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दर्जी की दुकान से आईएएस की उड़ान!

Tue, 16 Sep 2014 02:35 PM IST
एजुकेशन डेस्क
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सिविल सेवा में सफल होने का सपना सना ने देखा था और आईएएस बनकर उन्होंने अपने सपने को हकीकत का रूप दिया...
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उत्तर प्रदेश के बागपत जिले की रहने वाली सना अख्तर की मेहनत और कामयाबी आखिरकार रंग लाई और सिविल सर्विसेज एग्जाम के माध्यम से वह आईएएस बनने में कामयाब रहीं। जून, 2014 में जब सिविल सर्विसेज एग्जाम का परिणाम आया, तो वह और उनका परिवार खुशी से झूम उठा। अपने पहले ही प्रयास में उन्होंने बाजी मार ली थी और सफल अभ्यर्थियों की सूची में आईएएस के रूप में अपनी जगह पक्की कर ली थी। सना का मानना है कि लक्ष्य निर्धारित करके मेहनत के साथ पढ़ाई की जाए तो कुछ भी हासिल किया जा सकता है। सिविल सेवा की परीक्षा पास करना आसान नहीं होता है, लेकिन उसके बावजूद सना अख्तर ने 90वीं रैंक प्राप्त की। पेश है, उनसे बातचीत के प्रमुख अंश :

इतनी बड़ी सफलता कैसे मिली?
हर किसी को पहले ही अपना टारगेट तय कर लेना चाहिए। वह चाहे किसी भी क्षेत्र से संबंधित लक्ष्य क्यों न हो। उस लक्ष्य को ध्यान में रखकर ही मेहनत से पढ़ाई करनी चाहिए। ऐसा करने से किसी भी लक्ष्य को आसानी से प्राप्त किया जा सकता है। ऐसा ही मैंने किया। लक्ष्य बनाया और उस लक्ष्य को पाने के लिए योजनाबद्ध तरीके से पूरी मेहनत की।
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सिविल सेवा एग्जाम में आपके विषय क्या-क्या थे?
भूगोल और इंजीनियरिंग जैसे विषय लेकर मैंने इस परीक्षा में सफलता प्राप्त की।

किस तरह से आपने इसके लिए तैयारी की?
किसी भी परीक्षा को पास करने के लिए जरूरी नहीं है कि रातभर पढ़ाई की जाए। मैंने अपना समय निर्धारित किया, पढ़ने का भी और माइंड रिफ्रेश करने का भी। टाइम टेबल बनाकर पढ़ाई की। पढ़ाई को लेकर मैंने अपनी जो दिनचर्या बनाई, उसका निरंतर पालन किया।  

शुरूआत से अब तक की अपनी शिक्षा के बारे में बताएं?
बचपन से ही किताबों से काफी प्यार रहा और पढ़ाई करना अच्छा लगता था। बागपत डीएवी पब्लिक स्कूल से कक्षा 10वीं की परीक्षा में 90.8 प्रतिशत अंक प्राप्त कर टॉपरों की सूची में स्थान पाया था। उसके बाद मेरठ डीपीएस पब्लिक स्कूल से कक्षा 12वीं में 93.2 प्रतिशत अंक लेकर टॉप किया था। फिर नोएडा के एनआईईटी से बीटेक किया। इसके बाद सिविल सेवा की तैयारी शुरू कर दी।

परिवार का किस तरह से सहयोग मिला?
मेरे पापा बागपत के बाजार में दर्जी की दुकान करते हैं और उसी से परिवार का गुजारा होता है। इसके बावजूद पापा ने पढ़ाई में किसी तरह की कमी नहीं होने दी। पढ़ाई के लिए किताब से लेकर कोचिंग तक जैसी भी जरूरत होती थी, वह मेरी मदद के लिए सदैव तैयार रहते थे। इससे पढ़ाई और लक्ष्य को लेकर मेरी राह आसान होती गई। पापा ही मुझे कोचिंग के लिए छोड़ने जाते थे और लेकर आते थे। सच तो यह है कि मेरी पढ़ाई के कारण वह अपने काम पर भी ध्यान नहीं दे पाते थे। मुझे आईएएस के रूप में देखना पापा का सपना था। उनके साथ ही बागपत में डीएम रहे रंजन कुमार का भी काफी सहयोग मुझे मिला, जिन्होंने मुझे काफी गाइड किया।
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समाज के लिए कुछ कहना चाहेंगी?
हमारे समाज में कई बार बेटियों को बेटों के मुकाबले कम शिक्षा दिलाई जाती है, लेकिन बेटी व बेटे को बराबर मानकर पढ़ाना चाहिए। बेटियां भी बेटों की तरह अपने मां-बाप का नाम रोशन करती हैं और उनको भी कम नहीं समझना चाहिए। इसके साथ ही यदि कोई अधिकारी बनता है तो उसे खुद को अधिकारी नहीं समझकर समाज का सेवक बनकर काम करना चाहिए। मैं खुद भी आईएएस बनकर नहीं, बल्कि समाज की सेवक बनकर काम करूंगी।
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