वह देख नहीं सकती है, लेकिन आंखों की ये अक्षमता उसे सपने देखने से नहीं रोक पाती है। उन सपनों को वो हकीकत में बदलती है। हरदम आंखों में धुंधलका भले ही रहे, लेकिन वो किस्मत को आंखें दिखा देती है। ये कहानी उन लोगों के जीवन में प्रकाश ला सकती है जो आंखें होते हुए भी निराशा के अंधकार में डूबे हैं।
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जिंदगी में कुछ सार्थक करना चाहते हैं। देश-समाज के सच्चे प्रहरी बनना चाहते हैं। आईएएस अधिकारी बनकर देश की सेवा करना चाहते हैं तो देश की इस बेटी की कहानी जरूर पढ़ लें।
वो 6 साल की थी, जब एक दिन स्कूल के बच्चे ने उसकी एक आंख में पेंसिल घुसेड़ दी। हादसे ने उसकी एक आंख छीन ली। साल भर बाद के दिन पूरे अंधेरे हो गए क्योंकि साइड इफेक्ट ने दूसरी आंख की रौशनी खत्म कर दी।
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7 साल की उस लड़की के पास मायूसी भरा जीवन जीने की लाख वजहें थीं। वो छोटी बच्ची थी। लेकिन कमजोर नहीं थी। हिम्मत देखिए कि जिंदगी भर की यातना को धता बताकर वो यूं आगे बढ़ चली। आगे की स्लाइड में पढ़ें पूरी सक्सेस स्टोरी।
6 साल की थीं जब स्कूल के बच्चे ने आंख में घुसेड़ दी पेंसिल
साल भर बाद दूसरी आंख की रौशनी भी चली गई
- फोटो : thebetterindia
महाराष्ट्र के उल्हासनगर में रहने वाली प्रांजल पाटिल की कहानी इस बात की तस्दीक करती है कि हिम्मत, हौसला और इरादा हो तो कैसी भी शारीरिक अक्षमता आपको कामयाबी के रास्ते पर बढ़ने से नहीं रोक सकती है। प्रांजल 26 साल की हैं। आंखों से दिखाई नहीं देता लेकिन पहली ही बार में यूपीएससी (यूनियन पब्लिक सर्विस कमीशन) की परीक्षा पास कर ली। 773वीं ऑल इंडिया रैंकिंग के साथ प्रांजल ने आईएएस अधिकारी बनने की ओर कदम बढ़ा दिया है।
प्रांजल मानती है कि उनके माता-पिता का उनकी सफलता में सबसे बड़ा योगदान है। हादसे में गई आंखों के बाद प्रांजल के पिता ने उसे मुबंई के दादर स्थित श्रीमति कमला मेहता स्कूल में दाखिल कराया। ये स्कूल प्रांजल जैसे खास बच्चों के लिए था। पढ़ाई ब्रेल लिपि में होती थी। यहां से दसवीं तक की पढ़ाई की। चंदाबाई कॉलेज से आर्ट्स में 12वीं की, जिसमें प्रांजल के 85 फीसदी अंक आए। बीए की पढ़ाई के लिए प्रांजल ने मुंबई के सेंट जेवियर कॉलेज का रुख किया।
एक माराठी टीवी को दिए साक्षात्कार में प्रांजल ने बताया कि वो रोजाना उल्हासनगर से सीएसटी तक का सफर करती थीं। हरबार कुछ लोग उनकी मदद करते थे। वे सड़क पार कराते थे तो कभी ट्रेन में बैठा देते थे। लेकिन कुछ लोग ऐसे भी थे जो तमाम सवाल करते थे। वे कहते थे कि रोज इतनी दूर पढ़ने के लिए क्यों आती हो? उल्हासनगर में ही क्यों नहीं पढ़ती हो? लेकिन प्रांजल उनसे कह देती कि वो पढ़ेगी तो इसी कॉलेज में, और इसके लिए वो हर मुश्किल के लिए कमर कस चुकी है।
ग्रेजुएशन के दौरान बना लिया था आईएएस बनने का मन
किसी से बताया नहीं, सही समय आने पर शुरू की तैयारी
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ग्रेजुएशन करने के दौरान प्रांजल और उनके एक दोस्त ने पहली दफा इंडियन एडमिनिस्ट्रेटिव सर्विस के बारे में एक लेख पढ़ा। प्रांजल ने यूपीएससी की परीक्षा से संबंधित जानकारियां जुटानी शुरू कर दीं। उस वक्त प्रांजल ने किसी से जाहिर तो नहीं किया लेकिन मन ही मन आईएएस बनने की ठान ली।
ग्रेजुएशन पूरी होते ही प्रांजल की दिल्ली पहुंची। जेएनयू से एमए किया। परास्नातक के बाद अब प्रांजल के सामने अपना असली लक्ष्य था यूपीएससी परीक्षा की तैयारी। साल 2015 में तैयारी शुरू की। साथ-साथ एमफिल भी चल रही थी।
इस दौरान प्रांजल ने आंखों से अक्षम लोगों के लिए बने एक खास सॉफ्टवेयर जॉब एक्सेस विद स्पीच की मदद ली। प्रांजल को अब एक ऐसे लिखने वाले की जरूरत थी जो उसकी रफ्तार के साथ लिख सके। इस विकल्प की भरपाई विदुषी ने पूरी की। प्रांजल की मानें तो परीक्षा के दौरान विदुषी ने उसका बखूबी साथ दिया। वो बोलती थी तो विदुषी कागज पर उत्तर लिख देती थी। जब भी प्रांजल थोड़ा स्लो होती थीं तो विदुषी उसे डांट भी देती थी।
माता-पिता, दोस्तों और पति को देती हैं सफलता का श्रेय
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प्रांजल की शादी ओझारखेड़ा में रहने वाले पेशे से केबल ऑपरेटर कोमल सिंह पाटिल से हुई है। प्रांजल अपनी सफलता का श्रेय माता-पिता के अलावा दोस्तों और पति को भी देती हैं।
प्रांजल की सफलता इसलिए भी बड़ी है कि यूपीएससी परीक्षा पास करने के लिए किसी कोचिंग की मदद नहीं ली। प्रांजल कहती हैं कि पढ़ाई को वे एंज्वॉय करती हैं। जापान के बौद्ध फिलॉस्फर डाईसाकू इगेडा के लेखन को पढ़कर प्रांजल के हर दिन की शुरुआत होती है। प्रांजल की मानें तो इससे उन्हें ये प्रेरणा मिलती है कि जिंदगी में कुछ भी असंभव नहीं।
प्रांजल कहती हैं कि सफलता आपको प्रेरणा नहीं देती है। सफलता के लिए किए गए संघर्ष से प्रेरणा मिलती है। लेकिन सफलता जरूरी है क्योंकि तभी दुनिया आपके संघर्ष को तरजीह देती है। आपका नजरिया और ललक आपको आगे ले जाती है और हर किसी में ये क्षमता होती है कि वो एक सुंदर समाज को बना सके।
हम देश की इस बहादुर बेटी के सुनहरे भविष्य की कामना करते हैं और शुभकामनाएं देते हैं। आपको ये कहानी कैसी लगी, कमेंट बॉक्स में प्रतिक्रिया देना न भूलें। आप चाहते हैं कि ये सक्सेस स्टोरी लाखों के जीवन में उजाला लाए तो इसे शेयर करना न भूलें।