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उत्तराखंड पीसीएस में प्रिया ने लहराया सफलता का परचम

Fri, 26 Sep 2014 02:36 PM IST
एजुकेशन डेस्क
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गाजियाबाद के प्रताप विहार की रहने वाली जय प्रिया आर्या ने पहले सिविल सेवा में जाने का मन बनाया और फिर उस इच्छा को पूरा करने के लिए दिल से प्रयास में जुट गईं। आखिरकार वह अपने लक्ष्य को प्राप्त करने में सफल रहीं। उनकी सफलता से यह साबित हो गया कि कुछ कर दिखाने का दृढ़ संकल्प हो तो अंतत: आपकी जीत होती ही है।
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गौरतलब है कि प्रिया ने अपने पहले प्रयास में ही उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा-2013 में सफलता का परचम लहराया। अपनी मेहनत के साथ-साथ इस सफलता के लिए प्रिया भगवान को भी धन्यवाद देना नहीं भूलतीं। पूरा परिवार बेटी की इस सफलता पर नाज कर रहा है। पेश है, उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन में असिस्टेंट इंजीनियर पद पर कार्यरत जय प्रिया आर्या से की गई बातचीत के मुख्य अंश:

अपनी सफलता को कैसे बयां करेंगी?
बहुत खुश हूं। अधिकारी बनने का सपना देखा था। खूब मेहनत की। दिसंबर, 2009 में मेरा सलेक्शन उत्तराखंड पावर कॉरपोरेशन में असिस्टेंट इंजीनियर पद पर हुआ। इसके साथ ही जल निगम, अंबेडकर कॉलेज में लेक्चरर और एमटीएनएल में जेटीओ के पद के लिए भी चयन हुआ। इनमें से
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पावर कॉरपोरेशन का चयन मैंने किया। लेकिन प्रशासनिक कार्यों में मेरी दिलचस्पी थी, इसलिए पीसीएस की परीक्षा में शामिल हुई। मेरा चयन कॉमर्शियल टैक्स डिपार्टमेंट में हुआ है। यह मेरा पहला मौका था।

उत्तराखंड पीसीएस परीक्षा का स्वरूप क्या है?
इसका स्वरूप अन्य राज्यों की पीसीएस परीक्षा की तरह ही है। प्री-एग्जाम में सामान्य अध्ययन के दो पेपर होते हैं। मेन एग्जाम में दो विषय चुनने होते हैं। मैंने लोक प्रशासन (पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन) और समाजशास्त्र (सोशियोलॉजी) को चुना। मुख्य परीक्षा पास करने के बाद इंटरव्यू से भी रूबरू होना पड़ता है।

अपनी तैयारी के बारे में बताएं?
मेरी तैयारी में समाचार-पत्रों का काफी योगदान रहा। मैंने खुद नोट्स बनाए और क्रॉनिकल, योजना और कुरुक्षेत्र जैसी पत्रिकाओं से अध्ययन किया।

दोनों विषयों के लिए प्रतिष्ठित लेखकों की किताबों से तैयारी की। मैं जॉब में हूं और डिस्ट्रिब्यूशन विभाग में हूं। यह विभाग जरूरी सेवाओं में आता है। इसलिए 24 घंटे अलर्ट रहती हूं। कोचिंग करना मेरे लिए तो संभव नहीं था, पर मैंने खुद नोट्स बनाने के अलावा कुलदीप व्यास सर और अविनाश सर से मदद ली। ग्रुप स्टडी से भी मुझे काफी मदद मिली। अध्ययन के लिए मैंने सुबह के समय 4 घंटे और शाम को 4 घंटे के लिए समय निर्धारित कर रखा था।

आपका इंटरव्यू कैसा रहा? इसके लिए आपने खुद को कैसे तैयार किया?
कुल मिलाकर मेरा इंटरव्यू अच्छा गया था। इंटरव्यू की तैयारी के लिए करंट अफेयर्स और अपने विषय के बेसिक को क्लियर किया। इंटरव्यू के दौरान अपने विषय और प्रशासन से जुड़े सवालों के जवाब मैंने ठीक तरह से दिए।

अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में बताएं?
मैंने गाजियाबाद के चिल्ड्रन अकादमी से 76 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं की है। उसके बाद राजकीय पॉलिटेक्निक, गाजियाबाद से इलेक्ट्रॉनिक्स में डिप्लोमा किया। फिर कुमायूं इंजीनियरिंग कॉलेज, अल्मोड़ा से 79 प्रतिशत अंकों के साथ इलेक्ट्रॉनिक्स एंड कम्युनिकेशंस में बीटेक किया।

परिवार का कितना सहयोग मिला?
मेरी सफलता मेरे परिवार की सफलता है। मेरे माता-पिता ने हमेशा मेरे फैसलों का समर्थन किया। हमेशा बेटों की तरह पढ़ाया और प्यार किया। उसी का नतीजा है कि आज मैं यहां पहुंची हूं।

विद्यार्थियों को आप क्या संदेश देना चाहेंगी?
खुद के साथ ईमानदार बनो। स्वयं को धोखा दोगे तो ठीक नहीं है। पूरे मन से तैयारी करो। सिलेबस ज्यादा होता है, इसलिए महत्वपूर्ण चीजों पर फोकस करना ठीक रहेगा। अपने नोट्स बनाएं और स्टडी टाइम मैनेज करें। लिखने की रेगुलर प्रैक्टिस जरूरी है।
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