उत्तर प्रदेश पीसीएस परीक्षा - 2012 के हाल ही में घोषित परिणाम में कानपुर के रहने वाले वैभव को सफलता यूं हीं नहीं मिली। लगातार कई बार विभिन्न परीक्षाओं में सफलता पाने के बाद अंतत: पीसीएस में भी उन्हें सफलता मिल ही गई। अपनी सफलता के पीछे मां का आशीर्वाद और पिता का मार्गदर्शन मानने वाले वैभव पांडेय को डिप्टी सुपरिंटेंडेंट ऑफ पुलिस (डीएसपी) का पद मिला है। वर्तमान में कस्टम एवं सेंट्रल एक्साइज में इंस्पेक्टर पद पर तैनात वैभव के डीएसपी बनने तक के सफर के कुछ पल हमसे साझा किए। पेश है, उनसे हुई बातचीत के कुछ अंश :
परीक्षाओं का दौर कब से शुरू हुआ?
मैंने छत्तीसगढ़ पीसीएस-2009 का फार्म भरा था और मेंस तक मैंने परीक्षा दी थी। उसके बाद आईएएस-2011 की परीक्षा दी थी। यहां भी मेंस तक मैं जा पाया था। उसके बाद पीसीएस-2012 में बैठा और फाइनल सेलेक्शन हुआ। पीसीएस में मैंने हिस्ट्री और डिफेंस स्टडीज विषय को चुना था।
परीक्षा की तैयारी कैसे प्रारंभ की?
मैंने ग्रेजुएशन के साथ सिविल सर्विस की तैयारी शुरू कर दी थी। ठान लिया था कि अधिकारी बनना है। जब परीक्षा के लिए फार्म भरा, तो कानपुर के ऐपेक्स अकादमी से कोचिंग लेने के साथ-साथ सेल्फ स्टडी करने लगा।
कितने घंटे पढ़ाई करते थे?
चूंकि मैं जॉब भी करता था, इसलिए पढ़ाई अधिक नहीं हो पाती थी। मैं पूरी ईमानदारी से 6-7 घंटे पढ़ता था। इस बीच थोड़ी थकान होती थी, तो अखबार और टीवी पर न्जूज देखकर थोड़ा हल्का फील करता था। खुद नोट्स बनाए। इसके लिए विषयों की किताबें और एनसीईआरटी की किताबें काफी मददगार हुईं।
इंटरव्यू के बारे में जानकारी दें?
मेरा इंटरव्यू ओवरऑल अच्छा गया था। किसी बड़ी परीक्षा के लिए यह मेरा पहला ही इंटरव्यू था। कोचिंग से मुझे इंटरव्यू की तैयारी में भी मदद मिली। इंटरव्यू के लिए विषयों की तैयारी तो रहनी ही चाहिए, जिसके तहत फैक्ट्स को याद रखने पर खास बल दें। इसके अलावा अपने व्यक्तित्व पर विशेष रूप से ध्यान दें, क्योंकि आपका हाव-भाव इंटरव्यू को प्रभावित करता है। आपको जो पता है, उसके बारे में सही-सही जानकारी दें। बोर्ड के सदस्यों को मिसगाइड करने की कोशिश कतई न करें।
अपनी शैक्षणिक पृष्ठभूमि के बारे में जानकारी दें?
मैंने कानपुर के सेंट थॉमस स्कूल से 83 प्रतिशत अंकों के साथ 10वीं की। फिर वहीं बीएनएसडी से 74 प्रतिशत के साथ 12वीं की। उसके बाद पीपीएन कॉलेज, कानपुर से 74 प्रतिशत के साथ बीए और फिर इसी कॉलेज से 70 प्रतिशत अंकों के साथ जियोग्राफी से एमए की डिग्री हासिल की।
अपनी सफलता का श्रेय आप किसे देना चाहेंगी?
अपने परिवार की वजह से ही मुझे यह सफलता मिली है। मेरे पापा मेरे मार्गदर्शक हैं, जबकि मेरी मम्मी ने हमेशा मेरा ध्यान रखा। अन्य लोगों ने भी मेरे हर फैसले में मेरा साथ दिया।
आपकी सफलता का मूल-मंत्र क्या है?
जो भी काम करें, पूरे मनोयोग से करें। असफलता से भटकें नहीं, बल्कि प्रयास और तेज कर दें। रात के बाद दिन जरूर होता है।