon, 05 Oct 2026 07:53 AM IST
ज्योति भास्कर अमर उजाला नेटवर्क।

सार

ओपनएआई के चर्चित o1 रीजनिंग मॉडल की नींव रखने वाले त्रपित बंसल ने एआई को सिर्फ तेज नहीं, बल्कि जवाब देने से पहले ‘सोचना’ सिखाया। जब त्रपित ने आईआईटी में कदम रखा, तब शायद उन्होंने भी नहीं सोचा होगा कि एक दिन वह एआई की दुनिया की सबसे बड़ी प्रयोगशाला और 800 करोड़ के पैकेज तक पहुंचेंगे।
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एआई में दिलचस्पी से मिली सफलता - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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साल 2007। आईआईटी, कानपुर का कैंपस। एक युवा इस प्रतिष्ठित संस्थान में दाखिला लेता है। 2012 में डिग्री पूरी करने के बाद वह बंगलूरू के इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ साइंस, (आईआईएससी) पहुंचा, जहां मशीन लर्निंग लैब में रिसर्च असिस्टेंट बनकर उसने एआई की दुनिया में कदम रखा। यह वह दौर था, जब दुनिया एआई से पूरी तरह वाकिफ भी नहीं थी, लेकिन वह युवा उन लोगों में से एक था, जो एआई के भविष्य की नींव रख रहे थे और हर दिन एआई से जुड़ा कुछ न कुछ नया सीख रहे थे। सीखने की इसी ललक ने उसे अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ मैसाचुसेट्स एमहर्स्ट पहुंचाया, जहां उसने कंप्यूटर साइंस में मास्टर्स और पीएचडी की।

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इसके बाद उसने फेसबुक, गूगल, माइक्रोसॉफ्ट और ओपनएआई जैसी दिग्गज तकनीकी प्रयोगशालाओं में रिसर्च इंटर्नशिप की। उसका मकसद अपने हुनर को निखारना और अपने विषय की गहराई को समझना था। फिर मेटा ने अपनी महत्वाकांक्षी ‘सुपरइंटेलिजेंस’ टीम के लिए उसे चुना। इस युवा का नाम है त्रपित बंसल। मीडिया रिपोर्टों में उनका पैकेज करीब 800 करोड़ रुपये बताया गया। त्रपित की कहानी बताती है कि शॉर्टकट भले जल्दी आगे ले जाए, लेकिन गहरी समझ, लगातार सीखना और वर्षों की मेहनत ही आपको वहां पहुंचाती है, जहां पहुंचना दूसरों को असंभव लगता है।

भीड़ से अलग राह चुनी
अक्सर देखा गया है कि इंजीनियरिंग की पढ़ाई करने वाले अधिकतर छात्र कंप्यूटर साइंस को प्राथमिकता देते हैं, लेकिन त्रपित बंसल ने आईआईटी, कानपुर में गणित और सांख्यिकी जैसे विषय चुने। उन्होंने 2007 से 2012 के बीच इन विषयों में पांच वर्षीय इंटीग्रेटेड डिग्री पूरी की। बाद में यही मजबूत गणितीय आधार उनके एआई और मशीन लर्निंग रिसर्च में काम आया। उनकी पीएचडी थीसिस में मशीन लर्निंग और नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (एनएलपी) जैसे क्षेत्र प्रमुख रहे। उन्होंने शोध किया कि एआई को बहुत ज्यादा उदाहरण दिए बिना भी नई चीजें कैसे सिखाई जा सकती हैं। उनकी थीसिस में उनके तरीकों की तुलना जीपीटी-3 जैसे समकालीन मॉडलों से भी की गई थी। डॉक्टरेट रिसर्च के दौरान उन्होंने एनएलपी, डीप लर्निंग और मेटा-लर्निंग जैसे विषयों पर शोध किया। विश्वविद्यालय के रिकॉर्ड के अनुसार उन्होंने 2021 में पीएचडी पूरी की।
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अंतरराष्ट्रीय मंचों पर पेश किए शोध
अपनी पीएचडी और रिसर्च कॅरिअर के दौरान उन्होंने दुनिया के प्रतिष्ठित मंचों-जैसे इंटरनेशनल कॉन्फ्रेंस ऑन लर्निंग रिप्रेजेंटेशंस (आईसीएलआर), एनुअल मीटिंग ऑफ द एसोसिएशन फॉर कंप्यूटेशनल लिंग्विस्टिक्स (एसीएल) और कॉन्फ्रेंस ऑन इंपीरिकल मेथड्स इन नेचुरल लैंग्वेज प्रोसेसिंग (ईएमएनएलपी) पर शोध पत्र प्रस्तुत किए। उनका शोध 'इमर्जेंट कॉम्प्लेक्सिटी वाया मल्टी-एजेंट कॉम्पिटिशन’ एआई एजेंटों के जटिल व्यवहार को समझने में एक मील का पत्थर माना जाता है। त्रपित के एक प्रसिद्ध शोध पत्र ने मशीन लर्निंग की दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित सम्मेलनों में से एक आईसीएलआर-2018 में सर्वश्रेष्ठ शोध पत्र का पुरस्कार जीता।

कंसल्टिंग से शुरुआत
अकादमिक शोध में जाने से पहले उन्होंने 2012-2013 में गुरुग्राम में एक्सेंचर में एक विश्लेषक के रूप में अपने पेशेवर कॅरिअर की शुरुआत की थी। त्रपित ने जनवरी 2022 में ओपनएआई को बतौर शोधकर्ता जॉइन किया। उन्होंने ओपनएआई के बहुचर्चित o1 रीजनिंग मॉडल, जिसे प्रोजेक्ट स्ट्रॉबेरी/क्यू के नाम से भी जाना गया, के विकास में बुनियादी योगदान दिया। त्रपित ने केवल बड़े मॉडल प्रशिक्षित करने पर नहीं, बल्कि इस बात पर शोध किया कि एआई मॉडल जवाब देने से पहले खुद सोचने में अधिक समय कैसे खर्च कर सकता है। यही विचार ओपनएआई o1 की सफलता की रीढ़ बना। त्रपित ने रीइन्फोर्समेंट लर्निंग और एआई रीजनिंग पर सीधे कंपनी के पूर्व चीफ साइंटिस्ट इल्या सुतस्केवर के साथ काम किया।

वैश्विक एआई विशेषज्ञों के साथ रिसर्च
उनके सबसे दिलचस्प शुरुआती शोधों में से एक में कृत्रिम बुद्धिमत्ता से लैस मशीनों को एक-दूसरे के विरुद्ध प्रतिस्पर्धा कराई गई। इससे यह समझने की कोशिश की गई कि मशीनें अपने अनुभव से जटिल व्यवहार कैसे सीख सकती हैं। वह मेटा में लुकास बायर, अलेक्सांद्र कोलेस्निकोव और शियाओहुआ झाई जैसे वैश्विक विजन और डीप लर्निंग विशेषज्ञों के साथ मिलकर अगली पीढ़ी के फ्रंटियर मॉडल्स पर काम कर रहे हैं।

युवाओं को सीख

  • सफलता के पीछे न भागें, बल्कि कॅरिअर में हर पड़ाव से सीखते हुए आगे बढ़ें।
  • विशेषज्ञता केवल अनुभव से नहीं, बल्कि किसी विषय को गहराई से समझने से आती है।
  • सवाल पूछने और नई चीजें खोजने की आदत विकसित करें।
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