मात्र 19 साल की उम्र में मैंने अपनी ट्रेनिंग पूरी की। जब ट्रेनिंग में पहली बार मैंने विमान उड़ाया, तो लगा, जैसे मेरा सपना साकार हो गया। ट्रेनिंग खत्म होने के तुरंत बाद ही मुझे एयर इंडिया में नौकरी मिल गई। नौकरी के दौरान ही मैं पहली बार विदेश गई, जहां से ट्रेनिंग के लिए मुझे स्पेन भी भेजा गया। जब मैं 21 साल की थी, तभी ट्रेनिंग के लिए मुझे लंदन भेजा गया। यही वह समय था, जब मैंने पहली बार बोइंग 777 उड़ाया था। मुझे पता नहीं था, पर बाद में किसी ने बताया कि मैं बोइंग 777 उड़ाने वाली दुनिया की सबसे युवा महिला कमांडर बन चुकी हूं।
आज भी विजयवाड़ा के कई कॉलेजों में लड़कियों को पैंट-शर्ट पहने की अनुमति नहीं है। लेकिन दुनिया घूमने के बाद मेरी लाइफस्टाइल बदली है और मेरी समझ बढ़ी है। मैं ऐसे होनहारों को गाइड करने के साथ पायलट बनने की ट्रेनिंग देना चाहती हूं, जो जानकारी के अभाव और दूसरी चुनौतियों के चलते अपने सपने पूरे नहीं कर पाते। मुझे पता है कि चुनौतियां हर काम में होती हैं, लेकिन मेरा अनुभव है कि खुद को लक्ष्य पर केंद्रित कर सफलता प्राप्त की जा सकती है।
(विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित)