अगर आप अपनी किस्मत को लेकर बेहद ही बुरा महसूस कर रहे हैं और लग रहा है दुनिया में सबसे बुरी किस्मत आप ही की है तो आपको प्रताप दिघावकर की कहानी पढ़नी चाहिए। इसे पढ़ने के बाद आप खुद को मिले मौकों के शुक्रगुजार होंगे और आप अपनी किस्मत को कोसना छोड़ देंगे।
प्रताप दिघावकर वो व्यक्ति है जिसने खेती करते हुए हिंदुस्तान के सबसे सम्मानित और सबसे कठिन परीक्षा को न केवल पास किया बल्कि नौकरी में जाने के बाद भी नए-नए परचम लहराए।
86% अंक के साथ पास की परीक्षा
प्रताप दिघावकर
प्रताप का जन्म महाराष्ट्र के नासिक के पास लितानिया नामक गांव में हुआ। प्रताप के गांव में एक ही स्कूल था। गांव के ही स्कूल से उन्होंने पढ़ाई पूरी की। प्रताप के पिता किसान थे। घर की आर्थिक हालत बहुत अच्छी नहीं थी लेकिन प्रताप में अच्छी पढ़ाई कर कुछ कर गुजरने का जुनून था।
प्रताप ने बताया कि एक दिन उन्होंने आसमान में एक हवाई जहाज देखा। जहाज देखने के बाद उन्होंने अपनी मां से पूछा, 'मां ये जहाज किसके होते हैं?' मां ने बताया कि ये सरकार के होते हैं और तभी से उन्होंने ठान लिया कि उन्हें इस सरकारी सिस्टम का हिस्सा होना है। उन्होंने दिन रात पढ़ाई शुरु कर दी। वो सीनियर सेकेंडरी बोर्ड एग्जाम में पहले नंबर पर आए।
गांव के आस-पास कोई कॉलेज नहीं था। गांव से 23 किलोमीटर दूर एक कॉलेज था, उन्होंने वहीं एडमिशन ले लिया। उन्होंने बताया कि कॉलेज 23 किलोमीटर दूर होने के बाद भी एक भी दिन कॉलेज मिस नहीं हुआ। परीक्षा में उनके 86% अंक आए लेकिन एक नंबर की वजह से उनका कॉलेज में एडमिशन नहीं हो पाया।
खेतों में काम करने लगे प्रताप
प्रताप दिघावकर
यहां से प्रताप की जिंदगी में एक बड़ा बदलाव आ गया। पिता ने कह दिया कि पढ़ाई छोड़ दो और साथ में खेती में हाथ बटाओ लेकिन प्रताप को अपनी मंजिल का अंदाजा था। उन्होंने ठान रखा था कि जिंदगी में कुछ करना है तो करना है। वो पिता के साथ खेत में काम करने लगे।
फिर एक दिन अपनी मां से 350 रुपये लेकर डिस्टेंस कोर्स में एडमिशन ले लिया। प्रताप दिन में पिता जी के साथ खेतों में काम करते थे और रात में पढ़ाई करते थे। इसी तरह उन्होंने अपनी डिग्री की पढ़ाई पूरी की।18 साल की उम्र में ही उन्होंने अपने ग्रेजुएशन की डिग्री पूरी कर ली। उसी साल 'सीडीएस' और पुलिस सर्विस दोनों ही परीक्षाएं भी पास कर ली।
प्रताप 1987 में मात्र 22 साल की उम्र में असिस्टेंट पुलिस कमिश्नर की पोस्ट के लिए चुन लिए गए। प्रताप का कहना है कि ये उनकी जिंदगी का सबसे खुशी वाला दिन था।
साल 2000 में प्रताप आईपीएस के लिए चुन लिए गए
प्रताप दिघावकर
लेकिन प्रताप ने इसके बाद भी अपनी पढ़ाई नहीं छोड़ी और नौकरी में रहते हुए भी लगातार पढ़ाई की। साल 2000 में प्रताप आईपीएस के लिए चुन लिए गए। एक किसान अब देश के सबसे सम्मानित पदों में से एक के लिए चुन लिया गया था।
लेकिन प्रताप यहीं नहीं रुके। उन्होंने गांव के बच्चों के लिए गांव में स्कूल खोला। तकरीबन 10000 कांस्टेबल के लिए हाउसिंग सोसाइटी बनवाई और इसके बाद उन्हें यूनाइटेड नेशन में भी बोलने के लिए बुलाया गया। प्रताप को वनश्री और इंदिरा प्रियदर्शिनी अवॉर्ड से भी नवाजा जा चुका है।
आखिर में प्रताप इतना ही बताते हैं कि ये सब कुछ संभव हो पाया क्योंकि ये उनका सपना था। उनका कहना है कि जो सपना देखा है उसके लिए इस कदर पैशन से जुट जाओ कि और कोई दूसरा रास्ता बचे ही ना सिवाय उसके पूरा होने के और ये होता है।