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80 कंपनियों ने किया रिजेक्ट, 10 हजार से शुरू किया कारोबार; आज देश के लोकप्रिय पॉडकास्टर्स में हैं राज शमानी

Mon, 27 Jul 2026 05:09 AM IST
प्रशांत तिवारी अमर उजाला ब्यूरो

सार

रैपर बनने का सपना देखने वाले राज शमानी ने परिवार की आर्थिक मुश्किलों के कारण महज 16 साल की उम्र में कारोबार संभाला। 10 हजार रुपये से शुरू किया गया उनका छोटा-सा डिशवॉशर व्यवसाय आगे चलकर सफल उद्योग में बदल गया। बोलने में झिझक और असफलताओं को पीछे छोड़ते हुए उन्होंने खुद को बेहतरीन वक्ता, उद्यमी और देश के सबसे लोकप्रिय पॉडकास्टर्स में शामिल किया।
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राज शमानी - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स
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विस्तार
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साल 2013 महज 16 साल का एक लड़का, जिसकी आंखों में रैपर बनने का सपना था। वह संगीत की दुनिया में अपनी अलग पहचान बनाना चाहता था। लेकिन जिंदगी ने उसके लिए कुछ और ही तय कर रखा था। एक तरफ पिता की बिगड़ती सेहत थी, तो दूसरी ओर आर्थिक संकट से जूझता पूरा परिवार। हालात इतने मुश्किल थे कि वर्षों की मेहनत से खड़ा किया गया पारिवारिक कारोबार लगभग डूब चुका था। उस वक्त उसके सामने दो ही रास्ते थे या तो परिस्थितियों के आगे हार मान लेता, या अपने सपनों को कुछ समय के लिए विराम देकर परिवार का मजबूत सहारा बनता। उसने दूसरा रास्ता चुना। रैपर बनने के अपने सपने को फिलहाल पीछे रखा और पूरे आत्मविश्वास के साथ परिवार के कारोबार की कमान संभाली। यही फैसला उसके जीवन का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट साबित हुआ। आज वही लड़का, जिसने कभी अपने सपनों को परिवार के लिए रोक दिया था, भारत के सबसे सफल युवा उद्यमियों, पॉडकास्ट होस्ट्स और कंटेंट क्रिएटर्स में गिना जाता है। नाम है राज शमानी। उनकी कहानी बताती है कि कभी-कभी सपनों को छोड़ना नहीं पड़ता, बस सही समय तक उन्हें संभालकर रखना पड़ता है। क्योंकि जब इरादे मजबूत हों, तो जिम्मेदारियां सपनों का अंत नहीं, बल्कि नई शुरुआत बन जाती हैं।
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कैसे मिली राज शमानी को संघर्ष की विरासत?
29 जुलाई, 1997 को मध्य प्रदेश के इंदौर में जन्मे राज ऐसे परिवार से आते हैं, जिसने सफलता से पहले संघर्ष का लंबा सफर तय किया। 1980 के दशक में उनके दादा, पिता और चाचा रोजगार की तलाश में राजस्थान से इंदौर आए थे। शुरुआती दिनों में परिवार सड़कों पर नारियल बेचकर अपना गुजारा करता था। वर्षों की मेहनत के बाद उनके पिता ने 'जादूगर' नाम से डिशवॉशर ब्रांड शुरू किया, जिससे परिवार की आर्थिक स्थिति बेहतर हुई। लेकिन वर्ष 2008 की आर्थिक मंदी ने कारोबार को बड़ा झटका दिया और 2013 में पिता की तबीयत बिगड़ने के बाद पूरा परिवार एक बार फिर मुश्किलों में घिर गया।

80 कंपनियों ने मौका नहीं दिया, फिर राज ने क्या किया?
परिवार की स्थिति को देखते हुए राज ने नौकरी की तलाश शुरू की। उन्होंने 80 से अधिक कंपनियों को ई-मेल भेजे, लेकिन कहीं से कोई सकारात्मक जवाब नहीं मिला। इसके बाद उन्होंने पिता से 10 हजार रुपये उधार लिए और डिशवॉशिंग लिक्विड बनाने का काम शुरू किया। इस क्षेत्र का उन्हें कोई अनुभव नहीं था। उन्होंने यूट्यूब पर वीडियो देखकर, किताबें पढ़कर और पिता से मार्गदर्शन लेकर सीखना शुरू किया। शुरुआत में कई प्रयोग असफल रहे, लेकिन उन्होंने हार नहीं मानी।
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घर-घर जाकर कैसे बेचा अपना पहला उत्पाद?
उत्पाद तैयार होने के बाद सबसे बड़ी चुनौती उसे ग्राहकों तक पहुंचाने की थी। राज स्थानीय दुकानदारों से मिले, लेकिन अधिकांश ने एक किशोर पर भरोसा करने से इन्कार कर दिया। इसके बाद वह खुद घर-घर जाकर अपना उत्पाद बेचने लगे। उन्होंने ग्राहकों की राय को गंभीरता से सुना और गुणवत्ता व कीमत दोनों पर लगातार काम किया। धीरे-धीरे छोटे दुकानदारों ने उनके उत्पाद को जगह देना शुरू कर दिया। यही छोटी-छोटी सफलताएं आगे चलकर शमानी इंडस्ट्रीज की मजबूत नींव बनीं।

बोलने की झिझक कैसे बनी सबसे बड़ी ताकत?
राज को शुरुआत में सार्वजनिक मंच पर बोलने में झिझक होती थी और अंग्रेजी भाषा पर भी उनकी अच्छी पकड़ नहीं थी। लेकिन उन्होंने इस कमजोरी को कभी अपनी राह का रोड़ा नहीं बनने दिया। लगातार अभ्यास और आत्मविश्वास के दम पर उन्होंने अपनी संवाद कला को निखारा। महज 17 वर्ष की उम्र में उन्होंने संयुक्त राष्ट्र के यूथ डेलिगेशन प्रोग्राम के तहत भारत का प्रतिनिधित्व किया। वह संयुक्त राष्ट्र की यूथ असेंबली में पहुंचने वाले सबसे कम उम्र के भारतीय वक्ताओं में शामिल हुए। इसके बाद वह चार बार टेडएक्स स्पीकर भी बने।

डिजिटल दुनिया में कैसे बने करोड़ों युवाओं की प्रेरणा?
राज ने महसूस किया कि सोशल मीडिया के जरिए वह अपने अनुभव और सीख लाखों लोगों तक पहुंचा सकते हैं। शुरुआत में उनके वीडियो बहुत कम लोगों ने देखे, लेकिन धीरे-धीरे उनका पॉडकास्ट बेहद लोकप्रिय हो गया। उनकी पुस्तक 'बिल्ड, डोंट टॉक' युवाओं के बीच काफी पसंद की जाती है। उनका नाम फोर्ब्स इंडिया 30 अंडर 30 की सूची में भी शामिल हो चुका है।

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युवाओं के लिए राज शमानी की सबसे बड़ी सीख क्या है?
  • मुश्किल परिस्थितियां इंसान की क्षमता को पहचानने का सबसे बेहतरीन अवसर होती हैं।
  • मौके का इंतजार करने के बजाय उन्हें खुद बनाने की कोशिश करनी चाहिए।
  • असफलता अंत नहीं, बल्कि सफलता की शुरुआत होती है।
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