मैं चाहता हूं कि अपने इलाके मैं एक कॉलेज का निर्माण कराऊं, जिससे इलाके के लोग साक्षर होने के साथ उच्च शिक्षा भी हासिल कर सकें। वैसे भी मैंने महसूस किया है कि निरक्षरता एक तरह का पाप है और यह सभी बीमारियों का मूल कारण है।
शिक्षा की कमी के कारण अधिकांश परिवारों को विभिन्न तरह की समस्याओं का सामना करना पड़ता है। गरीबी के कारण भले ही मुझे पढ़ाई छोड़नी पड़ी हो, लेकिन मुझे खुशी है कि मैंने अपने बच्चों समेत आसपास के सभी बच्चों के लिए इतना इंतजाम कर दिया है कि उनके साथ ऐसा न हो।
हालांकि पत्नी समेत सात बच्चों के परिवार की जिम्मेदारी के साथ अपने सपने को साकार कर पाना मेरे लिए आसान कभी नहीं रहा। बावजूद इसके मैंने अब तक किसी भी स्कूल का नाम खुद के नाम से नहीं जोड़ा। बस एक हाई स्कूल का नाम मेरे नाम पर है, वह भी गांव वालों के विशेष आग्रह की वजह से। शिक्षा के लिए की गई मेरी मेहनत का नतीजा देर से ही सही, पर दिखने लगा है।
कुछ ही समय पहले इलाके के विधायक ने सरकारी योजना के अंतर्गत मेरे हाई स्कूल के विकास के लिए ग्यारह लाख रुपये की मदद की घोषणा की है।
मैं बूढ़ा हो रहा हूं, लेकिन आज भी रिक्शा खींचता हूं। मैं चाहता हूं कि अपनी आखिरी सांसों तक मैं अपने सपने को और विस्तृत करता रहूं।
-विभिन्न साक्षात्कारों पर आधारित।