दो कर्मचारियों के साथ शुरू हुआ सफर
भले ही विकास को व्यवसाय की समझ विरासत में मिली थी, लेकिन खुद की कंपनी हैप्पिलो शुरू करने में उन्हें बीस से ज्यादा बार असफलताओं का सामना करना पड़ा। जब वह अपने विचार लेकर निवेशकों के पास जाते, तो हर बार निराशा ही हाथ लगती। इस संघर्ष के दौर में उन्होंने खुदरा विक्रेता और वितरक के रूप में भी काम किया। जब निवेशकों ने हाथ पीछे खींच लिए, तो अपनी जमापूंजी के महज 10 हजार रुपये और दो कर्मचारियों के साथ विकास ने हैप्पिलो की शुरुआत की। बाद में उनकी पत्नी ने 20 लाख रुपये का लोन लेकर निवेश किया। कुछ समय बाद सरकार की सीजीटीएमएसई योजना के तहत 75 लाख रुपये की सहायता मिली, जिसने कंपनी को आगे बढ़ने की मजबूत नींव दी।
विकास की उड़ान
आज हैप्पिलो केवल एक ब्रांड नहीं, बल्कि भारतीय उद्योग जगत में एक प्रेरक मिसाल बन चुका है। 40 से अधिक किस्मों के पैकेटबंद सूखे मेवे, 100 से ज्यादा चॉकलेट वैरायटी और 60 से अधिक मसालों के साथ कंपनी ने सेहत और स्वाद, दोनों में अपनी अलग पहचान बनाई है। आज 500 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार कर रही यह कंपनी दूरदर्शी नेतृत्व और नवाचार की मिसाल है। पांच भाषाओं में दक्ष विकास की वैश्विक दृष्टि और निरंतर सीखने की ललक उन्हें भीड़ से अलग खड़ा करती है। ‘शार्क टैंक इंडिया’ में मौजूदगी, फोर्ब्स और टाइम्स की ‘40 अंडर 40’ सूची में स्थान और अनेक प्रतिष्ठित पुरस्कार विकास के धैर्य और मेहनत का प्रमाण हैं।
युवाओं को सीख
- असफलताओं से घबराने के बजाय उनसे सबक लेना चाहिए।
- बड़े सपने देखें, लेकिन शुरुआत छोटी करने से न डरें।
- धैर्य और निरंतर प्रयास ही सफलता की कुंजी हैं।
- दूरदर्शिता और आत्मविश्वास से ही स्थायी सफलता मिलती है।