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'नौकरी छोड़कर सिर्फ दो लाख रुपये से शुरू किया था स्टार्टअप, पहले साल हमें मिले थे मात्र 20 ऑर्डर'

Sat, 12 May 2018 03:18 PM IST
सचिन बंसल
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फ्लिपकार्ट से अलग होना मेरे लिए बेहद भावुक फैसला है। फिलहाल मैं लंबी छुट्टी पर जा रहा हूं और कुछ व्यक्तिगत काम निपटाने पर ध्यान केंद्रित करूंगा, जिसके लिए मैं अब तक समय नहीं निकाल पाया।

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करीब पंद्रह साल पहले आईआईटी, दिल्ली से कंप्यूटर साइंस विषय में इंजीनियरिंग करने के बाद जब मैंने नौकरी शुरू की थी, तब मेरे दिमाग में खुद को प्रोफेशनल गेमर के तौर पर स्थापित करने की योजना थी। उस वक्त किसी स्टार्टअप या ऑनलाइन शॉपिंग कंपनी खोलने के बारे में बिल्कुल भी नहीं सोचा था। मेरा जन्म चंडीगढ़ में हुआ और मैं वहीं पला-बढ़ा हूं। दिल्ली में पढ़ने के बाद मैंने टेकस्पान कंपनी में बतौर सॉफ्टवेयर इंजीनियर अपना करियर शुरू किया। बाद में मुझे दुनिया की सबसे बड़ी ई-कॉमर्स कंपनी अमेजन में भी काम करने का मौका मिला।

इस तरह शुरू हुआ सफर
संयोग ही था कि अमेजन में मेरे साथ एक और बंसल काम कर रहा था और वह भी मूलतः चंडीगढ़ से था तथा उसने भी आईआईटी, दिल्ली से डिग्री हासिल की थी। बिन्नी और मैं उस वक्त रूममेट भी थे, जाहिर है कि हम कितने अच्छे दोस्त रहे होंगे। हम दोनों बंसल भले ही तकनीकी काम संभाल रहे थे, पर अमेजन में काम करते हुए हमें ऑनलाइन बाजार की ताकत का एहसास हुआ।
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एक दिन मैंने बिन्नी से एक विचार साझा किया कि क्यों न हम कुछ अपना काम करें, जिससे घर बैठे पैसे कमाए जा सकें। चूंकि हम एक ई-कॉम कंपनी में काम कर रहे थे, इसलिए मेरे दिमाग में पहला ख्याल शॉपिंग पोर्टल्स की तुलना करने वाला सर्च इंजन बनाने का आया। इस दिशा में जब हम बढ़े, तो हमें पता चला कि भारत में इतनी साइट ही नहीं हैं, जिनकी तुलना की जा सके। इस तरह यही वह घटना रही, जिसने हमें अपनी ई-कॉम साइट शुरू करने के लिए प्रेरित किया।

 

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ऑनलाइन बाजार को लेकर आश्वस्त था

हम दोनों ने मिलकर एक बड़ा जोखिम उठाया और नौकरी छोड़कर सिर्फ दो लाख रुपये से अपना स्टार्टअप शुरू किया। ऑनलाइन किताबें बेचने की योजना लिए हमने बंगलूरू में एक फ्लैट किराये पर लिया। संसाधन के नाम पर हमारे पास मात्र दो कंप्यूटर थे।

शुरुआती दस दिनों में हमारी वेबसाइट पर किसी भी किताब का ऑर्डर नहीं आया। आंध्र प्रदेश के एक ग्राहक ने हमें कंप्यूटर से जुड़ी एक किताब का पहला ऑर्डर दिया। यही नहीं, पहले साल हमें बमुश्किल कुल बीस ऑर्डर मिले। किसी ने भी हमें गंभीरता से नहीं लिया। वैसे तो हम भारत में ई-कॉम के भविष्य को लेकर आश्वस्त थे, पर अपनी शुरुआती विफलता से थोड़ा जरूर हिचकिचाए।

खास है भारतीय बाजार
फ्लिपकार्ट के नाम को भारत में ऑनलाइन शॉपिंग का पर्याय बनाने के लिए मैंने लगातार मेहनत की, जिसमें खुद स्कूटर से सामान की डिलीवरी करना भी शामिल है। नए उद्यमियों को मेरी यही सलाह है कि अपना काम तब तक चुका हुआ न मानें, जब तक आपके उत्पाद या सेवाओं के लिए आपका ग्राहक अपना बटुआ सहर्ष खोलने को तैयार न हो जाए।

भारतीय बाजार में काम कर रही किसी भी भारतीय कंपनी के बारे में एक रोमांचक बात यह है कि वह ग्राहकों तक उनके परिजनों से भावनात्मक रिश्तों के आधार पर अपने उत्पाद पहुंचा सकती है। मैं समझता हूं कि भारत में प्रत्येक उद्यमी को यह तरीका अपनाना चाहिए।

-हाल में जानी-मानी ई-कॉम कंपनी फ्लिपकार्ट से रिश्ता तोड़ने वाले कंपनी के सह-संस्थापक के साक्षात्कारों पर आधारित।
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