पढ़ाई पूरी करने के बाद आज के युवा नौकरी खोजने की शुरुआत करते हैं, अगर उन्हें नौकरी नहीं मिलती तो वो जिंदगी से हताश हो जाते हैं लेकिन झारखंड की अनीता देवी ने हार नहीं मानी और दूसरों के लिए ऐसा उदाहरण बनीं कि आज सैकड़ों लोगों को रोजगार दे रहीं हैं। हम आपको बताने जा रहे हैं कैसे अनीता देवी ने नौकरी नहीं मिलने पर सफलतापूर्वक लघु उद्योग शुरु कर दिया।
झारखंड में गुमला जिले के अति पिछड़े इलाके बिशुनपुर में अनीता देवी का घर है। छोटी जगह से होने के बावजूद उन्होंने ग्रेजुएशन तक की पढ़ाई पूरी की और कई परीक्षाएं देना शुरू कर दिया, लेकिन उन्हें हर जगह से निराशा ही मिली। जिसके बाद अनीता देवी ने अपने गांव में घर पर अचार बनाकर बेचने का काम शुरू किया।
अनीता ने अचार की अलग-अलग रेसिपी बनाई जिसे खूब पसंद किया गया। जब धीरे-धीरे अनीता का काम बढ़ता गया तो उन्होंने अपने गांव की ही कई महिलाओं को अचार बनाने के काम पर रख लिया इसका एक फायदा तो यह हुआ कि गांव से कई महिलाओं का पलायन रुक गया।